गैस एजेंसियों की मनमानी या सिस्टम फेल? जनता के सब्र का टूट रहा बांध सुबह 6 बजे से लाइन, 5 घंटे इंतजार, फिर भी नहीं मिला सिलेंडर ₹400 किराया खर्च, लेकिन गैस नहीं - दोहरी मार झेल रहे उपभोक्ता आरोप - ब्लैक में बिक रहे सिलेंडर? प्रशासन की चुप्पी पर उठे बड़े सवाल
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मंडी , 26 मार्च [ विशाल सूद ] : जिला मंडी के सुंदरनगर में घरेलू एलपीजी गैस संकट अब गंभीर रूप ले चुका है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि आम जनता को गैस सिलेंडर के लिए घंटों लाइन में खड़े रहने के बावजूद भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदार कौन है - गैस एजेंसियां या प्रशासन? गुरुवार सुबह सुंदरनगर में हालात और भी बदतर नजर आए। सैकड़ों उपभोक्ता सुबह 6 बजे से गैस गोदामों के बाहर लाइन में लगे रहे, लेकिन 11 बजे तक भी लोगों को गैस सिलेंडर नहीं मिल पाया। 5-5 घंटे इंतजार करने के बाद भी लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि गैस एजेंसियों की मनमानी ने इस संकट को और गहरा कर दिया है। उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें समय पर सिलेंडर नहीं दिया जा रहा, जबकि कुछ लोगों को आसानी से गैस उपलब्ध हो रही है, जिससे व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आर्थिक बोझ भी लोगों की परेशानी को और बढ़ा रहा है। कई उपभोक्ताओं को ऑटो से गोदाम तक पहुंचना पड़ रहा है, जहां आने-जाने में करीब ₹400 तक खर्च हो रहे हैं। इसके बावजूद भी गैस न मिलने से लोगों में भारी रोष है। सबसे गंभीर आरोप कालाबाजारी को लेकर सामने आ रहे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि बाजार में गैस सिलेंडर खुलेआम ज्यादा कीमत पर बेचे जा रहे हैं, जबकि आम लोग लाइन में खड़े-खड़े परेशान हो रहे हैं। अगर यह सच है, तो यह सीधा-सीधा सिस्टम की नाकामी और मिलीभगत की ओर इशारा करता है। एक तरफ प्रशासन पर्याप्त स्टॉक होने के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत पूरी तरह से इन दावों की पोल खोल रही है। अगर गैस पर्याप्त है, तो फिर जनता को क्यों नहीं मिल रही? यह सवाल अब हर घर से उठ रहा है। अब लोगों ने प्रशासन को साफ चेतावनी दी है - अगर जल्द व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो जनता सड़कों पर उतरने से भी पीछे नहीं हटेगी। उपभोक्ता विनोद कुमार ने बताया कि उन्हें डीएससी नंबर मिलने के बावजूद भी गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना अंतिम सिलेंडर तीन महीने पहले भरवाया था, लेकिन आज तक उन्हें नया सिलेंडर नहीं मिल पाया है। एक महिला उपभोक्ता ने बताया कि वह पिछले चार दिनों से गैस एजेंसी से संपर्क कर रही हैं। उनकी बुकिंग हो चुकी है, इसके बावजूद भी उन्हें सिलेंडर नहीं मिल रहा, जिससे उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्राम पंचायत बरतों से पहुंचे एक उपभोक्ता ने कहा कि गैस एजेंसी और प्रशासन की मनमानी के कारण उन्हें गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। उपभोक्ता का कहना है कि वह कल भी गैस एजेंसी के बाहर पहुंचे थे और आज भी आए हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें सिलेंडर नहीं मिला। उन्होंने बताया कि आने-जाने में उन्हें खाली सिलेंडर के साथ करीब ₹400 किराया खर्च करना पड़ रहा है। पलोहटा निवासी देवी सिंह ने बताया कि सिलेंडर न मिलने के कारण उन्हें भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि गैस एजेंसी को ओटीपी भी बता दिया गया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें खाली हाथ घर लौटना पड़ रहा है। देवी सिंह ने आरोप लगाया कि सिलेंडरों की ब्लैक में सप्लाई हो रही है, लेकिन प्रशासन इस पर रोक लगाने में असमर्थ साबित हो रहा है।
