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शिमला, 08 मार्च [ विशाल सूद ] ! अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन की ओर से "she leads collective" विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने बतौर मुख्यतिथि शिरकत की। उपायुक्त ने कहा कि महिलाओं के नेतृत्व, आत्मविश्वास और सामूहिक शक्ति के माध्यम से समाज सशक्त बनता है। जब महिलाएँ एक साथ आकर नेतृत्व करती हैं, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन की गति तेज हो जाती है। शिक्षा, तकनीक और सामाजिक भागीदारी के माध्यम से महिलाएँ अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रही हैं और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन रही हैं। She Leads Collective हमें यह सिखाता है कि मिलकर काम करने से ही समानता, सम्मान और प्रगति का मार्ग प्रशस्त होता है। हर्षिता ठाकुर स्पेशल ओलंपिक वर्ल्ड विंटर गेम्स में ब्रॉन्ज एवं सिल्वर विजेता ने कहा कि जब मन में ठाना हो तो कुछ भी हासिल किया जा सकता है।डीएसपी गुलशन नेगी ने महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनों को लेकर विस्तृत जानकारी रखी। उन्होंने कहा कि वर्दी जब पहन ले तो हमें शक्ति मिलती। बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष संतोष शर्मा ने कहा कि समय के अनुसार महिलाओं ने स्वयं को बदला है।हमें अपने बच्चों को समय देना होगा। मोबाइल से दूरी रखना बेहद जरूरी है।पूनम ठाकुर सहायक आयुक्त एक्साइज ने कहा कि विभाग की ओर से राजस्व एकत्रित करने का लक्ष्य दिया गया था उन्होंने उस लक्ष्य से 41 करोड़ रुपए अतिरिक्त एकत्रित किया था। जीएसटी को लेकर शिक्षण संस्थानों में वह जागरूकता अभियानों का आयोजन करती रहती है। डा रविंद्रा बांशटू ने कहा कि महिलाओं को खेलों को अपने जीवन का अहम हिस्सा बनाना चाहिए। इससे स्ट्रेस दूर होता है और वह स्वस्थ रहती है। स्वस्थ समाज के लिए महिलाओं का स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है।कल्पना ने कहा कि ब्रेस्ट कैंसर को लेकर 15 सालों से महिलाओं को जागरूक कर रही हैं। महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर को लेकर झिझक है। उन्होंने कहा कि कैंसर को हराया जा सकता है। वह पिछले 10 साल से लेबर क्लास के बच्चों के लिए स्कूल भी चला रही हैं। एसएचओ छोटा शिमला ममता रघुवंशी ने कहा कि घर में कोई भी दिन की महिला के बिना शुरू नहीं होता है। आज पुरुषों को भी जागरूक करने की जरूरत है।कामायनी विष्ट प्रिंसिपल फाइन आर्ट्स कॉलेज ने कहा कि घर के अंदर लड़का और लड़की के साथ एक समान व्यवहार करें। बच्चों का पालन पोषण सोच समझ करना होगा। हमें महिलाओं का ग्रुप बनाना चाहिए ताकि किसी एक को जरूरत हो तो एक दूसरे की मदद करनी चाहिए। वंदना भांगड़ा ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचार को रोकने के लिए कानूनों की जानकारी होनी चाहिए। अन्याय के खिलाफ चुप नहीं रहना चाहिए। महिलाओं को एक दूसरे की मदद करनी चाहिए।असिस्टेंट प्रोफ़ेसर नीलम ठाकुर ने कहा कि महिलाएं सबसे अधिक किचन में ही काम करती है।लेकिन आज हमारा किचन कैंसर को जन्म दे रहा है। जितने भी किचन में उत्पाद में रिफाइन इस्तेमाल करते है वो धीरे-धीरे कैंसर का जन्म हमारे शरीर में कर रहे है। प्लास्टिक का इस्तेमाल भी किचन में बहुत होता है।