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शिमला , 11 मार्च [ विशाल सूद ] ! 67वें तिब्बती राष्ट्रीय जनक्रांति दिवस के अवसर पर मंगलवार को शिमला में तिब्बती समुदाय ने चीन की दमनकारी नीतियों के विरोध में आक्रोश रैली निकाली। यह रैली शेर-ए-पंजाब चौक से उपायुक्त कार्यालय तक निकाली गई, जिसमें तिब्बती समुदाय के विभिन्न वर्गों के साथ विदेशी समर्थकों ने भी भाग लिया। रैली के बाद आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत तिब्बत और भारत के राष्ट्रगान के साथ की गई। इस दौरान तिब्बत की आजादी के लिए आत्मदाह करने वाले लोगों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना भी की गई। तिब्बतियन वुमेन एसोसिएशन और तिब्बतियन यूथ कांग्रेस सहित विभिन्न तिब्बती संगठनों के प्रतिनिधियों ने चीन सरकार की नीतियों की निंदा करते हुए तिब्बत की आजादी की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि तिब्बत की स्वतंत्रता न केवल तिब्बती लोगों के लिए बल्कि भारत की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। साथ ही संयुक्त राष्ट्र और विश्व समुदाय से तिब्बत आंदोलन को समर्थन देने की अपील की गई। गौरतलब है कि 10 मार्च 1959 को तिब्बत की राजधानी ल्हासा में चीन के कब्जे के खिलाफ बड़ा जनविद्रोह हुआ था। उस दौरान हजारों तिब्बतियों ने दलाई लामा की सुरक्षा के लिए प्रदर्शन किया था। उसी घटना की स्मृति में हर वर्ष 10 मार्च को तिब्बती समुदाय विश्वभर में जनक्रांति दिवस मनाता है।
शिमला , 11 मार्च [ विशाल सूद ] ! 67वें तिब्बती राष्ट्रीय जनक्रांति दिवस के अवसर पर मंगलवार को शिमला में तिब्बती समुदाय ने चीन की दमनकारी नीतियों के विरोध में आक्रोश रैली निकाली। यह रैली शेर-ए-पंजाब चौक से उपायुक्त कार्यालय तक निकाली गई, जिसमें तिब्बती समुदाय के विभिन्न वर्गों के साथ विदेशी समर्थकों ने भी भाग लिया।
रैली के बाद आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत तिब्बत और भारत के राष्ट्रगान के साथ की गई। इस दौरान तिब्बत की आजादी के लिए आत्मदाह करने वाले लोगों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना भी की गई।
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तिब्बतियन वुमेन एसोसिएशन और तिब्बतियन यूथ कांग्रेस सहित विभिन्न तिब्बती संगठनों के प्रतिनिधियों ने चीन सरकार की नीतियों की निंदा करते हुए तिब्बत की आजादी की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि तिब्बत की स्वतंत्रता न केवल तिब्बती लोगों के लिए बल्कि भारत की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। साथ ही संयुक्त राष्ट्र और विश्व समुदाय से तिब्बत आंदोलन को समर्थन देने की अपील की गई।
गौरतलब है कि 10 मार्च 1959 को तिब्बत की राजधानी ल्हासा में चीन के कब्जे के खिलाफ बड़ा जनविद्रोह हुआ था। उस दौरान हजारों तिब्बतियों ने दलाई लामा की सुरक्षा के लिए प्रदर्शन किया था। उसी घटना की स्मृति में हर वर्ष 10 मार्च को तिब्बती समुदाय विश्वभर में जनक्रांति दिवस मनाता है।
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