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शिमला, 16 फरवरी [ विशाल सूद ] ! नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मौजूदा सत्र की कार्यवाही और स्वरूप को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि सत्र की प्रकृति, बजट प्रस्तुति और कार्यसूची को लेकर व्यापक भ्रम की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने मांग की कि परंपरा और नियमों के अनुसार राज्यपाल के अभिभाषण पर पहले चर्चा कराई जाए। जयराम ठाकुर ने कहा कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि यह सत्र बजट सत्र है या नहीं। यदि यह बजट सत्र है तो बजट कब पेश होगा, इस पर कोई स्पष्टता नहीं है। उन्होंने कहा कि केवल तीन दिनों की अधिसूचना जारी की गई है और विधायकों को यह तक जानकारी नहीं है कि प्रश्नकाल होगा या नहीं, तथा जिन मुद्दों पर चर्चा के लिए नोटिस दिए जा रहे हैं, वे स्वीकार किए जाएंगे या नहीं। उन्होंने कहा कि परंपरा के अनुसार राज्यपाल के अभिभाषण के बाद सदन स्थगित होता है और अगले दिन प्रश्नकाल के बाद अभिभाषण पर चर्चा होती है। लेकिन इस बार राज्यपाल के अभिभाषण के दिन ही सदन को पुनः संचालित करने और अन्य विधायी कार्य लेने की तैयारी की जा रही है, जो अब तक की परंपराओं के विपरीत है। नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि सर्वदलीय बैठक में उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष और संसदीय कार्य मंत्री के समक्ष यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष किसी भी प्रस्ताव या संकल्प पर चर्चा से नहीं भाग रहा है, लेकिन राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा पूरी होने और उसके निष्कर्ष के बाद ही अन्य प्रस्ताव लाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि सदन की मर्यादा, परंपरा और नियमों को दरकिनार नहीं किया जाना चाहिए। जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि विधानसभा में जिस प्रकार की कार्यवाही की योजना बनाई जा रही है, वैसा उदाहरण पहले नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि कोविड काल में एक बार विशेष परिस्थितियों में बदलाव हुआ था, वह भी विपक्ष की सहमति से। वर्तमान स्थिति को उन्होंने “असामान्य” बताते हुए कहा कि विधायकों में असमंजस है और उन्हें यह तक ज्ञात नहीं कि उनके प्रश्न सूचीबद्ध होंगे या नहीं। उन्होंने कहा कि बजट कब पेश होगा, मांगों पर चर्चा कब होगी, कट मोशन कब लिए जाएंगे और सत्र 16, 17 और 18 तारीख तक ही सीमित रहेगा या बीच में पुनः अधिसूचना जारी होगी—इन सभी मुद्दों पर स्पष्टता का अभाव है। जयराम ठाकुर ने कहा कि विपक्ष चाहता है कि राज्यपाल के अभिभाषण पर पहले चर्चा कराई जाए और उसके बाद ही अन्य विधायी कार्य लिए जाएं। उन्होंने संकेत दिया कि यदि परंपरा के विपरीत कार्यवाही की गई तो विपक्ष सदन के भीतर इस मुद्दे को उठाएगा।
शिमला, 16 फरवरी [ विशाल सूद ] ! नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मौजूदा सत्र की कार्यवाही और स्वरूप को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि सत्र की प्रकृति, बजट प्रस्तुति और कार्यसूची को लेकर व्यापक भ्रम की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने मांग की कि परंपरा और नियमों के अनुसार राज्यपाल के अभिभाषण पर पहले चर्चा कराई जाए।
जयराम ठाकुर ने कहा कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि यह सत्र बजट सत्र है या नहीं। यदि यह बजट सत्र है तो बजट कब पेश होगा, इस पर कोई स्पष्टता नहीं है। उन्होंने कहा कि केवल तीन दिनों की अधिसूचना जारी की गई है और विधायकों को यह तक जानकारी नहीं है कि प्रश्नकाल होगा या नहीं, तथा जिन मुद्दों पर चर्चा के लिए नोटिस दिए जा रहे हैं, वे स्वीकार किए जाएंगे या नहीं।
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उन्होंने कहा कि परंपरा के अनुसार राज्यपाल के अभिभाषण के बाद सदन स्थगित होता है और अगले दिन प्रश्नकाल के बाद अभिभाषण पर चर्चा होती है। लेकिन इस बार राज्यपाल के अभिभाषण के दिन ही सदन को पुनः संचालित करने और अन्य विधायी कार्य लेने की तैयारी की जा रही है, जो अब तक की परंपराओं के विपरीत है।
नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि सर्वदलीय बैठक में उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष और संसदीय कार्य मंत्री के समक्ष यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष किसी भी प्रस्ताव या संकल्प पर चर्चा से नहीं भाग रहा है, लेकिन राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा पूरी होने और उसके निष्कर्ष के बाद ही अन्य प्रस्ताव लाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि सदन की मर्यादा, परंपरा और नियमों को दरकिनार नहीं किया जाना चाहिए।
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि विधानसभा में जिस प्रकार की कार्यवाही की योजना बनाई जा रही है, वैसा उदाहरण पहले नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि कोविड काल में एक बार विशेष परिस्थितियों में बदलाव हुआ था, वह भी विपक्ष की सहमति से। वर्तमान स्थिति को उन्होंने “असामान्य” बताते हुए कहा कि विधायकों में असमंजस है और उन्हें यह तक ज्ञात नहीं कि उनके प्रश्न सूचीबद्ध होंगे या नहीं।
उन्होंने कहा कि बजट कब पेश होगा, मांगों पर चर्चा कब होगी, कट मोशन कब लिए जाएंगे और सत्र 16, 17 और 18 तारीख तक ही सीमित रहेगा या बीच में पुनः अधिसूचना जारी होगी—इन सभी मुद्दों पर स्पष्टता का अभाव है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि विपक्ष चाहता है कि राज्यपाल के अभिभाषण पर पहले चर्चा कराई जाए और उसके बाद ही अन्य विधायी कार्य लिए जाएं। उन्होंने संकेत दिया कि यदि परंपरा के विपरीत कार्यवाही की गई तो विपक्ष सदन के भीतर इस मुद्दे को उठाएगा।
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