हमारे फ्रिज में प्लास्टिक की बोतल ओर प्लास्टिक के बर्तन होते है जोकि हानिकारक होते है। पार्षद आशा ने कहा कि कुछ महिलाओं को परिवार बहुत मदद करते हैं। बेटियों को आज बेहतर शिक्षा देने पर हर परिवार गर्व महसूस करता है।पार्षद निशा ने कहा कि अपने बेटों को संस्कार देने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि मेरे पास एक ऐसी मां आई जो पेंशन लगवाना चाहती थी। उस मां का बेटा बहुत बड़ा कारोबारी है। लेकिन मां को पेंशन की जरूरत पड़ रही है। महिलाओं को सच में मदद की जरूरत होती है। तनुजा ने कहा कि कई महिलाएं सपने तो देखती है, लेकिन उन सपनों को हकीकत में बदलने के लिए मेहनत नहीं करना चाहती है। हमें घर की चार दिवारी के अंदर नहीं रहना चाहिए। समाज और देश के लिए सपनों को पूरा करना चाहिए।डा निवेदिता जिला योजना अधिकारी ने कहा कि कार्य का आवंटन जेंडर के आधार पर कतई नहीं करना चाहिए। वरिष्ठ पत्रकार अर्चना फुल ने कहा कि महिला जब सफल होती है तो उसका परिवार उसके साथ होता है। प्राकृतिक खेती में महिलाएं सबसे अधिक सक्रिय है। महिलाएं आज स्किल पर बहुत काम कर रही है ।मनोचिकित्सक डा दीपा राठौर ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य एक चुनौती बन गया है। महिलाओं को अपने मानसिक स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखना चाहिए। पर्यावरण अधिकारी अँचिता ने कहा कि प्रकृति को महिलाएं नजदीक से जानती है। ऐसे में प्रकृति को बचाने और सहेजने में महिलाओं को अपना योगदान निरंतर तय करना चाहिए। पार्षद मोनिका भारद्वाज ने कहा कि राजनीति में भी महिलाएं आज पहचान बना रही है। समाज में महिलाओं ने कुरीतियों को हरा कर अपने संघर्ष और मेहनत से नई दिशा तय की है। नारी नींव का वो पत्थर है जिससे समाज और परिवार की इमारत खड़ी है।
शिमला, 08 मार्च [ विशाल सूद ] ! अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन की ओर से "she leads collective" विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने बतौर मुख्यतिथि शिरकत की। उपायुक्त ने कहा कि महिलाओं के नेतृत्व, आत्मविश्वास और सामूहिक शक्ति के माध्यम से समाज सशक्त बनता है। जब महिलाएँ एक साथ आकर नेतृत्व करती हैं, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन की गति तेज हो जाती है। शिक्षा, तकनीक और सामाजिक भागीदारी के माध्यम से महिलाएँ अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रही हैं और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन रही हैं। She Leads Collective हमें यह सिखाता है कि मिलकर काम करने से ही समानता, सम्मान और प्रगति का मार्ग प्रशस्त होता है।
हर्षिता ठाकुर स्पेशल ओलंपिक वर्ल्ड विंटर गेम्स में ब्रॉन्ज एवं सिल्वर विजेता ने कहा कि जब मन में ठाना हो तो कुछ भी हासिल किया जा सकता है।डीएसपी गुलशन नेगी ने महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनों को लेकर विस्तृत जानकारी रखी। उन्होंने कहा कि वर्दी जब पहन ले तो हमें शक्ति मिलती।
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बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष संतोष शर्मा ने कहा कि समय के अनुसार महिलाओं ने स्वयं को बदला है।हमें अपने बच्चों को समय देना होगा। मोबाइल से दूरी रखना बेहद जरूरी है।पूनम ठाकुर सहायक आयुक्त एक्साइज ने कहा कि विभाग की ओर से राजस्व एकत्रित करने का लक्ष्य दिया गया था उन्होंने उस लक्ष्य से 41 करोड़ रुपए अतिरिक्त एकत्रित किया था। जीएसटी को लेकर शिक्षण संस्थानों में वह जागरूकता अभियानों का आयोजन करती रहती है।
