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चम्बा ! सामाजिक कार्यकर्ता एवं 2022 हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में डलहौजी विधानसभा क्षेत्र से पूर्व प्रत्याशी मनीष सरीन ने प्रदेश सरकार द्वारा राज्य प्रवेश कर (State Entry Tax) को ₹170 तक बढ़ाने के निर्णय पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इस फैसले को लेकर पूरे देश, विशेषकर पड़ोसी राज्य पंजाब में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, और यह मुद्दा पंजाब विधानसभा में भी उठाया जा चुका है। मनीष सरीन ने कहा कि यदि पंजाब सरकार भी हिमाचल के इस निर्णय के जवाब में हिमाचल पंजीकृत वाहनों पर समान कर लगाने का फैसला करती है, तो इसका सीधा और गंभीर प्रभाव हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था और यहां के आम नागरिकों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल के लोग रोजमर्रा की कई आवश्यकताओं—चाहे वह रोजगार, व्यापार, इलाज या व्यक्तिगत कार्य हों—के लिए पंजाब पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में कर विवाद आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा देगा।उन्होंने आगे कहा कि इस निर्णय का सबसे बड़ा असर प्रदेश के पर्यटन और बागवानी क्षेत्र पर पड़ेगा, जो हिमाचल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों की संख्या में कमी आ सकती है, वहीं फलों की ढुलाई और विपणन पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। मनीष सरीन ने यह भी बताया कि रेत, बजरी, ईंट जैसी निर्माण सामग्री का बड़ा हिस्सा पंजाब से या पंजाब के रास्ते हिमाचल आता है। यदि कर विवाद बढ़ता है तो इन आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भारी बढ़ोतरी होगी, जिससे प्रदेश में विकास कार्यों की लागत भी बढ़ेगी और आम आदमी पर आर्थिक बोझ पड़ेगा।उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे इस निर्णय पर पुनर्विचार करें और प्रदेश के निवासियों तथा राज्य की अर्थव्यवस्था के व्यापक हित को ध्यान में रखें। सरीन ने यह भी कहा कि हिमाचल और पंजाब के बीच केवल व्यापारिक ही नहीं बल्कि सामाजिक और पारिवारिक संबंध भी गहरे हैं। दोनों राज्यों के लोगों के रिश्तेदार एक-दूसरे के यहां रहते हैं। ऐसे में कर को लेकर उत्पन्न विवाद दोनों राज्यों के बीच विश्वास और सौहार्द को भी प्रभावित कर सकता है। अंत में उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे निर्णय लेने चाहिए जो जनता को राहत दें, न कि पड़ोसी राज्यों के साथ टकराव की स्थिति पैदा करें।
चम्बा ! सामाजिक कार्यकर्ता एवं 2022 हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में डलहौजी विधानसभा क्षेत्र से पूर्व प्रत्याशी मनीष सरीन ने प्रदेश सरकार द्वारा राज्य प्रवेश कर (State Entry Tax) को ₹170 तक बढ़ाने के निर्णय पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इस फैसले को लेकर पूरे देश, विशेषकर पड़ोसी राज्य पंजाब में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, और यह मुद्दा पंजाब विधानसभा में भी उठाया जा चुका है।
मनीष सरीन ने कहा कि यदि पंजाब सरकार भी हिमाचल के इस निर्णय के जवाब में हिमाचल पंजीकृत वाहनों पर समान कर लगाने का फैसला करती है, तो इसका सीधा और गंभीर प्रभाव हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था और यहां के आम नागरिकों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल के लोग रोजमर्रा की कई आवश्यकताओं—चाहे वह रोजगार, व्यापार, इलाज या व्यक्तिगत कार्य हों—के लिए पंजाब पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में कर विवाद आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा देगा।
उन्होंने आगे कहा कि इस निर्णय का सबसे बड़ा असर प्रदेश के पर्यटन और बागवानी क्षेत्र पर पड़ेगा, जो हिमाचल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों की संख्या में कमी आ सकती है, वहीं फलों की ढुलाई और विपणन पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।
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मनीष सरीन ने यह भी बताया कि रेत, बजरी, ईंट जैसी निर्माण सामग्री का बड़ा हिस्सा पंजाब से या पंजाब के रास्ते हिमाचल आता है। यदि कर विवाद बढ़ता है तो इन आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भारी बढ़ोतरी होगी, जिससे प्रदेश में विकास कार्यों की लागत भी बढ़ेगी और आम आदमी पर आर्थिक बोझ पड़ेगा।
उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे इस निर्णय पर पुनर्विचार करें और प्रदेश के निवासियों तथा राज्य की अर्थव्यवस्था के व्यापक हित को ध्यान में रखें।
सरीन ने यह भी कहा कि हिमाचल और पंजाब के बीच केवल व्यापारिक ही नहीं बल्कि सामाजिक और पारिवारिक संबंध भी गहरे हैं। दोनों राज्यों के लोगों के रिश्तेदार एक-दूसरे के यहां रहते हैं। ऐसे में कर को लेकर उत्पन्न विवाद दोनों राज्यों के बीच विश्वास और सौहार्द को भी प्रभावित कर सकता है। अंत में उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे निर्णय लेने चाहिए जो जनता को राहत दें, न कि पड़ोसी राज्यों के साथ टकराव की स्थिति पैदा करें।
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