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शिमला , 03 फरवरी [ विशाल सूद ] ! राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण(NHAI) देश सहित हिमाचल प्रदेश के विकास में अहम भूमिका निभा रहा है। एनएचएआई ने हिमाचल प्रदेश में कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्गो का निर्माण किया है। इनमें परवाणू-शिमला, कीरतपुर-मनाली मुख्य राजमार्ग है, इसके अलावा 2 अन्य राजमार्ग शिमला-मटौर और पठानकोट-मंडी का कार्य भी प्रगति पर है। पहाड़ों में सड़क निर्माण बड़ी चुनौती रहती है, लेकिन इन सब चुनौतियों का सामना कर एनएचएआई ने प्रदेश की जनता को बेहतर सड़क कनेक्टिविटी मुहैया करवाई है। कीरतपुर नेरचौक प्रोजेक्ट का शुभारंभ 11 मार्च 2024 को किया गया था। इस प्रोजेक्ट को एनएचएआई ने रिकार्ड समय में पूरा किया था। एनएचएआई द्वारा चंडीगढ़- मनाली कॉरिडोर सहित हिमाचल प्रदेश में विकसित की गई परियोजनाएँ क्षेत्र की यात्रा, कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित हो रही हैं। इन परियोजनाओं से न केवल सड़क यात्रा अधिक तेज़, सुरक्षित और आरामदायक हुई है, बल्कि लेह एवं सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंच भी सुदृढ़ हुई है, जो राष्ट्रीय संपर्क और लॉजिस्टिक्स के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। कीरतपुर नेरचौक परियोजना के अंतर्गत किरतपुर से नेरचौक तक पुराने 116 किलोमीटर लंबे पहाड़ी मार्ग के स्थान पर 79 किलोमीटर का फोरलेन मार्ग विकसित किया गया है। इससे यात्रियों को 37 किलोमीटर की दूरी और 2.5 घंटे के समय की बचत हुई है। तीखे और अंधे मोड़ों को चौड़ी एवं सीधी फोर-लेन सड़कों से बदला गया है, जिससे दुर्घटनाओं के जोखिम में भी उल्लेखनीय कमी आई है। सुंदरनगर, नेरचौक और बिलासपुर जैसे शहरों के आसपास बनाए गए बायपास से वाहन अब शहरों के अंदर से नहीं गुजरते है, जिससे जाम, प्रदूषण और शोर में भी कमी आई है। वहीं, सुरंगों के निर्माण से मानसून के दौरान होने वाले बार-बार के जलभराव और मार्ग अवरोध की समस्याओं का समाधान हुआ है। इससे क्षेत्र के प्रमुख शहरों के बीच सालभर सड़क संपर्क सुनिश्चित हो पाया है। इस परियोजना का स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। सेब, अन्य कृषि उत्पादों तथा सीमेंट व औद्योगिक वस्तुओं के परिवहन में लगने वाला समय और लागत कम हुई है। निर्माण कार्य के दौरान तथा वर्तमान में टोल संचालन, रखरखाव और सड़क किनारे सेवाओं के माध्यम से रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं। बेहतर और सुगम सड़क संपर्क से हिमाचल प्रदेश में पर्यटन को भी बढ़ावा मिला है। अब अधिक संख्या में पर्यटक राज्य की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जिससे होटल, होमस्टे, टैक्सी सेवाओं और ढाबों को लाभ पहुंच रहा है। सीधी और उच्च गुणवत्ता वाली सड़कों के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा के दौरान होने वाली असहजता और मोशन सिकनेस में भी कमी आई है। इसके अतिरिक्त, टोल प्लाज़ा के नजदीक विश्राम स्थलों, सुव्यवस्थित जंक्शनों, स्पष्ट साइनबोर्ड और रोड मार्किंग जैसी सुविधाओं से वाहन चालकों के लिए यात्रा और अधिक सरल तथा उपयोगकर्ता-अनुकूल बनी है। एनएचएआई देश में आधुनिक, सुरक्षित और टिकाऊ सड़क अवसंरचना के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और यह परियोजनाएँ “बिल्डिंग ए नेशन” के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
