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शिमला , 07 फरवरी [ विशाल सूद ] ! आरडीजी यानी रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट को बंद किए जाने के फैसले के बाद हिमाचल प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने साफ कहा है कि यह मुद्दा किसी बीजेपी या कांग्रेस की राजनीति का नहीं है, बल्कि हिमाचल के 75 लाख लोगों के हक की बात है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी राज्य होने के नाते हिमाचल को इस तरह की मदद पहले भी मिलती रही है और आगे भी मिलनी जरूरी है। वहीं हमीरपुर से सांसद ने भी इस मुद्दे पर पहल की है। कहा कि केंद्र के साथ इस लड़ाई को सभी को मिलकर लड़ना चाहिए और विपक्ष को भी इसे राजनीतिक चश्मे से नहीं देखना चाहिए। इसी को लेकर कल सर्वदलीय बैठक भी बुलाई गई है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के गठन से लेकर अब तक केंद्र सरकार की ओर से इस तरह की मदद मिलती रही है और पहाड़ी राज्य होने के कारण यह सहायता बेहद जरूरी भी है। उन्होंने कहा कि आरडीजी का मुद्दा किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लोगों से जुड़ा हुआ सवाल है। विक्रमादित्य सिंह ने केंद्र से मिलने वाले फंड का जिक्र करते हुए बताया कि हाल ही में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत हिमाचल को करीब 2300 करोड़ रुपये मिले हैं और इसी के तहत बीते दिन 46 करोड़ रुपये इंसेंटिव के तौर पर भी प्राप्त हुए हैं। उनका कहना है कि ये इंसेंटिव तभी मिलते हैं जब तय मापदंडों के अनुसार काम होता है, जो यह दर्शाता है कि केंद्र से आने वाले पैसे का सही तरीके से धरातल पर उपयोग हो रहा है। वहीं आरडीजी को लेकर बुलाए गए विशेष सत्र को राज्यपाल की मंजूरी न मिलने पर विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि संभव है यह एक तकनीकी कारण हो, क्योंकि सत्र की शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण से होनी थी, जो इस विशेष सत्र के संदर्भ में उपयुक्त नहीं लग रही थी।
शिमला , 07 फरवरी [ विशाल सूद ] ! आरडीजी यानी रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट को बंद किए जाने के फैसले के बाद हिमाचल प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने साफ कहा है कि यह मुद्दा किसी बीजेपी या कांग्रेस की राजनीति का नहीं है, बल्कि हिमाचल के 75 लाख लोगों के हक की बात है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी राज्य होने के नाते हिमाचल को इस तरह की मदद पहले भी मिलती रही है और आगे भी मिलनी जरूरी है।
वहीं हमीरपुर से सांसद ने भी इस मुद्दे पर पहल की है। कहा कि केंद्र के साथ इस लड़ाई को सभी को मिलकर लड़ना चाहिए और विपक्ष को भी इसे राजनीतिक चश्मे से नहीं देखना चाहिए। इसी को लेकर कल सर्वदलीय बैठक भी बुलाई गई है।
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लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के गठन से लेकर अब तक केंद्र सरकार की ओर से इस तरह की मदद मिलती रही है और पहाड़ी राज्य होने के कारण यह सहायता बेहद जरूरी भी है। उन्होंने कहा कि आरडीजी का मुद्दा किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लोगों से जुड़ा हुआ सवाल है।
विक्रमादित्य सिंह ने केंद्र से मिलने वाले फंड का जिक्र करते हुए बताया कि हाल ही में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत हिमाचल को करीब 2300 करोड़ रुपये मिले हैं और इसी के तहत बीते दिन 46 करोड़ रुपये इंसेंटिव के तौर पर भी प्राप्त हुए हैं। उनका कहना है कि ये इंसेंटिव तभी मिलते हैं जब तय मापदंडों के अनुसार काम होता है, जो यह दर्शाता है कि केंद्र से आने वाले पैसे का सही तरीके से धरातल पर उपयोग हो रहा है।
वहीं आरडीजी को लेकर बुलाए गए विशेष सत्र को राज्यपाल की मंजूरी न मिलने पर विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि संभव है यह एक तकनीकी कारण हो, क्योंकि सत्र की शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण से होनी थी, जो इस विशेष सत्र के संदर्भ में उपयुक्त नहीं लग रही थी।
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