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शिमला , 03 फरवरी [ विशाल सूद ] ! हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने भारतीय जनता पार्टी पर पलटवार किया है. नरेश चौहान ने कहा कि भाजपा नेता सिर्फ़ राजनीतिक बयानबाजी कर रहे हैं. रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट बंद होने से हिमाचल प्रदेश को भारी नुकसान हुआ है. उन्होंने सवाल खड़े करते हुए कहा कि भाजपा नेता केंद्र सरकार का बचाव करने में लगे हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश एक विशेष दर्जा प्राप्त राज्य हैं.ऐसे में हिमाचल प्रदेश की मदद की जानी ज़रूरी है. नरेश चौहान ने कहा कि 15वें वित्त आयोग के दौरान लगभग 37 हज़ार करोड़ रुपये के राजस्व घाटा अनुदान दिए गए थे. उन्होंने याद दिलाया कि 14वें वित्त आयोग की अवधि समाप्त होने के बाद, जब 15वें वित्त आयोग की रिपोर्ट प्रस्तुत होने में देरी हुई थी, तब भी पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर 11,431 करोड़ रुपये की सहायता राज्यों को दी गई. आरडीजी की समाप्ति से हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिरता, आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं की आपूर्ति और विकासात्मक निवेश गंभीर रूप से प्रभावित होंगे. उन्होंने कहा कि यह बजट जन-विरोधी, किसान-विरोधी और हिमाचल-विरोधी है. हिमाचल प्रदेश को नजरअंदाज कर देश का समावेशी विकास संभव नहीं है.
शिमला , 03 फरवरी [ विशाल सूद ] ! हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने भारतीय जनता पार्टी पर पलटवार किया है. नरेश चौहान ने कहा कि भाजपा नेता सिर्फ़ राजनीतिक बयानबाजी कर रहे हैं. रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट बंद होने से हिमाचल प्रदेश को भारी नुकसान हुआ है. उन्होंने सवाल खड़े करते हुए कहा कि भाजपा नेता केंद्र सरकार का बचाव करने में लगे हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश एक विशेष दर्जा प्राप्त राज्य हैं.ऐसे में हिमाचल प्रदेश की मदद की जानी ज़रूरी है.
नरेश चौहान ने कहा कि 15वें वित्त आयोग के दौरान लगभग 37 हज़ार करोड़ रुपये के राजस्व घाटा अनुदान दिए गए थे. उन्होंने याद दिलाया कि 14वें वित्त आयोग की अवधि समाप्त होने के बाद, जब 15वें वित्त आयोग की रिपोर्ट प्रस्तुत होने में देरी हुई थी, तब भी पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर 11,431 करोड़ रुपये की सहायता राज्यों को दी गई. आरडीजी की समाप्ति से हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिरता, आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं की आपूर्ति और विकासात्मक निवेश गंभीर रूप से प्रभावित होंगे. उन्होंने कहा कि यह बजट जन-विरोधी, किसान-विरोधी और हिमाचल-विरोधी है. हिमाचल प्रदेश को नजरअंदाज कर देश का समावेशी विकास संभव नहीं है.
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