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शिमला , 26 मार्च [ विशाल सूद ] ! डाॅ. सिकंदर कुमार, राज्यसभा सांसद एवं प्रदेश महामंत्री भाजपा ने सदन में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री से पूछा कि हिमाचल प्रदेश मे स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना हेतु, विशेषकर जिला स्तरीय ट्राॅमा केंद्रों के विस्तार और नए संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवर संस्थानों की स्थापना के संबंध में, वर्तमान बजट के अंतर्गत कुल कितना वित्तीय आवंटन किया गया ? हिमालयी क्षेत्र में क्षेत्रीय मानसिक स्वासथ्य असमानताओं को दूर करने के लिए नव घोषित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान का हिमाचल प्रदेश में स्थापित करने की क्या योजना है और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के साथ एकीकरण के माध्यम से राज्य की 3,000 करोड़ रूपय की स्वास्थ्य सेवा आधुनिकीकरण को समर्थन देने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे है ? प्रतापराव जाधव, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय राज्य मंत्री ने बाताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 की बजट के अनुसार हम जिला अस्पतालों में आपातकाली एवं आघात परिचर्या केंद्र स्थापित करके इन क्षमताओं को 50 प्रतिशत तक सुर्दृढ़ करेंगे और बढ़ाएंगे। हिमाचल सरकार ने भी चालू वित वर्ष 2025-26 मे ट्राॅमा केंद्रों के लिए केवल सांकेतिक रूप से 4 लाख रूपये का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त राज्य बजट के तहत सिविल कार्यों के लिए 156.57 करोड़ रूपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। इसके अलावा पीएम-एबीएचआईएम के तहत, 2021-22 से 2025-26 तक, हिमाचल प्रदेश को स्वास्थ्य प्रणाली के सुदृढीकरण (विशेष रूप से गहन परिचर्या और नैदानिक अवसंरचना) के लिए 184.64 करोड़ रूपये की राशि प्राप्त हुई है। केन्द्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि उतर भारत मे मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के लिए कोई राष्ट्रीय संस्थान नहीं है, इसलिए हम एक निम्हांस-2 स्थापित करेंगे और रांची एवं तेजपुर मे राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों को क्षेत्रीस शीर्ष संस्थानों के रूप मे उन्नत करेंगे। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की मानव संसाधन योजना के तहत, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञताओं में स्नातकोतर विभागों में छात्रों की संख्या बढ़ाने और विशिष्ट स्तर की उपचार सुविधाएं प्रदान करने के लिए 25 उत्कृष्टता केंद्रों को मंजूरी दी गई है और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञताओं में 47 स्नातकोतर विभागों को मजबूत करने के लिए 19 सरकारी मेडिकल काॅलेजों/संस्थानों को भी सहायता प्रदान की है। हिमाचल प्रदेश में डाॅ0 राजेंद्र प्रसाद मेडिकल काॅलेज टांडा को मानव संसाधन विकास योजना के माध्यम से एनएमएचपी के विशिष्ट परिचर्या घटक के तहत सहायता प्राप्त है। संस्थान को कुल 31.45 करोड़ रूपये की राशि स्वीकृत की गई थी जिसमें से 28.30 करोड़ रूपये केंद्रीय हिस्सा पहले ही जारी किया जा चुका है। इसके अलावा इंदिरा गांधी मेडिकल काॅलेज और अस्पताल, शिमला के स्नातकोतर विभाग को मजबूत करने के लिए 65.70 लाख रूपये के कुल स्वीकृत केंद्रीय में से 49.27 लाख रूपये की राशि निर्गत की जा चुकी है। उन्होनें आगे कहा कि एक एकीकृत, नागरिक-केंद्रिय राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र के विकास में सहयोग देने के लिए भारत सरकार द्वारा सितंबर, 2021 में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीम) का शुभारंभ किया गया था। एबीडीम एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसके तहत राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को एबीडीएम कार्यान्वयन के लिए तैनात मानव संसाधनों, विभिन्न हितधारकों की क्षमता निर्माण और सूचना, शिक्षा एवं संचार के लिए धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। 19 मार्च, 2026 तक हिमाचल प्रदेश को 1.28 करोड़ रूपये की राशि संवितरित की जा चुकी है।
शिमला , 26 मार्च [ विशाल सूद ] ! डाॅ. सिकंदर कुमार, राज्यसभा सांसद एवं प्रदेश महामंत्री भाजपा ने सदन में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री से पूछा कि हिमाचल प्रदेश मे स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना हेतु, विशेषकर जिला स्तरीय ट्राॅमा केंद्रों के विस्तार और नए संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवर संस्थानों की स्थापना के संबंध में, वर्तमान बजट के अंतर्गत कुल कितना वित्तीय आवंटन किया गया ?
