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शिमला , 13 फरवरी [ विशाल सूद ] ! हिमाचल में आर्थिक संकट को लेकर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक का भाजपा नेताओं द्वारा वहिष्कार करने को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और राष्ट्रीय प्रवक्ता कुलदीप राठौर ने दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। बैठक में कांग्रेस की ओर कुलदीप राठौर शामिल हुए थे उन्होंने कहा कि आरजीडी ग्रांट खत्म करने पर प्रदेश में उतपन्न हुए आर्थिक संकट को लेकर सर्वदलीय बैठक बुलाई गई जिसमें भाजपा आम आदमी पार्टी,सीपीआई एम के नेता मौजूद रहे। सभी ने अपने सुझाव दिए ओर इस बैठक का मकसद आरजीडी ग्रांट को बहाल करवाने के लिए सभी दलों के नेता प्रधानमंत्री से मिलने की बात कही जा रही थी ताकि आर्थिक संकट से बाहर निकला जा सके। लेकिन भाजपा नेता बैठक छोड़ कर बाहर निकल गए।जोकि दुर्भाग्यपूर्ण है। भाजपा इस मामले पर शुरू से राजनीति कर रही है। आज बैठक में भी भाजपा जनता के दवाब के चलते शामिल है। यदि बैठक में शामिल नही होते तो पूरे प्रदेश में ये संदेश जाता कि भाजपा गंभीर नही है।भाजपा की मंशा पहले से साफ थी कि बैठक में जाना है लेकिन बैठक नही है। भाजपा नेताओं को चाहिए था कि मुख्यमंत्री की बात सुनते लेकिन उन्होंने अपनी बात रखी और मुख्यमंत्री सरकार का पक्ष जाने बिना है बाहर निकल गए। जोकि दुर्भाग्यपूर्ण है।हिमाचल एक छोटा राज्य है और सभी दलों को हिमाचल के हितों को पहले रखना चाहिए। लेकिन भाजपा इन मामलों पर राजनीति कर रही है और भाजपा नेताओं का गैर जिम्मेदाराना व्यवहार सामने आया है।
शिमला , 13 फरवरी [ विशाल सूद ] ! हिमाचल में आर्थिक संकट को लेकर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक का भाजपा नेताओं द्वारा वहिष्कार करने को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और राष्ट्रीय प्रवक्ता कुलदीप राठौर ने दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। बैठक में कांग्रेस की ओर कुलदीप राठौर शामिल हुए थे उन्होंने कहा कि आरजीडी ग्रांट खत्म करने पर प्रदेश में उतपन्न हुए आर्थिक संकट को लेकर सर्वदलीय बैठक बुलाई गई जिसमें भाजपा आम आदमी पार्टी,सीपीआई एम के नेता मौजूद रहे।
सभी ने अपने सुझाव दिए ओर इस बैठक का मकसद आरजीडी ग्रांट को बहाल करवाने के लिए सभी दलों के नेता प्रधानमंत्री से मिलने की बात कही जा रही थी ताकि आर्थिक संकट से बाहर निकला जा सके। लेकिन भाजपा नेता बैठक छोड़ कर बाहर निकल गए।जोकि दुर्भाग्यपूर्ण है। भाजपा इस मामले पर शुरू से राजनीति कर रही है। आज बैठक में भी भाजपा जनता के दवाब के चलते शामिल है।
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यदि बैठक में शामिल नही होते तो पूरे प्रदेश में ये संदेश जाता कि भाजपा गंभीर नही है।भाजपा की मंशा पहले से साफ थी कि बैठक में जाना है लेकिन बैठक नही है।
भाजपा नेताओं को चाहिए था कि मुख्यमंत्री की बात सुनते लेकिन उन्होंने अपनी बात रखी और मुख्यमंत्री सरकार का पक्ष जाने बिना है बाहर निकल गए। जोकि दुर्भाग्यपूर्ण है।हिमाचल एक छोटा राज्य है और सभी दलों को हिमाचल के हितों को पहले रखना चाहिए। लेकिन भाजपा इन मामलों पर राजनीति कर रही है और भाजपा नेताओं का गैर जिम्मेदाराना व्यवहार सामने आया है।
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