*युवाओं से मातृभाषा पर गर्व करने का आह्वान* युवाओं से ‘विकसित भारत’ के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान*
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शिमला , 22 मार्च [ विशाल सूद ] ! राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने आज नागपुर में महर्षि व्यास सभागार में आयोजित भारतीय युवा संसद के राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित किया। इस अधिवेशन का आयोजन भारतीय युवा संसद-मीडिया फाउंडेशन तथा केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था। इस सत्र में देशभर से लगभग 600 युवाओं ने भाग लेकर राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर सार्थक लोकतांत्रिक विमर्श किया। युवाओं को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की भाषाएं केवल संचार का माध्यम नहीं होतीं, बल्कि वे उसकी आत्मा, स्मृति और जीवंत पहचान होती हैं। उन्होंने वर्तमान पीढ़ी में मातृभाषा बोलने को लेकर बढ़ती झिझक पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “अंग्रेजी सीखना स्वागतयोग्य है, लेकिन अपनी मातृभाषा की कीमत पर नहीं।” उन्होंने कहा कि जो बच्चा अपनी मातृभाषा में सोचता है, वह अधिक रचनात्मक, आत्मविश्वासी और अपनी सभ्यता से गहराई से जुड़ा होता है। राज्यपाल ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा संयुक्त राष्ट्र, जी-20 शिखर सम्मेलन तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदी में दिए गए संबोधनों का उल्लेख करते हुए इसे सांस्कृतिक आत्मसम्मान का प्रेरक उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि हाल ही में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में भी प्रधानमंत्री ने हिंदी में संबोधन देकर यह संदेश दिया कि भारत अत्याधुनिक विषयों जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर भी अपनी भाषा में सोच सकता है, बोल सकता है और नेतृत्व कर सकता है। भारत की समृद्ध भाषाई विविधता—कश्मीरी, डोगरी, पहाड़ी से लेकर तमिल, तेलुगु, बंगाली, मराठी, गुजराती और संस्कृत का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि इस अधिवेशन में विभिन्न भाषाओं की सहभागिता ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने युवाओं से ‘पंच परिवर्तन’, जिनमें स्वबोध (स्वदेशी भावना और आत्म-जागरूकता), कुटुंब प्रबोधन (परिवार संस्था का सशक्तिकरण), सामाजिक समरसता (सभी वर्गों के बीच सौहार्द), पर्यावरण संरक्षण तथा नागरिक कर्तव्य को अपने जीवन का संकल्प बनाने का आह्वान किया। ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प पर बल देते हुए राज्यपाल ने कहा कि स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने पर भारत का स्वरूप आज के युवाओं की ऊर्जा, नवाचार और प्रतिबद्धता से निर्धारित होगा। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे स्वयं को केवल विकास के लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के सक्रिय भागीदार के रूप में देखें। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब युवा ज्ञान, कौशल और राष्ट्रीय उत्तरदायित्व की भावना को साथ लेकर आगे बढ़ेंगे। राज्यपाल ने प्रधानमंत्री की युवा सशक्तिकरण की परिकल्पना की सराहना करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति, स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसी पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का उद्देश्य केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि एक समृद्ध, सामाजिक रूप से न्यायसंगत, सांस्कृतिक रूप से आत्मविश्वासी और मूल्यों से जुड़ा भारत का निर्माण करना है। राज्यपाल ने भारतीय युवा संसद-मीडिया फाउंडेशन और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय को इस उत्कृष्ट पहल के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह कार्यक्रम भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और युवाओं की आकांक्षाओं के बीच एक सुंदर सेतु का कार्य कर रहा है, जिससे लोकतंत्र को जड़ें भी मिलती हैं और पंख भी। इससे पूर्व, राज्यपाल ने नागपुर स्थित स्मृति भूमि में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रथम सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार तथा द्वितीय सरसंघचालक श्री माधव सदाशिव गोलवलकर को उनकी समाधि स्थलों पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष श्री राहुल नार्वेकर, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी, डीन अकादमिक एवं छात्र कल्याण प्रो. मदन मोहन झा, रजिस्ट्रार प्रो. आर.जी. मुरली कृष्णा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।
