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शिमला , 23 मार्च [ विशाल सूद ] ! हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने विधान सभा में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा पेश किए गए बजट 2026-27 की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल घोषणाओं का पुलिंदा है और इसमें वास्तविक विकास या आम जनता के हित के लिए कोई ठोस कदम नहीं हैं। जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि पिछले दो वर्षों में शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, ग्रामीण विकास, कृषि, सड़क निर्माण और स्वास्थ्य जैसे प्रमुख विभागों के बजट में आधा से अधिक कटौती की गई है, जिससे हिमाचल प्रदेश के लोगों की आत्मनिर्भरता खतरे में पड़ गई है। उन्होंने बताया कि सुक्खू सरकार के कार्यकाल में सरकारी नौकरियों की संख्या लगातार घट रही है। पूर्व भाजपा सरकार के समय कोविड महामारी के बाद भी सरकारी नौकरियों का रिकॉर्ड उच्चतम स्तर पर था, लेकिन अब 2025 में कुल नौकरियां घटकर 1,75,579 रह गई हैं, यानी तीन साल में लगभग 15 हजार नौकरियां कम हुई हैं। जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री झूठे दावे कर रहे हैं जबकि वास्तविक आंकड़े उनके विपरीत हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने बजट में केंद्र सरकार की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पिछले तीन सालों में राजस्व प्राप्तियों में केंद्र की हिस्सेदारी क्रमशः 56%, 54% और 53.6% रही है। केंद्रीय कर, अनुदान और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के माध्यम से वित्तीय सहयोग लगातार मिलता रहा, लेकिन इसके बावजूद सुक्खू सरकार ने कई योजनाओं का बजट घटा दिया। उदाहरण के तौर पर, मुख्यमंत्री के खेत बाड़ाबंदी योजना के लिए केवल ₹10 करोड़ का प्रावधान किया गया, जबकि उनकी सरकार के समय ₹40 करोड़ का बजट था। हिमकेयर योजना और बिजली सब्सिडी के बजट में भी कटौती की गई है। जयराम ठाकुर ने सवाल उठाया कि सरकार वेतन स्थगन की बात कैसे कर सकती है, जबकि संविधान के अनुच्छेद 360 के तहत केवल वित्तीय आपातकाल में ही ऐसा संभव है। उन्होंने कहा कि बजट में कर्मचारियों के वेतन के लिए ₹14,721 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो वर्तमान वर्ष से मात्र ₹5 करोड़ अधिक है, जिससे स्पष्ट है कि महंगाई भत्ते की कोई योजना नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री ने निष्कर्ष निकाला कि यह बजट केवल समय काटने और जनता को भ्रमित करने के लिए पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि विकास केवल नादौन और देहरा क्षेत्रों तक सीमित किया गया है, जबकि पूरे हिमाचल प्रदेश के लिए संतुलित और व्यापक बजट की आवश्यकता।
शिमला , 23 मार्च [ विशाल सूद ] ! हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने विधान सभा में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा पेश किए गए बजट 2026-27 की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल घोषणाओं का पुलिंदा है और इसमें वास्तविक विकास या आम जनता के हित के लिए कोई ठोस कदम नहीं हैं। जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि पिछले दो वर्षों में शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, ग्रामीण विकास, कृषि, सड़क निर्माण और स्वास्थ्य जैसे प्रमुख विभागों के बजट में आधा से अधिक कटौती की गई है, जिससे हिमाचल प्रदेश के लोगों की आत्मनिर्भरता खतरे में पड़ गई है।
उन्होंने बताया कि सुक्खू सरकार के कार्यकाल में सरकारी नौकरियों की संख्या लगातार घट रही है। पूर्व भाजपा सरकार के समय कोविड महामारी के बाद भी सरकारी नौकरियों का रिकॉर्ड उच्चतम स्तर पर था, लेकिन अब 2025 में कुल नौकरियां घटकर 1,75,579 रह गई हैं, यानी तीन साल में लगभग 15 हजार नौकरियां कम हुई हैं। जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री झूठे दावे कर रहे हैं जबकि वास्तविक आंकड़े उनके विपरीत हैं।
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पूर्व मुख्यमंत्री ने बजट में केंद्र सरकार की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पिछले तीन सालों में राजस्व प्राप्तियों में केंद्र की हिस्सेदारी क्रमशः 56%, 54% और 53.6% रही है। केंद्रीय कर, अनुदान और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के माध्यम से वित्तीय सहयोग लगातार मिलता रहा, लेकिन इसके बावजूद सुक्खू सरकार ने कई योजनाओं का बजट घटा दिया। उदाहरण के तौर पर, मुख्यमंत्री के खेत बाड़ाबंदी योजना के लिए केवल ₹10 करोड़ का प्रावधान किया गया, जबकि उनकी सरकार के समय ₹40 करोड़ का बजट था। हिमकेयर योजना और बिजली सब्सिडी के बजट में भी कटौती की गई है।
जयराम ठाकुर ने सवाल उठाया कि सरकार वेतन स्थगन की बात कैसे कर सकती है, जबकि संविधान के अनुच्छेद 360 के तहत केवल वित्तीय आपातकाल में ही ऐसा संभव है। उन्होंने कहा कि बजट में कर्मचारियों के वेतन के लिए ₹14,721 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो वर्तमान वर्ष से मात्र ₹5 करोड़ अधिक है, जिससे स्पष्ट है कि महंगाई भत्ते की कोई योजना नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने निष्कर्ष निकाला कि यह बजट केवल समय काटने और जनता को भ्रमित करने के लिए पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि विकास केवल नादौन और देहरा क्षेत्रों तक सीमित किया गया है, जबकि पूरे हिमाचल प्रदेश के लिए संतुलित और व्यापक बजट की आवश्यकता।
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