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चम्बा , 27 मार्च [ शिवानी ] ! जिला चम्बा में वन विभाग की विभिन्न नर्सरियों में कार्यरत दिहाड़ीदार मजदूरों के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया है। पिछले 18 महीनों से वेतन न मिलने से आक्रोशित मजदूरों ने आज अधिवक्ता जय सिंह की अगुवाई में जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन के साथ जमकर नारे लगाए और वन मण्डलाधिकारी कार्यालय का घेराव किया। निर्धारित समय अवधि बीत जाने के बाद भी वेतन जारी न होने पर, मजदूरों ने पहले उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरना दिया। इसके पश्चात, मजदूरों ने एक आक्रोश रैली निकाली। नारेबाजी करते हुए यह रैली धड़ोग मोहल्ला से होती हुई डीएफओ कार्यालय पहुंची। मजदूरों का आरोप है कि मसरुंड, कंदला और माणी बीट में पिछले 15-16 वर्षों से सेवाएं दे रहे कामगारों का विभाग द्वारा आर्थिक शोषण किया जा रहा है। डीएफओ कार्यालय पहुंचने पर माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया जब अपनी मांगों पर अड़े मजदूर कार्यालय के भीतर ही जमीन पर बैठ गए। अधिवक्ता जय सिंह ने प्रशासन और सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मुख्यमंत्री कहते हैं कि यह मजदूरों और किसानों की सरकार है, लेकिन धरातल पर सच्चाई इसके विपरीत है। वीआईपी लोगों को समय पर वेतन मिल रहा है, जबकि गरीब मजदूर आज दाने-दाने को मोहताज हैं। प्रदर्शन के बढ़ते दबाव को देखते हुए डीएफओ ने प्रदर्शनकारियों से वार्ता की। विभाग की ओर से आश्वासन दिया गया है कि मजदूरों का सारा लंबित भुगतान अप्रैल माह में कर दिया जाएगा। डीएफओ ने कहा कि बजट और तकनीकी प्रक्रियाओं को जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं, मजदूरों ने स्पष्ट किया है कि यदि अप्रैल माह में भी वेतन जारी नहीं होता है, तो वे बिना किसी पूर्व सूचना के उग्र आंदोलन शुरू कर देंगे।
चम्बा , 27 मार्च [ शिवानी ] ! जिला चम्बा में वन विभाग की विभिन्न नर्सरियों में कार्यरत दिहाड़ीदार मजदूरों के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया है। पिछले 18 महीनों से वेतन न मिलने से आक्रोशित मजदूरों ने आज अधिवक्ता जय सिंह की अगुवाई में जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन के साथ जमकर नारे लगाए और वन मण्डलाधिकारी कार्यालय का घेराव किया। निर्धारित समय अवधि बीत जाने के बाद भी वेतन जारी न होने पर, मजदूरों ने पहले उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरना दिया।
इसके पश्चात, मजदूरों ने एक आक्रोश रैली निकाली। नारेबाजी करते हुए यह रैली धड़ोग मोहल्ला से होती हुई डीएफओ कार्यालय पहुंची। मजदूरों का आरोप है कि मसरुंड, कंदला और माणी बीट में पिछले 15-16 वर्षों से सेवाएं दे रहे कामगारों का विभाग द्वारा आर्थिक शोषण किया जा रहा है। डीएफओ कार्यालय पहुंचने पर माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया जब अपनी मांगों पर अड़े मजदूर कार्यालय के भीतर ही जमीन पर बैठ गए।
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अधिवक्ता जय सिंह ने प्रशासन और सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मुख्यमंत्री कहते हैं कि यह मजदूरों और किसानों की सरकार है, लेकिन धरातल पर सच्चाई इसके विपरीत है। वीआईपी लोगों को समय पर वेतन मिल रहा है, जबकि गरीब मजदूर आज दाने-दाने को मोहताज हैं। प्रदर्शन के बढ़ते दबाव को देखते हुए डीएफओ ने प्रदर्शनकारियों से वार्ता की।
विभाग की ओर से आश्वासन दिया गया है कि मजदूरों का सारा लंबित भुगतान अप्रैल माह में कर दिया जाएगा। डीएफओ ने कहा कि बजट और तकनीकी प्रक्रियाओं को जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं, मजदूरों ने स्पष्ट किया है कि यदि अप्रैल माह में भी वेतन जारी नहीं होता है, तो वे बिना किसी पूर्व सूचना के उग्र आंदोलन शुरू कर देंगे।
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