ओडी–बिथल सड़क जीर्णोद्धार पर सच्चाई सामने लाएं विधायक, केंद्र के धन पर राजनीति बंद हो “नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली” – पहले उपेक्षा, अब श्रेय लेने की होड़
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शिमला, 24 फरवरी [ विशाल सूद ] ! भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि प्रदेश में तथाकथित ‘व्यवस्था परिवर्तन’ की आड़ में सच्चाई को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। इसका ताजा उदाहरण ओडी–बिथल सड़क के जीर्णोद्धार की पट्टिका है, जिसे कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं वर्तमान राष्ट्रीय प्रवक्ता व विधायक कुलदीप जी द्वारा रखा गया। आश्चर्य की बात यह रही कि इस कार्य में स्वीकृत राशि को विधायक निधि या प्रदेश सरकार के खाते में दिखाने का प्रयास किया गया। संदीपनी भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि इस परियोजना के लिए ₹20 करोड़ की राशि नाबार्ड के माध्यम से केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत की गई है। राज्य सरकार ने केवल डीपीआर तैयार कर भेजी है, जो उसका दायित्व है। प्राथमिकता दर्शाना एक बात है, परंतु केंद्र सरकार की स्वीकृत राशि पर प्रदेश सरकार या विधायक द्वारा श्रेय लेना उचित नहीं। यह स्थिति “नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली” जैसी प्रतीत होती है—पहले वर्षों तक उपेक्षा और अब श्रेय लेने की होड़।उन्होंने कहा कि लगभग 40–45 वर्ष पूर्व कोटगढ़ क्षेत्र में भुट्टी और बिथल को जोड़ने वाली यह सड़क पक्की नहीं थी। वर्ष 1999–2000 में तत्कालीन मुख्यमंत्री आदरणीय प्रेम कुमार धूमल जी ने थानेदार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इसकी घोषणा की और भाजपा शासनकाल में यह सड़क पक्की की गई। उससे पहले क्षेत्र की जनता धूल फांकने को मजबूर थी। बाद के वर्षों में केवल औपचारिक पैचवर्क हुआ, कोई दीर्घकालिक सुधार नहीं हुआ। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि सड़क के जीर्णोद्धार का कार्य स्वागत योग्य है, क्योंकि इससे क्षेत्र की जनता को लाभ मिलेगा। परंतु जनता को यह जानने का अधिकार है कि यह धन हिमाचल प्रदेश सरकार का नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के नाबार्ड से स्वीकृत है। नाबार्ड के तहत हिमाचल सरकार द्वारा लगभग ₹20,000 करोड़ के प्रस्ताव केंद्र को भेजे गए हैं, जिनमें सड़क, पेयजल, बागवानी, विद्यालय निर्माण सहित अनेक विकास कार्य शामिल हैं। इन परियोजनाओं की ईएमआई का वहन भी केंद्र सरकार करती है। नॉन-ट्राइबल क्षेत्रों में 10 प्रतिशत अंशदान राज्य सरकार को करना होता है, जबकि ट्राइबल क्षेत्रों में यह प्रावधान भी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि 41 किलोमीटर लंबी इस सड़क के पुनर्वास में यदि समुचित वाइडनिंग का प्रावधान किया जाता तो यह और अधिक उपयोगी होता। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्तमान परियोजना में वाइडनिंग का प्रावधान सीमित है, जो भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए अपर्याप्त प्रतीत होता है। संदीपनी भारद्वाज ने कांग्रेस नेताओं से आग्रह किया कि वे झूठा श्रेय लेने और भ्रम फैलाने की राजनीति से बचें। जनता जागरूक है और तथ्यों को समझती है। व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर नई भ्रामक परंपरा स्थापित करने के बजाय विकास कार्यों में पारदर्शिता और ईमानदारी अपनाई जानी चाहिए।
शिमला, 24 फरवरी [ विशाल सूद ] ! भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि प्रदेश में तथाकथित ‘व्यवस्था परिवर्तन’ की आड़ में सच्चाई को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। इसका ताजा उदाहरण ओडी–बिथल सड़क के जीर्णोद्धार की पट्टिका है, जिसे कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं वर्तमान राष्ट्रीय प्रवक्ता व विधायक कुलदीप जी द्वारा रखा गया।
आश्चर्य की बात यह रही कि इस कार्य में स्वीकृत राशि को विधायक निधि या प्रदेश सरकार के खाते में दिखाने का प्रयास किया गया। संदीपनी भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि इस परियोजना के लिए ₹20 करोड़ की राशि नाबार्ड के माध्यम से केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत की गई है। राज्य सरकार ने केवल डीपीआर तैयार कर भेजी है, जो उसका दायित्व है।
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प्राथमिकता दर्शाना एक बात है, परंतु केंद्र सरकार की स्वीकृत राशि पर प्रदेश सरकार या विधायक द्वारा श्रेय लेना उचित नहीं। यह स्थिति “नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली” जैसी प्रतीत होती है—पहले वर्षों तक उपेक्षा और अब श्रेय लेने की होड़।उन्होंने कहा कि लगभग 40–45 वर्ष पूर्व कोटगढ़ क्षेत्र में भुट्टी और बिथल को जोड़ने वाली यह सड़क पक्की नहीं थी।
वर्ष 1999–2000 में तत्कालीन मुख्यमंत्री आदरणीय प्रेम कुमार धूमल जी ने थानेदार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इसकी घोषणा की और भाजपा शासनकाल में यह सड़क पक्की की गई। उससे पहले क्षेत्र की जनता धूल फांकने को मजबूर थी। बाद के वर्षों में केवल औपचारिक पैचवर्क हुआ, कोई दीर्घकालिक सुधार नहीं हुआ।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि सड़क के जीर्णोद्धार का कार्य स्वागत योग्य है, क्योंकि इससे क्षेत्र की जनता को लाभ मिलेगा। परंतु जनता को यह जानने का अधिकार है कि यह धन हिमाचल प्रदेश सरकार का नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के नाबार्ड से स्वीकृत है। नाबार्ड के तहत हिमाचल सरकार द्वारा लगभग ₹20,000 करोड़ के प्रस्ताव केंद्र को भेजे गए हैं, जिनमें सड़क, पेयजल, बागवानी, विद्यालय निर्माण सहित अनेक विकास कार्य शामिल हैं। इन परियोजनाओं की ईएमआई का वहन भी केंद्र सरकार करती है। नॉन-ट्राइबल क्षेत्रों में 10 प्रतिशत अंशदान राज्य सरकार को करना होता है, जबकि ट्राइबल क्षेत्रों में यह प्रावधान भी नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि 41 किलोमीटर लंबी इस सड़क के पुनर्वास में यदि समुचित वाइडनिंग का प्रावधान किया जाता तो यह और अधिक उपयोगी होता। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्तमान परियोजना में वाइडनिंग का प्रावधान सीमित है, जो भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए अपर्याप्त प्रतीत होता है।
संदीपनी भारद्वाज ने कांग्रेस नेताओं से आग्रह किया कि वे झूठा श्रेय लेने और भ्रम फैलाने की राजनीति से बचें। जनता जागरूक है और तथ्यों को समझती है। व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर नई भ्रामक परंपरा स्थापित करने के बजाय विकास कार्यों में पारदर्शिता और ईमानदारी अपनाई जानी चाहिए।
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