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शिमला , 13 फरवरी [ विशाल सूद ] ! रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) बंद होने के मुद्दे पर हिमाचल प्रदेश में सियासत तेज हो गई है। शुक्रवार को राज्य सरकार की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय (ऑल पार्टी) बैठक उस समय विवादों में घिर गई जब बीजेपी विधायक बीच बैठक से ही उठकर बाहर चले गए। इस घटनाक्रम के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी के लिए प्रदेश का हित नहीं, बल्कि “कुर्सी हित” अधिक महत्वपूर्ण है। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सर्वदलीय बैठक भाजपा के आग्रह पर ही बुलाई गई थी। इतना ही नहीं, भाजपा की मांग पर बैठक का स्थान सचिवालय से बदलकर ऐतिहासिक पीटरहॉफ में किया गया। बावजूद इसके, भाजपा विधायक मुख्यमंत्री की पूरी बात सुने बिना ही बैठक से बाहर चले गए। उन्होंने इसे गंभीर और गैर-जिम्मेदाराना रवैया बताते हुए कहा कि ऐसे संवेदनशील वित्तीय विषय पर राजनीतिक प्रदर्शन उचित नहीं है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार द्वारा आरडीजी बंद किए जाने से हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर प्रभाव पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश भाजपा में इतनी हिम्मत नहीं है कि वह आरडीजी बहाल करने की मांग मजबूती से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष रख सके। उनके अनुसार, भाजपा अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने के बजाय राजनीतिक बयानबाजी में लगी हुई है और अब कह रही है कि वह अपनी बात विधानसभा में रखेगी। सुक्खू ने दो टूक कहा कि कांग्रेस सरकार हिमाचल के अधिकारों से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा साथ आए या न आए, राज्य सरकार अपने हक की लड़ाई हर मंच पर लड़ेगी। आरडीजी के मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति में टकराव और तेज होने के आसार हैं, और आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा से लेकर दिल्ली तक गूंज सकता है।
शिमला , 13 फरवरी [ विशाल सूद ] ! रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) बंद होने के मुद्दे पर हिमाचल प्रदेश में सियासत तेज हो गई है। शुक्रवार को राज्य सरकार की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय (ऑल पार्टी) बैठक उस समय विवादों में घिर गई जब बीजेपी विधायक बीच बैठक से ही उठकर बाहर चले गए। इस घटनाक्रम के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी के लिए प्रदेश का हित नहीं, बल्कि “कुर्सी हित” अधिक महत्वपूर्ण है।
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सर्वदलीय बैठक भाजपा के आग्रह पर ही बुलाई गई थी। इतना ही नहीं, भाजपा की मांग पर बैठक का स्थान सचिवालय से बदलकर ऐतिहासिक पीटरहॉफ में किया गया। बावजूद इसके, भाजपा विधायक मुख्यमंत्री की पूरी बात सुने बिना ही बैठक से बाहर चले गए। उन्होंने इसे गंभीर और गैर-जिम्मेदाराना रवैया बताते हुए कहा कि ऐसे संवेदनशील वित्तीय विषय पर राजनीतिक प्रदर्शन उचित नहीं है।
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मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार द्वारा आरडीजी बंद किए जाने से हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर प्रभाव पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश भाजपा में इतनी हिम्मत नहीं है कि वह आरडीजी बहाल करने की मांग मजबूती से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष रख सके। उनके अनुसार, भाजपा अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने के बजाय राजनीतिक बयानबाजी में लगी हुई है और अब कह रही है कि वह अपनी बात विधानसभा में रखेगी।
सुक्खू ने दो टूक कहा कि कांग्रेस सरकार हिमाचल के अधिकारों से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा साथ आए या न आए, राज्य सरकार अपने हक की लड़ाई हर मंच पर लड़ेगी। आरडीजी के मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति में टकराव और तेज होने के आसार हैं, और आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा से लेकर दिल्ली तक गूंज सकता है।
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