शिमला , 22 मार्च [ विशाल सूद ] ! राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने आज नागपुर में महर्षि व्यास सभागार में आयोजित भारतीय युवा संसद के राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित किया। इस अधिवेशन का आयोजन भारतीय युवा संसद-मीडिया फाउंडेशन तथा केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था। इस सत्र में देशभर से लगभग 600 युवाओं ने भाग लेकर राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर सार्थक लोकतांत्रिक विमर्श किया।
युवाओं को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की भाषाएं केवल संचार का माध्यम नहीं होतीं, बल्कि वे उसकी आत्मा, स्मृति और जीवंत पहचान होती हैं। उन्होंने वर्तमान पीढ़ी में मातृभाषा बोलने को लेकर बढ़ती झिझक पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “अंग्रेजी सीखना स्वागतयोग्य है, लेकिन अपनी मातृभाषा की कीमत पर नहीं।” उन्होंने कहा कि जो बच्चा अपनी मातृभाषा में सोचता है, वह अधिक रचनात्मक, आत्मविश्वासी और अपनी सभ्यता से गहराई से जुड़ा होता है।
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राज्यपाल ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा संयुक्त राष्ट्र, जी-20 शिखर सम्मेलन तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदी में दिए गए संबोधनों का उल्लेख करते हुए इसे सांस्कृतिक आत्मसम्मान का प्रेरक उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि हाल ही में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में भी प्रधानमंत्री ने हिंदी में संबोधन देकर यह संदेश दिया कि भारत अत्याधुनिक विषयों जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर भी अपनी भाषा में सोच सकता है, बोल सकता है और नेतृत्व कर सकता है।
भारत की समृद्ध भाषाई विविधता—कश्मीरी, डोगरी, पहाड़ी से लेकर तमिल, तेलुगु, बंगाली, मराठी, गुजराती और संस्कृत का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि इस अधिवेशन में विभिन्न भाषाओं की सहभागिता ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने युवाओं से ‘पंच परिवर्तन’, जिनमें स्वबोध (स्वदेशी भावना और आत्म-जागरूकता), कुटुंब प्रबोधन (परिवार संस्था का सशक्तिकरण), सामाजिक समरसता (सभी वर्गों के बीच सौहार्द), पर्यावरण संरक्षण तथा नागरिक कर्तव्य को अपने जीवन का संकल्प बनाने का आह्वान किया।
‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प पर बल देते हुए राज्यपाल ने कहा कि स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने पर भारत का स्वरूप आज के युवाओं की ऊर्जा, नवाचार और प्रतिबद्धता से निर्धारित होगा। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे स्वयं को केवल विकास के लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के सक्रिय भागीदार के रूप में देखें। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब युवा ज्ञान, कौशल और राष्ट्रीय उत्तरदायित्व की भावना को साथ लेकर आगे बढ़ेंगे।
राज्यपाल ने प्रधानमंत्री की युवा सशक्तिकरण की परिकल्पना की सराहना करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति, स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसी पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का उद्देश्य केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि एक समृद्ध, सामाजिक रूप से न्यायसंगत, सांस्कृतिक रूप से आत्मविश्वासी और मूल्यों से जुड़ा भारत का निर्माण करना है।
राज्यपाल ने भारतीय युवा संसद-मीडिया फाउंडेशन और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय को इस उत्कृष्ट पहल के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह कार्यक्रम भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और युवाओं की आकांक्षाओं के बीच एक सुंदर सेतु का कार्य कर रहा है, जिससे लोकतंत्र को जड़ें भी मिलती हैं और पंख भी।
इससे पूर्व, राज्यपाल ने नागपुर स्थित स्मृति भूमि में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रथम सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार तथा द्वितीय सरसंघचालक श्री माधव सदाशिव गोलवलकर को उनकी समाधि स्थलों पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
इस अवसर पर महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष श्री राहुल नार्वेकर, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी, डीन अकादमिक एवं छात्र कल्याण प्रो. मदन मोहन झा, रजिस्ट्रार प्रो. आर.जी. मुरली कृष्णा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।
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