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शिमला , 19 मार्च [ विशाल सूद ] ! शिमला पुलिस ने एक ऐसा 'महा-धमाका' जिसने महकमे के भीतर छिपे गद्दारों की नींद उड़ा दी है। प्रदेश को नशा मुक्त बनाने की कसम खाने वाले खाकी के पीछे छिपे नशा तस्कर आज खुद सलाखों के पीछे हैं। 10 मार्च को शुरू हुई LSD तस्करी की जांच जब गहराई में उतरी, तो कड़ियां पंजाब और गुरुग्राम से होते हुए सीधे पुलिस विभाग के भीतर जा मिलीं। शिमला पुलिस ने साफ कर दिया है कि 'जीरो टॉलरेंस' का मतलब सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर एक्शन है। चाहे रसूखदार हो या खाकी वाला... जो नशा बेचेगा, वो जेल जाएगा! तस्करों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत शिमला पुलिस ने एक ऐतिहासिक और बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। प्रदेश को नशामुक्त बनाने की मुहिम में जुटी पुलिस ने न केवल बाहरी सप्लायरों को दबोचा है, बल्कि विभाग के भीतर मौजूद उन चेहरों को भी बेनकाब कर दिया है जो रक्षक बनकर भक्षक का काम कर रहे थे। ASP अभिषेक ने बताया कि मामले की शुरुआत 10 मार्च 2026 को हुई जब न्यू शिमला पुलिस ने संदीप शर्मा (पंजाब) और प्रिया शर्मा (सिरमौर) के पास से 11.570 ग्राम एलएसडी (562 स्ट्रिप्स) बरामद की थी। तफ्तीश की कड़ियां जोड़ते हुए पुलिस सप्लायर नेविल हैरिसन (केरल) तक पहुँची और उसे गुरुग्राम से गिरफ्तार किया। उन्होंने बताया कि बैकवर्ड लिंकेज की गहन जांच और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के दौरान एक बेहद शर्मनाक सच सामने आया। पता चला कि कुल्लू जिला में इस तस्करी को इंटरसेप्ट करने के बावजूद, STF (Special Task Force) में तैनात चार पुलिसकर्मियों ने तस्करों को पकड़ने के बजाय उनके साथ मिलकर इस काले कारोबार को बढ़ावा दिया। यह न केवल आपराधिक षड्यंत्र था, बल्कि नैतिक कदाचार की पराकाष्ठा थी।शिमला पुलिस की सिफारिश और ADG CID द्वारा की गई विस्तृत जांच के बाद, इन चारों कर्मचारियों को 16 मार्च को निलंबित कर दिया गया था। साक्ष्यों के आधार पर आज 19 मार्च 2026 को शिमला पुलिस ने निम्नलिखित चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया: मु0आ0 (मुख्य आरक्षी) राजेश कुमार (40 वर्ष), मनाली, कुल्लू।मु0आ0 समीर (40 वर्ष), भुंतर, कुल्लू।मानक मु0आ0 नितेश (46 वर्ष), भुंतर, कुल्लू।आ0 अशोक कुमार (42 वर्ष), कुल्लू।इन सभी को कल माननीय न्यायालय में पेश किया जाएगा।
शिमला , 19 मार्च [ विशाल सूद ] ! शिमला पुलिस ने एक ऐसा 'महा-धमाका' जिसने महकमे के भीतर छिपे गद्दारों की नींद उड़ा दी है। प्रदेश को नशा मुक्त बनाने की कसम खाने वाले खाकी के पीछे छिपे नशा तस्कर आज खुद सलाखों के पीछे हैं। 10 मार्च को शुरू हुई LSD तस्करी की जांच जब गहराई में उतरी, तो कड़ियां पंजाब और गुरुग्राम से होते हुए सीधे पुलिस विभाग के भीतर जा मिलीं।
शिमला पुलिस ने साफ कर दिया है कि 'जीरो टॉलरेंस' का मतलब सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर एक्शन है। चाहे रसूखदार हो या खाकी वाला... जो नशा बेचेगा, वो जेल जाएगा! तस्करों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत शिमला पुलिस ने एक ऐतिहासिक और बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। प्रदेश को नशामुक्त बनाने की मुहिम में जुटी पुलिस ने न केवल बाहरी सप्लायरों को दबोचा है, बल्कि विभाग के भीतर मौजूद उन चेहरों को भी बेनकाब कर दिया है जो रक्षक बनकर भक्षक का काम कर रहे थे।
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ASP अभिषेक ने बताया कि मामले की शुरुआत 10 मार्च 2026 को हुई जब न्यू शिमला पुलिस ने संदीप शर्मा (पंजाब) और प्रिया शर्मा (सिरमौर) के पास से 11.570 ग्राम एलएसडी (562 स्ट्रिप्स) बरामद की थी। तफ्तीश की कड़ियां जोड़ते हुए पुलिस सप्लायर नेविल हैरिसन (केरल) तक पहुँची और उसे गुरुग्राम से गिरफ्तार किया। उन्होंने बताया कि बैकवर्ड लिंकेज की गहन जांच और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के दौरान एक बेहद शर्मनाक सच सामने आया। पता चला कि कुल्लू जिला में इस तस्करी को इंटरसेप्ट करने के बावजूद, STF (Special Task Force) में तैनात चार पुलिसकर्मियों ने तस्करों को पकड़ने के बजाय उनके साथ मिलकर इस काले कारोबार को बढ़ावा दिया।
यह न केवल आपराधिक षड्यंत्र था, बल्कि नैतिक कदाचार की पराकाष्ठा थी।शिमला पुलिस की सिफारिश और ADG CID द्वारा की गई विस्तृत जांच के बाद, इन चारों कर्मचारियों को 16 मार्च को निलंबित कर दिया गया था। साक्ष्यों के आधार पर आज 19 मार्च 2026 को शिमला पुलिस ने निम्नलिखित चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया:
मु0आ0 (मुख्य आरक्षी) राजेश कुमार (40 वर्ष), मनाली, कुल्लू।
मु0आ0 समीर (40 वर्ष), भुंतर, कुल्लू।
मानक मु0आ0 नितेश (46 वर्ष), भुंतर, कुल्लू।
आ0 अशोक कुमार (42 वर्ष), कुल्लू।
इन सभी को कल माननीय न्यायालय में पेश किया जाएगा।
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