हिमालयी क्षेत्र में क्षेत्रीय मानसिक स्वासथ्य असमानताओं को दूर करने के लिए नव घोषित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान का हिमाचल प्रदेश में स्थापित करने की क्या योजना है और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के साथ एकीकरण के माध्यम से राज्य की 3,000 करोड़ रूपय की स्वास्थ्य सेवा आधुनिकीकरण को समर्थन देने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे है ?
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प्रतापराव जाधव, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय राज्य मंत्री ने बाताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 की बजट के अनुसार हम जिला अस्पतालों में आपातकाली एवं आघात परिचर्या केंद्र स्थापित करके इन क्षमताओं को 50 प्रतिशत तक सुर्दृढ़ करेंगे और बढ़ाएंगे। हिमाचल सरकार ने भी चालू वित वर्ष 2025-26 मे ट्राॅमा केंद्रों के लिए केवल सांकेतिक रूप से 4 लाख रूपये का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त राज्य बजट के तहत सिविल कार्यों के लिए 156.57 करोड़ रूपये का बजटीय प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा पीएम-एबीएचआईएम के तहत, 2021-22 से 2025-26 तक, हिमाचल प्रदेश को स्वास्थ्य प्रणाली के सुदृढीकरण (विशेष रूप से गहन परिचर्या और नैदानिक अवसंरचना) के लिए 184.64 करोड़ रूपये की राशि प्राप्त हुई है।
केन्द्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि उतर भारत मे मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के लिए कोई राष्ट्रीय संस्थान नहीं है, इसलिए हम एक निम्हांस-2 स्थापित करेंगे और रांची एवं तेजपुर मे राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों को क्षेत्रीस शीर्ष संस्थानों के रूप मे उन्नत करेंगे। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की मानव संसाधन योजना के तहत, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञताओं में स्नातकोतर विभागों में छात्रों की संख्या बढ़ाने और विशिष्ट स्तर की उपचार सुविधाएं प्रदान करने के लिए 25 उत्कृष्टता केंद्रों को मंजूरी दी गई है और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञताओं में 47 स्नातकोतर विभागों को मजबूत करने के लिए 19 सरकारी मेडिकल काॅलेजों/संस्थानों को भी सहायता प्रदान की है।
हिमाचल प्रदेश में डाॅ0 राजेंद्र प्रसाद मेडिकल काॅलेज टांडा को मानव संसाधन विकास योजना के माध्यम से एनएमएचपी के विशिष्ट परिचर्या घटक के तहत सहायता प्राप्त है। संस्थान को कुल 31.45 करोड़ रूपये की राशि स्वीकृत की गई थी जिसमें से 28.30 करोड़ रूपये केंद्रीय हिस्सा पहले ही जारी किया जा चुका है। इसके अलावा इंदिरा गांधी मेडिकल काॅलेज और अस्पताल, शिमला के स्नातकोतर विभाग को मजबूत करने के लिए 65.70 लाख रूपये के कुल स्वीकृत केंद्रीय में से 49.27 लाख रूपये की राशि निर्गत की जा चुकी है।
उन्होनें आगे कहा कि एक एकीकृत, नागरिक-केंद्रिय राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र के विकास में सहयोग देने के लिए भारत सरकार द्वारा सितंबर, 2021 में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीम) का शुभारंभ किया गया था। एबीडीम एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसके तहत राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को एबीडीएम कार्यान्वयन के लिए तैनात मानव संसाधनों, विभिन्न हितधारकों की क्षमता निर्माण और सूचना, शिक्षा एवं संचार के लिए धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। 19 मार्च, 2026 तक हिमाचल प्रदेश को 1.28 करोड़ रूपये की राशि संवितरित की जा चुकी है।
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