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शिमला , 01 फरवरी [ विशाल सूद ] ! हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने आज प्रस्तुत केंद्र के केंद्रीय बजट पर गहरी निराशा व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि आपदा‑प्रभावित और पहाड़ी राज्य होने के बावजूद इस बजट में हिमाचल के लिए राजस्व घाटा अनुदान का प्रावधान न रखना अत्यंत चिंताजनक है। हाल के वर्षों में वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत हिमाचल को मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान लगातार घटा है और अब इसे व्यावहारिक रूप से समाप्त कर दिया गया है, जबकि राज्य की वित्तीय स्थिति और आपदाओं से हुए भारी नुक़सान को देखते हुए सहयोग बढ़ाया जाना चाहिए था, कम नहीं। विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि हिमाचल की अर्थव्यवस्था पहले ही गंभीर दबाव में है, जहाँ वेतन, पेंशन, ब्याज व कर्ज अदायगी पर भारी व्यय, सीमित कर‑आधार और बार‑बार की प्राकृतिक आपदाओं ने राज्य की वित्तीय चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। ऐसे समय में राजस्व घाटा अनुदान और विशेष पैकेज की अनुपस्थिति से सड़कों, पुलों, पेयजल, सिंचाई तथा पुनर्निर्माण जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के कार्य सीधे प्रभावित होंगे और विकास की रफ़्तार पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा किसी एक दल – कांग्रेस या भाजपा – का नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश और यहाँ के लोगों के दीर्घकालिक हितों से जुड़ा है। संघीय ढांचे की भावना के अनुरूप यह आवश्यक है कि केंद्र सरकार पहाड़ी और आपदा‑प्रभावित राज्यों की विशेष परिस्थितियों को समझे और राजनीतिक विचारों से ऊपर उठकर उन्हें समुचित वित्तीय सहायता प्रदान करे। लोक निर्माण मंत्री ने केंद्र सरकार से मांग की कि हिमाचल प्रदेश के लिए राजस्व घाटा अनुदान की बहाली, आपदा‑पुनर्वास और बुनियादी ढांचे के लिए विशेष वित्तीय पैकेज पर तुरंत सकारात्मक पुनर्विचार किया जाए, ताकि राज्य पुनर्निर्माण और विकास के अपने दायित्वों को प्रभावी ढंग से निभा सके और पहाड़ की अर्थव्यवस्था को स्थिर व सशक्त आधार मिल सके।
शिमला , 01 फरवरी [ विशाल सूद ] ! हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने आज प्रस्तुत केंद्र के केंद्रीय बजट पर गहरी निराशा व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि आपदा‑प्रभावित और पहाड़ी राज्य होने के बावजूद इस बजट में हिमाचल के लिए राजस्व घाटा अनुदान का प्रावधान न रखना अत्यंत चिंताजनक है। हाल के वर्षों में वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत हिमाचल को मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान लगातार घटा है और अब इसे व्यावहारिक रूप से समाप्त कर दिया गया है, जबकि राज्य की वित्तीय स्थिति और आपदाओं से हुए भारी नुक़सान को देखते हुए सहयोग बढ़ाया जाना चाहिए था, कम नहीं।
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि हिमाचल की अर्थव्यवस्था पहले ही गंभीर दबाव में है, जहाँ वेतन, पेंशन, ब्याज व कर्ज अदायगी पर भारी व्यय, सीमित कर‑आधार और बार‑बार की प्राकृतिक आपदाओं ने राज्य की वित्तीय चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। ऐसे समय में राजस्व घाटा अनुदान और विशेष पैकेज की अनुपस्थिति से सड़कों, पुलों, पेयजल, सिंचाई तथा पुनर्निर्माण जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के कार्य सीधे प्रभावित होंगे और विकास की रफ़्तार पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा किसी एक दल – कांग्रेस या भाजपा – का नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश और यहाँ के लोगों के दीर्घकालिक हितों से जुड़ा है। संघीय ढांचे की भावना के अनुरूप यह आवश्यक है कि केंद्र सरकार पहाड़ी और आपदा‑प्रभावित राज्यों की विशेष परिस्थितियों को समझे और राजनीतिक विचारों से ऊपर उठकर उन्हें समुचित वित्तीय सहायता प्रदान करे।
लोक निर्माण मंत्री ने केंद्र सरकार से मांग की कि हिमाचल प्रदेश के लिए राजस्व घाटा अनुदान की बहाली, आपदा‑पुनर्वास और बुनियादी ढांचे के लिए विशेष वित्तीय पैकेज पर तुरंत सकारात्मक पुनर्विचार किया जाए, ताकि राज्य पुनर्निर्माण और विकास के अपने दायित्वों को प्रभावी ढंग से निभा सके और पहाड़ की अर्थव्यवस्था को स्थिर व सशक्त आधार मिल सके।
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