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चम्बा ! दिनांक 23-03-26 से 24-03-26 राजस्थान के बीकानेर में राष्ट्रीय सेमिनार में खेम राज ने शोध पत्र पढ़ा । खेमराज S/O श्री पुन्नू, चंबा के चुराह क्षेत्र के चांजू गांव पधर के रहने वाले है । और वर्तमान में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में R.A (रिसर्च असिस्टेंट) है । यह शोध पत्र डॉ. अंजलि वर्मा के निर्देशन में तैयार किया गया । जोकि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत है । इस शोध पत्र का जो विषय था वह ' अभिलेखीय स्रोतों के माध्यम से पश्चिमी हिमालयाई क्षेत्र में सबाल्टर्न आवाजों को समझना' । जिसमें हिमाचल प्रदेश अभिलेखागार में मौजूद स्त्रोतों के माध्यम से सबाल्टर्न इतिहास अध्ययन को क्षेत्रीय रानियों की पहचान के साथ तुलना करके प्रस्तुत किया गया । जिसमें अभिलेखीय स्त्रोतों से सबाल्टर्न इतिहास की तो बात की गई । जो प्रश्न उठाए गए कि क्या वास्तव में पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र के इतिहास में सबाल्टर्न वर्ग समूह को जगह मिली । क्योंकि इन अभिलेखीय स्त्रोतों में शादी महिला का नाम उनके वास्तविक क्षेत्र से लिया जाना, उनका खुद का नाम तक न मिलना यह दर्शाता है कि रानियों और राजकुमारियों के रूप में उनके योगदान को स्वीकार न करने का प्रत्यक्ष प्रमाण है । शाही महिलाओं की स्थिति अगर ऐसी थी तो सामान्य वर्ग की महिलाओं के इतिहास को हम स्मरण भी नहीं कर सकते । दूसरा यह कि जो इतिहास लिखा गया या लिखा जा रहा है । जोकि समाज के एक शाही या अभिजात वर्ग द्वारा लिखा जा रहा है । जिसकी आलोचना की गई , कि ये इतिहास किस हद तक समाज के पिछड़ा वर्ग की बात करता है । अंत में खेम राज ने तर्क दिया कि ' इन महिलाओं के योगदान को दर्ज न किया जाना उसे स्पष्ट रूप में सबाल्टर्न श्रेणी का मामला बना देता है । संभ्रांत वर्ग की महिलाओं की आवाज़ों तक हम नहीं पहुंच पा रहे है । तो क्षेत्रीय इतिहास को सबाल्टर्न तक पहुंचना , और उनके बारे में लिखना इतना आसान नहीं है । अंत में पूरे पैनल द्वारा इस शोध पत्र को काफी सराहना किया गया । और जो क्षेत्रीय इतिहास की बात की गई उस पर बकाया काम करने की जरूरत महसूस की गई ।
चम्बा ! दिनांक 23-03-26 से 24-03-26 राजस्थान के बीकानेर में राष्ट्रीय सेमिनार में खेम राज ने शोध पत्र पढ़ा । खेमराज S/O श्री पुन्नू, चंबा के चुराह क्षेत्र के चांजू गांव पधर के रहने वाले है । और वर्तमान में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में R.A (रिसर्च असिस्टेंट) है । यह शोध पत्र डॉ. अंजलि वर्मा के निर्देशन में तैयार किया गया ।
जोकि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत है । इस शोध पत्र का जो विषय था वह ' अभिलेखीय स्रोतों के माध्यम से पश्चिमी हिमालयाई क्षेत्र में सबाल्टर्न आवाजों को समझना' । जिसमें हिमाचल प्रदेश अभिलेखागार में मौजूद स्त्रोतों के माध्यम से सबाल्टर्न इतिहास अध्ययन को क्षेत्रीय रानियों की पहचान के साथ तुलना करके प्रस्तुत किया गया । जिसमें अभिलेखीय स्त्रोतों से सबाल्टर्न इतिहास की तो बात की गई ।
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जो प्रश्न उठाए गए कि क्या वास्तव में पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र के इतिहास में सबाल्टर्न वर्ग समूह को जगह मिली । क्योंकि इन अभिलेखीय स्त्रोतों में शादी महिला का नाम उनके वास्तविक क्षेत्र से लिया जाना, उनका खुद का नाम तक न मिलना यह दर्शाता है कि रानियों और राजकुमारियों के रूप में उनके योगदान को स्वीकार न करने का प्रत्यक्ष प्रमाण है । शाही महिलाओं की स्थिति अगर ऐसी थी तो सामान्य वर्ग की महिलाओं के इतिहास को हम स्मरण भी नहीं कर सकते । दूसरा यह कि जो इतिहास लिखा गया या लिखा जा रहा है । जोकि समाज के एक शाही या अभिजात वर्ग द्वारा लिखा जा रहा है । जिसकी आलोचना की गई , कि ये इतिहास किस हद तक समाज के पिछड़ा वर्ग की बात करता है ।
अंत में खेम राज ने तर्क दिया कि ' इन महिलाओं के योगदान को दर्ज न किया जाना उसे स्पष्ट रूप में सबाल्टर्न श्रेणी का मामला बना देता है । संभ्रांत वर्ग की महिलाओं की आवाज़ों तक हम नहीं पहुंच पा रहे है । तो क्षेत्रीय इतिहास को सबाल्टर्न तक पहुंचना , और उनके बारे में लिखना इतना आसान नहीं है । अंत में पूरे पैनल द्वारा इस शोध पत्र को काफी सराहना किया गया । और जो क्षेत्रीय इतिहास की बात की गई उस पर बकाया काम करने की जरूरत महसूस की गई ।
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