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शिमला , 13 फरवरी [ विशाल सूद ] ! रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) बंद होने के मुद्दे पर प्रदेश में जारी राजनीतिक बयानबाजी के बीच माकपा नेता राकेश सिंघा ने सभी दलों से एकजुट होकर लड़ने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह समय राजनीतिक स्कोरिंग का नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश के आर्थिक अधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयास करने का है। सिंघा ने कहा कि आरडीजी की बहाली केवल किसी एक पार्टी या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे प्रदेश और सभी राजनीतिक दलों का साझा दायित्व है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आरडीजी पूरी तरह समाप्त हो गई तो इसे दोबारा बहाल कराना बेहद मुश्किल होगा। इससे राज्य की वित्तीय स्थिति पर गंभीर असर पड़ेगा और विकास योजनाओं, सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों तथा बुनियादी ढांचे के कार्य प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश के साथ लगातार आर्थिक भेदभाव किया जा रहा है। सिंघा ने उदाहरण देते हुए कहा कि भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) में हिमाचल को 7.1 प्रतिशत हिस्सेदारी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद अब तक नहीं दी गई है। यह प्रदेश के अधिकारों की अनदेखी है और इससे राज्य को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। माकपा नेता ने कहा कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार कर सभी दलों को एक मंच पर आना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि हिमाचल को अपने वित्तीय अधिकारों की रक्षा करनी है, तो संयुक्त रणनीति और मजबूत पैरवी ही एकमात्र रास्ता है। आरडीजी और अन्य आर्थिक मुद्दों को लेकर प्रदेश में सियासी हलचल तेज है, और आने वाले दिनों में यह बहस और व्यापक रूप ले सकती है।
शिमला , 13 फरवरी [ विशाल सूद ] ! रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) बंद होने के मुद्दे पर प्रदेश में जारी राजनीतिक बयानबाजी के बीच माकपा नेता राकेश सिंघा ने सभी दलों से एकजुट होकर लड़ने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह समय राजनीतिक स्कोरिंग का नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश के आर्थिक अधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयास करने का है।
सिंघा ने कहा कि आरडीजी की बहाली केवल किसी एक पार्टी या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे प्रदेश और सभी राजनीतिक दलों का साझा दायित्व है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आरडीजी पूरी तरह समाप्त हो गई तो इसे दोबारा बहाल कराना बेहद मुश्किल होगा। इससे राज्य की वित्तीय स्थिति पर गंभीर असर पड़ेगा और विकास योजनाओं, सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों तथा बुनियादी ढांचे के कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
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उन्होंने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश के साथ लगातार आर्थिक भेदभाव किया जा रहा है। सिंघा ने उदाहरण देते हुए कहा कि भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) में हिमाचल को 7.1 प्रतिशत हिस्सेदारी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद अब तक नहीं दी गई है। यह प्रदेश के अधिकारों की अनदेखी है और इससे राज्य को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
माकपा नेता ने कहा कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार कर सभी दलों को एक मंच पर आना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि हिमाचल को अपने वित्तीय अधिकारों की रक्षा करनी है, तो संयुक्त रणनीति और मजबूत पैरवी ही एकमात्र रास्ता है। आरडीजी और अन्य आर्थिक मुद्दों को लेकर प्रदेश में सियासी हलचल तेज है, और आने वाले दिनों में यह बहस और व्यापक रूप ले सकती है।
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