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शिमला , 10 मार्च [ विशाल सूद ] ! हिमाचल प्रदेश को नया राज्यपाल मिल गया है। कविंद्र गुप्ता ने राज्य के 30वें राज्यपाल के रूप में शपथ ग्रहण की। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावलिया ने उन्हें शपथ दिलाई। 2 दिसंबर 1959 को जम्मू में जन्मे कविंद्र गुप्ता चार दशकों से अधिक समय से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे हैं। 1970 के दशक में आरएसएस से जुड़कर उन्होंने अपने सामाजिक और राजनीतिक सफर की शुरुआत की। वे जम्मू नगर निगम के महापौर भी रहे और लगातार तीन कार्यकाल तक इस पद की जिम्मेदारी निभाई। वर्ष 2014 में वे गांधीनगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। इसके बाद 2015 में उन्हें जम्मू-कश्मीर विधानसभा का स्पीकर बनाया गया और 2018 में उन्होंने उपमुख्यमंत्री का पद संभाला। वर्ष 2025 में उन्हें लद्दाख का उप-राज्यपाल नियुक्त किया गया और लगभग सात महीने बाद अब उन्हें हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया है। कविंद्र गुप्ता की शुरुआती शिक्षा पंजाब में हुई। वर्ष 1963 में उनके पिता के तबादले के बाद परिवार संगरूर चला गया, जहां उन्होंने प्रारंभिक पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने फिरोजपुर और गुरदासपुर में शिक्षा प्राप्त की। वर्ष 1979 में गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज, गुरदासपुर से उन्होंने स्नातक की डिग्री हासिल की। उनका सार्वजनिक जीवन 1970 के दशक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ने के साथ शुरू हुआ। आपातकाल (1975-77) के दौरान उन्हें गुरदासपुर और पटियाला जेल में भी रहना पड़ा। इसके बाद 1978 से 1979 के बीच उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की पंजाब इकाई के सचिव के रूप में कार्य किया। संगठनात्मक राजनीति में आगे बढ़ते हुए वर्ष 1988 में उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा, जम्मू-कश्मीर का जिला अध्यक्ष बनाया गया। बाद में 1993 से 1998 तक वे बीजेवाईएम जम्मू-कश्मीर के प्रदेश अध्यक्ष रहे। कविंद्र गुप्ता का सक्रिय चुनावी राजनीति में प्रवेश नगर निकाय स्तर से हुआ। वे जम्मू नगर निगम के पहले महापौर चुने गए और 2005 से 2010 तक लगातार तीन कार्यकाल तक इस पद पर रहे। इस दौरान उन्होंने शहर में स्वच्छता, नागरिक सुविधाओं और शहरी ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया। वर्ष 2014 में वे गांधी नगर विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के विधायक निर्वाचित हुए। 18 मार्च 2015 को उन्हें जम्मू-कश्मीर विधानसभा का अध्यक्ष चुना गया और वे इस पद पर पहुंचने वाले पहले भाजपा नेता बने। इसके बाद 30 अप्रैल 2018 को उन्हें जम्मू-कश्मीर का उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया गया। 14 जुलाई 2025 को उन्हें लद्दाख का उप-राज्यपाल बनाया गया, जहां उन्होंने अवसंरचना, शिक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यटन के विकास पर काम किया। इसके बाद 5 मार्च 2026 को उन्हें हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
शिमला , 10 मार्च [ विशाल सूद ] ! हिमाचल प्रदेश को नया राज्यपाल मिल गया है। कविंद्र गुप्ता ने राज्य के 30वें राज्यपाल के रूप में शपथ ग्रहण की। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावलिया ने उन्हें शपथ दिलाई। 2 दिसंबर 1959 को जम्मू में जन्मे कविंद्र गुप्ता चार दशकों से अधिक समय से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे हैं।
1970 के दशक में आरएसएस से जुड़कर उन्होंने अपने सामाजिक और राजनीतिक सफर की शुरुआत की। वे जम्मू नगर निगम के महापौर भी रहे और लगातार तीन कार्यकाल तक इस पद की जिम्मेदारी निभाई। वर्ष 2014 में वे गांधीनगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। इसके बाद 2015 में उन्हें जम्मू-कश्मीर विधानसभा का स्पीकर बनाया गया और 2018 में उन्होंने उपमुख्यमंत्री का पद संभाला। वर्ष 2025 में उन्हें लद्दाख का उप-राज्यपाल नियुक्त किया गया और लगभग सात महीने बाद अब उन्हें हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया है।
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कविंद्र गुप्ता की शुरुआती शिक्षा पंजाब में हुई। वर्ष 1963 में उनके पिता के तबादले के बाद परिवार संगरूर चला गया, जहां उन्होंने प्रारंभिक पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने फिरोजपुर और गुरदासपुर में शिक्षा प्राप्त की। वर्ष 1979 में गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज, गुरदासपुर से उन्होंने स्नातक की डिग्री हासिल की।
उनका सार्वजनिक जीवन 1970 के दशक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ने के साथ शुरू हुआ। आपातकाल (1975-77) के दौरान उन्हें गुरदासपुर और पटियाला जेल में भी रहना पड़ा। इसके बाद 1978 से 1979 के बीच उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की पंजाब इकाई के सचिव के रूप में कार्य किया।
संगठनात्मक राजनीति में आगे बढ़ते हुए वर्ष 1988 में उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा, जम्मू-कश्मीर का जिला अध्यक्ष बनाया गया। बाद में 1993 से 1998 तक वे बीजेवाईएम जम्मू-कश्मीर के प्रदेश अध्यक्ष रहे।
कविंद्र गुप्ता का सक्रिय चुनावी राजनीति में प्रवेश नगर निकाय स्तर से हुआ। वे जम्मू नगर निगम के पहले महापौर चुने गए और 2005 से 2010 तक लगातार तीन कार्यकाल तक इस पद पर रहे। इस दौरान उन्होंने शहर में स्वच्छता, नागरिक सुविधाओं और शहरी ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया।
वर्ष 2014 में वे गांधी नगर विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के विधायक निर्वाचित हुए। 18 मार्च 2015 को उन्हें जम्मू-कश्मीर विधानसभा का अध्यक्ष चुना गया और वे इस पद पर पहुंचने वाले पहले भाजपा नेता बने। इसके बाद 30 अप्रैल 2018 को उन्हें जम्मू-कश्मीर का उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया गया।
14 जुलाई 2025 को उन्हें लद्दाख का उप-राज्यपाल बनाया गया, जहां उन्होंने अवसंरचना, शिक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यटन के विकास पर काम किया। इसके बाद 5 मार्च 2026 को उन्हें हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
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