- विज्ञापन (Article Top Ad) -
बिलासपुर, 22 मार्च ! राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेला के अवसर पर जलमग्न ऐतिहासिक पुल भंजवाणी औहर की कलाकृति विशेष आकर्षण का केंद्र बनी है। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत इस जलमग्न ऐतिहासिक पुल की कलाकृति को प्रसिद्ध स्थानीय मूर्तिकार प्रेम सिंह ने तैयार किया है। प्रेम सिंह, ग्राम कसेह, पंचायत हीरापुर (जिला बिलासपुर) के निवासी हैं, जो अपनी उत्कृष्ट कला के लिए क्षेत्र में जाने जाते हैं।उन्होंने इस प्रदर्शनी के माध्यम से उन ऐतिहासिक धरोहरों और संसाधनों को जीवंत करने का प्रयास किया है, जो विस्थापन के कारण समय के साथ लुप्त हो गए हैं। उनका उद्देश्य भावी पीढ़ी को अपने इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से अवगत कराना है। मूर्तिकार प्रेम सिंह ने बताया कि इस पुल की कलाकृति को तैयार करने में उन्हें काफी समय लगा है। इस प्रक्रिया के दौरान उन्हें अपने अतीत की यादों को ताजा करने का अवसर भी मिला। इस ऐतिहासिक पुल का उस समय के जनजीवन में महत्वपूर्ण स्थान था। उन्होंने बताया कि पुल पर चैकीदार नाथूराम तैनात रहते थे, जो हरी झंडी दिखाकर आवागमन को नियंत्रित करते थे, और उनका विश्राम स्थल भी पुल के समीप स्थित था। इतिहास के अनुसार, बिलासपुर राज्य की रानी अपने मायके जाने के लिए इसी पुल का उपयोग करती थीं, वहीं राजा औहर की ओर शिकार खेलने के लिए इसी मार्ग से जाया करते थे। उस समय बिलासपुर की बसें भी इसी पुल से गुजरती थीं। आम जनता पैदल आवागमन और पशुओं को ले जाने के लिए भी इसी पुल का उपयोग करती थी। यह प्रदर्शनी न केवल ऐतिहासिक महत्व को दर्शाती है, बल्कि स्थानीय कला और संस्कृति के संरक्षण का एक सशक्त उदाहरण भी प्रस्तुत कर रही है। मेले में आने वाले दर्शक इस कलाकृति की सराहना कर रहे हैं और इसे विशेष आकर्षण के रूप में देख रहे हैं।
बिलासपुर, 22 मार्च ! राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेला के अवसर पर जलमग्न ऐतिहासिक पुल भंजवाणी औहर की कलाकृति विशेष आकर्षण का केंद्र बनी है। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत इस जलमग्न ऐतिहासिक पुल की कलाकृति को प्रसिद्ध स्थानीय मूर्तिकार प्रेम सिंह ने तैयार किया है। प्रेम सिंह, ग्राम कसेह, पंचायत हीरापुर (जिला बिलासपुर) के निवासी हैं, जो अपनी उत्कृष्ट कला के लिए क्षेत्र में जाने जाते हैं।
उन्होंने इस प्रदर्शनी के माध्यम से उन ऐतिहासिक धरोहरों और संसाधनों को जीवंत करने का प्रयास किया है, जो विस्थापन के कारण समय के साथ लुप्त हो गए हैं। उनका उद्देश्य भावी पीढ़ी को अपने इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से अवगत कराना है।
मूर्तिकार प्रेम सिंह ने बताया कि इस पुल की कलाकृति को तैयार करने में उन्हें काफी समय लगा है। इस प्रक्रिया के दौरान उन्हें अपने अतीत की यादों को ताजा करने का अवसर भी मिला। इस ऐतिहासिक पुल का उस समय के जनजीवन में महत्वपूर्ण स्थान था। उन्होंने बताया कि पुल पर चैकीदार नाथूराम तैनात रहते थे, जो हरी झंडी दिखाकर आवागमन को नियंत्रित करते थे, और उनका विश्राम स्थल भी पुल के समीप स्थित था।
- विज्ञापन (Article Inline Ad) -
इतिहास के अनुसार, बिलासपुर राज्य की रानी अपने मायके जाने के लिए इसी पुल का उपयोग करती थीं, वहीं राजा औहर की ओर शिकार खेलने के लिए इसी मार्ग से जाया करते थे। उस समय बिलासपुर की बसें भी इसी पुल से गुजरती थीं। आम जनता पैदल आवागमन और पशुओं को ले जाने के लिए भी इसी पुल का उपयोग करती थी।
यह प्रदर्शनी न केवल ऐतिहासिक महत्व को दर्शाती है, बल्कि स्थानीय कला और संस्कृति के संरक्षण का एक सशक्त उदाहरण भी प्रस्तुत कर रही है। मेले में आने वाले दर्शक इस कलाकृति की सराहना कर रहे हैं और इसे विशेष आकर्षण के रूप में देख रहे हैं।
- विज्ञापन (Article Bottom Ad) -
- विज्ञापन (Sidebar Ad 1) -
- विज्ञापन (Sidebar Ad 2) -
- विज्ञापन (Sidebar Ad 3) -
- विज्ञापन (Sidebar Ad 4) -