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कुल्लू , 14 मार्च [ विशाल सूद ] ! कुल्लू जिला में पिछले वर्ष 2 और 4 सितंबर को आई भीषण आपदा के दौरान हुए लैंडस्लाइड और भूस्खलन में 10 लोगों की जान चली गई थी। उसी आपदा प्रभावित क्षेत्र में अब मलबे के ढेर के ऊपर एक कस्तूरी बिलाव मृत अवस्था में पाया गया है। स्थानीय लोगों ने बताया कि आपदा स्थल पर पड़े मलबे के बीच यह वन्यजीव दिखाई दिया, जिसके बाद इसकी सूचना तुरंत वन विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल कस्तूरी बिलाव की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए आवश्यक प्रक्रिया अपनाई जा रही है। कस्तूरी बिलाव एक छोटी बिल्ली जैसा दिखने वाला, जमीन पर रहने वाला निशाचर जीव है। यह विवररीडे परिवार का सदस्य माना जाता है। इसके शरीर में विशेष सुगंधित ग्रंथियां होती हैं, जिनसे निकलने वाले स्राव का उपयोग इत्र (परफ्यूम) बनाने में किया जाता है। यह जीव मुख्य रूप से जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में पाया जाता है और रात के समय अधिक सक्रिय रहता है। वन विभाग का कहना है कि पोस्टमार्टम और जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि कस्तूरी बिलाव की मौत किन परिस्थितियों में हुई। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि आपदा के बाद क्षेत्र में अभी भी मलबा और अस्थिर ढलान बने हुए हैं, जिससे वन्यजीवों पर भी असर पड़ सकता है।
कुल्लू , 14 मार्च [ विशाल सूद ] ! कुल्लू जिला में पिछले वर्ष 2 और 4 सितंबर को आई भीषण आपदा के दौरान हुए लैंडस्लाइड और भूस्खलन में 10 लोगों की जान चली गई थी। उसी आपदा प्रभावित क्षेत्र में अब मलबे के ढेर के ऊपर एक कस्तूरी बिलाव मृत अवस्था में पाया गया है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि आपदा स्थल पर पड़े मलबे के बीच यह वन्यजीव दिखाई दिया, जिसके बाद इसकी सूचना तुरंत वन विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल कस्तूरी बिलाव की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए आवश्यक प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
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कस्तूरी बिलाव एक छोटी बिल्ली जैसा दिखने वाला, जमीन पर रहने वाला निशाचर जीव है। यह विवररीडे परिवार का सदस्य माना जाता है। इसके शरीर में विशेष सुगंधित ग्रंथियां होती हैं, जिनसे निकलने वाले स्राव का उपयोग इत्र (परफ्यूम) बनाने में किया जाता है। यह जीव मुख्य रूप से जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में पाया जाता है और रात के समय अधिक सक्रिय रहता है।
वन विभाग का कहना है कि पोस्टमार्टम और जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि कस्तूरी बिलाव की मौत किन परिस्थितियों में हुई। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि आपदा के बाद क्षेत्र में अभी भी मलबा और अस्थिर ढलान बने हुए हैं, जिससे वन्यजीवों पर भी असर पड़ सकता है।
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