डा रविंद्रा बांशटू ने कहा कि महिलाओं को खेलों को अपने जीवन का अहम हिस्सा बनाना चाहिए। इससे स्ट्रेस दूर होता है और वह स्वस्थ रहती है। स्वस्थ समाज के लिए महिलाओं का स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है।कल्पना ने कहा कि ब्रेस्ट कैंसर को लेकर 15 सालों से महिलाओं को जागरूक कर रही हैं। महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर को लेकर झिझक है। उन्होंने कहा कि कैंसर को हराया जा सकता है। वह पिछले 10 साल से लेबर क्लास के बच्चों के लिए स्कूल भी चला रही हैं।
एसएचओ छोटा शिमला ममता रघुवंशी ने कहा कि घर में कोई भी दिन की महिला के बिना शुरू नहीं होता है। आज पुरुषों को भी जागरूक करने की जरूरत है।कामायनी विष्ट प्रिंसिपल फाइन आर्ट्स कॉलेज ने कहा कि घर के अंदर लड़का और लड़की के साथ एक समान व्यवहार करें। बच्चों का पालन पोषण सोच समझ करना होगा। हमें महिलाओं का ग्रुप बनाना चाहिए ताकि किसी एक को जरूरत हो तो एक दूसरे की मदद करनी चाहिए।
वंदना भांगड़ा ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचार को रोकने के लिए कानूनों की जानकारी होनी चाहिए। अन्याय के खिलाफ चुप नहीं रहना चाहिए। महिलाओं को एक दूसरे की मदद करनी चाहिए।असिस्टेंट प्रोफ़ेसर नीलम ठाकुर ने कहा कि महिलाएं सबसे अधिक किचन में ही काम करती है।लेकिन आज हमारा किचन कैंसर को जन्म दे रहा है। जितने भी किचन में उत्पाद में रिफाइन इस्तेमाल करते है वो धीरे-धीरे कैंसर का जन्म हमारे शरीर में कर रहे है। प्लास्टिक का इस्तेमाल भी किचन में बहुत होता है।हमारे फ्रिज में प्लास्टिक की बोतल ओर प्लास्टिक के बर्तन होते है जोकि हानिकारक होते है।
पार्षद आशा ने कहा कि कुछ महिलाओं को परिवार बहुत मदद करते हैं। बेटियों को आज बेहतर शिक्षा देने पर हर परिवार गर्व महसूस करता है।पार्षद निशा ने कहा कि अपने बेटों को संस्कार देने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि मेरे पास एक ऐसी मां आई जो पेंशन लगवाना चाहती थी। उस मां का बेटा बहुत बड़ा कारोबारी है। लेकिन मां को पेंशन की जरूरत पड़ रही है। महिलाओं को सच में मदद की जरूरत होती है।
तनुजा ने कहा कि कई महिलाएं सपने तो देखती है, लेकिन उन सपनों को हकीकत में बदलने के लिए मेहनत नहीं करना चाहती है। हमें घर की चार दिवारी के अंदर नहीं रहना चाहिए। समाज और देश के लिए सपनों को पूरा करना चाहिए।डा निवेदिता जिला योजना अधिकारी ने कहा कि कार्य का आवंटन जेंडर के आधार पर कतई नहीं करना चाहिए।
वरिष्ठ पत्रकार अर्चना फुल ने कहा कि महिला जब सफल होती है तो उसका परिवार उसके साथ होता है। प्राकृतिक खेती में महिलाएं सबसे अधिक सक्रिय है। महिलाएं आज स्किल पर बहुत काम कर रही है ।मनोचिकित्सक डा दीपा राठौर ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य एक चुनौती बन गया है। महिलाओं को अपने मानसिक स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखना चाहिए।
पर्यावरण अधिकारी अँचिता ने कहा कि प्रकृति को महिलाएं नजदीक से जानती है। ऐसे में प्रकृति को बचाने और सहेजने में महिलाओं को अपना योगदान निरंतर तय करना चाहिए।
पार्षद मोनिका भारद्वाज ने कहा कि राजनीति में भी महिलाएं आज पहचान बना रही है। समाज में महिलाओं ने कुरीतियों को हरा कर अपने संघर्ष और मेहनत से नई दिशा तय की है। नारी नींव का वो पत्थर है जिससे समाज और परिवार की इमारत खड़ी है।
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