शिमला , 03 फरवरी [ विशाल सूद ] ! राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण(NHAI) देश सहित हिमाचल प्रदेश के विकास में अहम भूमिका निभा रहा है। एनएचएआई ने हिमाचल प्रदेश में कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्गो का निर्माण किया है। इनमें परवाणू-शिमला, कीरतपुर-मनाली मुख्य राजमार्ग है, इसके अलावा 2 अन्य राजमार्ग शिमला-मटौर और पठानकोट-मंडी का कार्य भी प्रगति पर है। पहाड़ों में सड़क निर्माण बड़ी चुनौती रहती है, लेकिन इन सब चुनौतियों का सामना कर एनएचएआई ने प्रदेश की जनता को बेहतर सड़क कनेक्टिविटी मुहैया करवाई है।
कीरतपुर नेरचौक प्रोजेक्ट का शुभारंभ 11 मार्च 2024 को किया गया था। इस प्रोजेक्ट को एनएचएआई ने रिकार्ड समय में पूरा किया था। एनएचएआई द्वारा चंडीगढ़- मनाली कॉरिडोर सहित हिमाचल प्रदेश में विकसित की गई परियोजनाएँ क्षेत्र की यात्रा, कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित हो रही हैं। इन परियोजनाओं से न केवल सड़क यात्रा अधिक तेज़, सुरक्षित और आरामदायक हुई है, बल्कि लेह एवं सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंच भी सुदृढ़ हुई है, जो राष्ट्रीय संपर्क और लॉजिस्टिक्स के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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कीरतपुर नेरचौक परियोजना के अंतर्गत किरतपुर से नेरचौक तक पुराने 116 किलोमीटर लंबे पहाड़ी मार्ग के स्थान पर 79 किलोमीटर का फोरलेन मार्ग विकसित किया गया है। इससे यात्रियों को 37 किलोमीटर की दूरी और 2.5 घंटे के समय की बचत हुई है। तीखे और अंधे मोड़ों को चौड़ी एवं सीधी फोर-लेन सड़कों से बदला गया है, जिससे दुर्घटनाओं के जोखिम में भी उल्लेखनीय कमी आई है।
सुंदरनगर, नेरचौक और बिलासपुर जैसे शहरों के आसपास बनाए गए बायपास से वाहन अब शहरों के अंदर से नहीं गुजरते है, जिससे जाम, प्रदूषण और शोर में भी कमी आई है। वहीं, सुरंगों के निर्माण से मानसून के दौरान होने वाले बार-बार के जलभराव और मार्ग अवरोध की समस्याओं का समाधान हुआ है। इससे क्षेत्र के प्रमुख शहरों के बीच सालभर सड़क संपर्क सुनिश्चित हो पाया है।
इस परियोजना का स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। सेब, अन्य कृषि उत्पादों तथा सीमेंट व औद्योगिक वस्तुओं के परिवहन में लगने वाला समय और लागत कम हुई है। निर्माण कार्य के दौरान तथा वर्तमान में टोल संचालन, रखरखाव और सड़क किनारे सेवाओं के माध्यम से रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं। बेहतर और सुगम सड़क संपर्क से हिमाचल प्रदेश में पर्यटन को भी बढ़ावा मिला है। अब अधिक संख्या में पर्यटक राज्य की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जिससे होटल, होमस्टे, टैक्सी सेवाओं और ढाबों को लाभ पहुंच रहा है। सीधी और उच्च गुणवत्ता वाली सड़कों के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा के दौरान होने वाली असहजता और मोशन सिकनेस में भी कमी आई है।
इसके अतिरिक्त, टोल प्लाज़ा के नजदीक विश्राम स्थलों, सुव्यवस्थित जंक्शनों, स्पष्ट साइनबोर्ड और रोड मार्किंग जैसी सुविधाओं से वाहन चालकों के लिए यात्रा और अधिक सरल तथा उपयोगकर्ता-अनुकूल बनी है। एनएचएआई देश में आधुनिक, सुरक्षित और टिकाऊ सड़क अवसंरचना के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और यह परियोजनाएँ “बिल्डिंग ए नेशन” के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
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