केंद्रीय बजट से नही उम्मीद फिर भी 1 फरवरी के इंतजार,परिवर्तन होता है या लकीर का फकीर वाला रवैया
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शिमला , 28 जनवरी [ विशाल सूद ] ! यूजीसी संशोधन को लेकर जहां पूरे देश भर में माहौल गर्म है और इसको लेकर आंदोलन भी किया जा रहे हैं वहीं हिमाचल प्रदेश के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने इसे सही ठहराया है इसे सुप्रीम कोर्ट की देन कहा है इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय बजट को लेकर भी कोई खास उम्मीद नहीं जताई है उन्होंने कहा है 1 फरवरी का इंतजार रहेगा और देखना है परिवर्तन होता है या लकीर के फकीर वाली बात रहती है। प्रदेश सरकार में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने यूजीसी संशोधन को सही ठहराते हुए केंद्र सरकार और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। नेगी ने कहा कि यह संशोधन केंद्र सरकार की मर्जी से नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत लाया गया है, लेकिन अब उसी पर एबीवीपी के जरिए आंदोलन करवा कर भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा विरोध पूरी तरह से भाजपा प्रायोजित और माइनॉरिटी विरोधी है। मंत्री ने कहा कि इस संशोधन से बहुसंख्यक समाज को कोई नुकसान नहीं है, बल्कि यह विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अल्पसंख्यकों के लिए सेफगार्ड उपलब्ध कराता है। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से उच्च शिक्षण संस्थानों में माइनॉरिटी छात्रों के साथ भेदभाव हो रहा था, जो कई मामलों में चरम पर पहुंच गया और छात्रों को अपनी जान तक गंवानी पड़ी। ऐसे में यूजीसी संशोधन को किसी “सौगात” के रूप में पेश करना गलत है, यह पूरी तरह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में लाया गया प्रावधान है। जगत सिंह नेगी ने कहा कि देश को अखंड भारत की बातों से नहीं, व्यवहार से जोड़ा जा सकता है। आज शक्ल और चेहरे के आधार पर लोगों पर हमले हो रहे हैं। नॉर्थ ईस्ट के छात्रों के साथ दिल्ली समेत अन्य राज्यों में जिस तरह का व्यवहार होता है, वह बेहद चिंताजनक है। उन्होंने चेताया कि भाजपा की संकीर्ण सोच अगर इसी तरह हावी रही तो यह देश की एकता और अखंडता के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। यूनियन बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार से बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं है, फिर भी हिमाचल प्रदेश के हित में इंतजार किया जाएगा कि 1 फरवरी को बदलाव दिखता है या फिर वही “लकीर के फकीर” वाला रवैया रहता है। उन्होंने कहा कि 16वें वित्त आयोग से कितनी राहत मिलेगी, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। नेगी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार बनने के बाद से केंद्र सरकार हिमाचल के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया अपना रही है। चाहे आपदा राहत हो, जीएसटी का हिस्सा हो या रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट—हर मोर्चे पर प्रदेश को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 और 2025 में प्रदेश में भीषण आपदाएं आईं, लेकिन केंद्र से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। हिमाचल को विशेष बजटीय सहायता की आवश्यकता है। मंत्री ने उम्मीद जताई कि आगामी बजट में रेलवे, बागवानी और कृषि के लिए अलग से प्रावधान होंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि मनरेगा को भी केंद्र सरकार ने लगभग पटरी से उतार दिया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। इस दौरान मंत्री जगत सिंह नेगी ने महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए इसे देश के लिए बड़ी क्षति बताया और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
शिमला , 28 जनवरी [ विशाल सूद ] ! यूजीसी संशोधन को लेकर जहां पूरे देश भर में माहौल गर्म है और इसको लेकर आंदोलन भी किया जा रहे हैं वहीं हिमाचल प्रदेश के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने इसे सही ठहराया है इसे सुप्रीम कोर्ट की देन कहा है इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय बजट को लेकर भी कोई खास उम्मीद नहीं जताई है उन्होंने कहा है 1 फरवरी का इंतजार रहेगा और देखना है परिवर्तन होता है या लकीर के फकीर वाली बात रहती है।
प्रदेश सरकार में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने यूजीसी संशोधन को सही ठहराते हुए केंद्र सरकार और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। नेगी ने कहा कि यह संशोधन केंद्र सरकार की मर्जी से नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत लाया गया है, लेकिन अब उसी पर एबीवीपी के जरिए आंदोलन करवा कर भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा विरोध पूरी तरह से भाजपा प्रायोजित और माइनॉरिटी विरोधी है।
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मंत्री ने कहा कि इस संशोधन से बहुसंख्यक समाज को कोई नुकसान नहीं है, बल्कि यह विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अल्पसंख्यकों के लिए सेफगार्ड उपलब्ध कराता है। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से उच्च शिक्षण संस्थानों में माइनॉरिटी छात्रों के साथ भेदभाव हो रहा था, जो कई मामलों में चरम पर पहुंच गया और छात्रों को अपनी जान तक गंवानी पड़ी। ऐसे में यूजीसी संशोधन को किसी “सौगात” के रूप में पेश करना गलत है, यह पूरी तरह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में लाया गया प्रावधान है।
जगत सिंह नेगी ने कहा कि देश को अखंड भारत की बातों से नहीं, व्यवहार से जोड़ा जा सकता है। आज शक्ल और चेहरे के आधार पर लोगों पर हमले हो रहे हैं। नॉर्थ ईस्ट के छात्रों के साथ दिल्ली समेत अन्य राज्यों में जिस तरह का व्यवहार होता है, वह बेहद चिंताजनक है। उन्होंने चेताया कि भाजपा की संकीर्ण सोच अगर इसी तरह हावी रही तो यह देश की एकता और अखंडता के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।
यूनियन बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार से बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं है, फिर भी हिमाचल प्रदेश के हित में इंतजार किया जाएगा कि 1 फरवरी को बदलाव दिखता है या फिर वही “लकीर के फकीर” वाला रवैया रहता है। उन्होंने कहा कि 16वें वित्त आयोग से कितनी राहत मिलेगी, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
नेगी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार बनने के बाद से केंद्र सरकार हिमाचल के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया अपना रही है। चाहे आपदा राहत हो, जीएसटी का हिस्सा हो या रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट—हर मोर्चे पर प्रदेश को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 और 2025 में प्रदेश में भीषण आपदाएं आईं, लेकिन केंद्र से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। हिमाचल को विशेष बजटीय सहायता की आवश्यकता है।
मंत्री ने उम्मीद जताई कि आगामी बजट में रेलवे, बागवानी और कृषि के लिए अलग से प्रावधान होंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि मनरेगा को भी केंद्र सरकार ने लगभग पटरी से उतार दिया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। इस दौरान मंत्री जगत सिंह नेगी ने महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए इसे देश के लिए बड़ी क्षति बताया और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
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