सदन में महापौर का आचरण दुर्भाग्यपूर्ण, भाजपा पार्षदों पर टिप्पणी निंदनीय
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शिमला , 27 फरवरी [ विशाल सूद ] ! नगर निगम शिमला की मासिक बैठक में मेयर-डिप्टी मेयर के कार्यकाल बढ़ाने के मुद्दे पर हुए हंगामे को लेकर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि जब राज्यपाल द्वारा अध्यादेश को स्वीकृति नहीं मिली और उसकी समय सीमा भी समाप्त हो चुकी है, तब वर्तमान महापौर का पद पर बने रहना पूर्णतः असंवैधानिक है। भारद्वाज ने कहा कि महापौर का ढाई वर्ष का कार्यकाल 14 नवंबर को समाप्त हो चुका है और रोस्टर के अनुसार यह सीट महिला के लिए आरक्षित है। ऐसे में पद पर बने रहना न केवल संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन है, बल्कि महिला आरक्षण के अधिकारों की भी खुली अनदेखी है। कांग्रेस सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को ताक पर रखकर सत्ता से चिपके रहने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि 2 मार्च को इस मामले में न्यायालय में सुनवाई प्रस्तावित है, जिससे स्पष्ट है कि मामला कानूनी रूप से विचाराधीन है। इसके बावजूद सदन की कार्यवाही शुरू करना और वैधता पर उठे प्रश्नों की अनदेखी करना पूरी तरह अलोकतांत्रिक है। संदीपनी भारद्वाज ने महापौर के व्यवहार को भी दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि सदन गरिमा और शिष्टाचार का मंच होता है, लेकिन भाजपा पार्षदों के प्रति की गई टिप्पणी निंदनीय है। असहमति को दबाने और सवाल उठाने वालों पर व्यक्तिगत टिप्पणी करना लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि भाजपा स्पष्ट मांग करती है कि तय रोस्टर के अनुसार महिला आरक्षित सीट पर शीघ्र चुनाव करवाए जाएं और नगर निगम की कार्यवाही संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप चलाई जाए। कांग्रेस को लोकतंत्र और महिला सम्मान के साथ खिलवाड़ बंद करना चाहिए।
शिमला , 27 फरवरी [ विशाल सूद ] ! नगर निगम शिमला की मासिक बैठक में मेयर-डिप्टी मेयर के कार्यकाल बढ़ाने के मुद्दे पर हुए हंगामे को लेकर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि जब राज्यपाल द्वारा अध्यादेश को स्वीकृति नहीं मिली और उसकी समय सीमा भी समाप्त हो चुकी है, तब वर्तमान महापौर का पद पर बने रहना पूर्णतः असंवैधानिक है।
भारद्वाज ने कहा कि महापौर का ढाई वर्ष का कार्यकाल 14 नवंबर को समाप्त हो चुका है और रोस्टर के अनुसार यह सीट महिला के लिए आरक्षित है। ऐसे में पद पर बने रहना न केवल संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन है, बल्कि महिला आरक्षण के अधिकारों की भी खुली अनदेखी है। कांग्रेस सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को ताक पर रखकर सत्ता से चिपके रहने का प्रयास कर रही है।
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उन्होंने कहा कि 2 मार्च को इस मामले में न्यायालय में सुनवाई प्रस्तावित है, जिससे स्पष्ट है कि मामला कानूनी रूप से विचाराधीन है। इसके बावजूद सदन की कार्यवाही शुरू करना और वैधता पर उठे प्रश्नों की अनदेखी करना पूरी तरह अलोकतांत्रिक है।
संदीपनी भारद्वाज ने महापौर के व्यवहार को भी दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि सदन गरिमा और शिष्टाचार का मंच होता है, लेकिन भाजपा पार्षदों के प्रति की गई टिप्पणी निंदनीय है। असहमति को दबाने और सवाल उठाने वालों पर व्यक्तिगत टिप्पणी करना लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है।
उन्होंने कहा कि भाजपा स्पष्ट मांग करती है कि तय रोस्टर के अनुसार महिला आरक्षित सीट पर शीघ्र चुनाव करवाए जाएं और नगर निगम की कार्यवाही संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप चलाई जाए। कांग्रेस को लोकतंत्र और महिला सम्मान के साथ खिलवाड़ बंद करना चाहिए।
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