मंडी , 26 मार्च [ विशाल सूद ] : जिला मंडी के सुंदरनगर में घरेलू एलपीजी गैस संकट अब गंभीर रूप ले चुका है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि आम जनता को गैस सिलेंडर के लिए घंटों लाइन में खड़े रहने के बावजूद भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदार कौन है - गैस एजेंसियां या प्रशासन? गुरुवार सुबह सुंदरनगर में हालात और भी बदतर नजर आए। सैकड़ों उपभोक्ता सुबह 6 बजे से गैस गोदामों के बाहर लाइन में लगे रहे, लेकिन 11 बजे तक भी लोगों को गैस सिलेंडर नहीं मिल पाया। 5-5 घंटे इंतजार करने के बाद भी लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि गैस एजेंसियों की मनमानी ने इस संकट को और गहरा कर दिया है। उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें समय पर सिलेंडर नहीं दिया जा रहा, जबकि कुछ लोगों को आसानी से गैस उपलब्ध हो रही है, जिससे व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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आर्थिक बोझ भी लोगों की परेशानी को और बढ़ा रहा है। कई उपभोक्ताओं को ऑटो से गोदाम तक पहुंचना पड़ रहा है, जहां आने-जाने में करीब ₹400 तक खर्च हो रहे हैं। इसके बावजूद भी गैस न मिलने से लोगों में भारी रोष है।
सबसे गंभीर आरोप कालाबाजारी को लेकर सामने आ रहे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि बाजार में गैस सिलेंडर खुलेआम ज्यादा कीमत पर बेचे जा रहे हैं, जबकि आम लोग लाइन में खड़े-खड़े परेशान हो रहे हैं। अगर यह सच है, तो यह सीधा-सीधा सिस्टम की नाकामी और मिलीभगत की ओर इशारा करता है। एक तरफ प्रशासन पर्याप्त स्टॉक होने के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत पूरी तरह से इन दावों की पोल खोल रही है। अगर गैस पर्याप्त है, तो फिर जनता को क्यों नहीं मिल रही? यह सवाल अब हर घर से उठ रहा है।
अब लोगों ने प्रशासन को साफ चेतावनी दी है - अगर जल्द व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो जनता सड़कों पर उतरने से भी पीछे नहीं हटेगी।
उपभोक्ता विनोद कुमार ने बताया कि उन्हें डीएससी नंबर मिलने के बावजूद भी गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना अंतिम सिलेंडर तीन महीने पहले भरवाया था, लेकिन आज तक उन्हें नया सिलेंडर नहीं मिल पाया है।
एक महिला उपभोक्ता ने बताया कि वह पिछले चार दिनों से गैस एजेंसी से संपर्क कर रही हैं। उनकी बुकिंग हो चुकी है, इसके बावजूद भी उन्हें सिलेंडर नहीं मिल रहा, जिससे उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्राम पंचायत बरतों से पहुंचे एक उपभोक्ता ने कहा कि गैस एजेंसी और प्रशासन की मनमानी के कारण उन्हें गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
उपभोक्ता का कहना है कि वह कल भी गैस एजेंसी के बाहर पहुंचे थे और आज भी आए हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें सिलेंडर नहीं मिला। उन्होंने बताया कि आने-जाने में उन्हें खाली सिलेंडर के साथ करीब ₹400 किराया खर्च करना पड़ रहा है।
पलोहटा निवासी देवी सिंह ने बताया कि सिलेंडर न मिलने के कारण उन्हें भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि गैस एजेंसी को ओटीपी भी बता दिया गया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें खाली हाथ घर लौटना पड़ रहा है। देवी सिंह ने आरोप लगाया कि सिलेंडरों की ब्लैक में सप्लाई हो रही है, लेकिन प्रशासन इस पर रोक लगाने में असमर्थ साबित हो रहा है।
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