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चम्बा , 05 जनवरी [ शिवानी ] ! आज राजकीय महाविद्यालय चम्बा की राष्ट्रीय सेवा योजना के सात दिवसीय विशेष शिविर "संकल्प 2025-26" के पांचवे दिन के कार्यक्रम का आयोजन हुआ । उक्त जानकारी देते हुए कार्यक्रम अधिकारी प्रोफेसर अविनाश ने कहा कि पांचवे दिन सर्वप्रथम स्वयंसेवी अक्षिता द्वारा चौथे दिन की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। इसके उपरांत एन एस एस लक्ष्य गीत "उठें समाज के लिए उठें- उठें, जगें स्वराष्ट्र के लिए जगें जगें, स्वयं सजें वसुंधरा संवार दें" गाकर दिन की शुरुआत की । कलाम सदन से स्वयंसेवी पलक द्वारा दिन का सुविचार "* अनुभव ही सबसे ज़्यादा साखद अध्यापक हैँ, क्यूंकि वो परीक्षा पहले लेता हैँ और सीख बाद में देता हैँ*" प्रस्तुत किया व उसका वर्णन किया। स्वयंसेवी एकता ने सजारात्मकता का जीवन में महत्व विषय प्र अपने महत्वपूर्ण विचार रखे कलाम सदन से शेर सिंह ने *ए पी जे अब्दुल कलाम* के जीवन पर अपने विचार रखे। स्वयंसेवी नीरज ने अपनी स्वरचित कविता *पहलगांव* सबके समक्ष प्रस्तुत की। पूर्व प्रस्तावित कार्यक्रमानुसार दूसरे दिन स्वयंसेवियों द्वारा महाविद्यालय परिसर में साफ सफाई की गयी। कूड़ा, प्लास्टिक, पॉलिथीन इकठ्ठा किया गया। नालियों मे से मिट्टी निकाली गयी, कूड़ा निकाला गया । महाविद्यालय भवन में कमरों की विस्तृत सफाई की गयी। स्वयंसेवियों द्वारा गांव में प्लास्टिक हटाओ- पर्यावरण बचाओ, प्लास्टिक का धुआं- मौत का कुआं, सब बीमारियों की एक दवाई, घर में रखो साफ सफाई, जन-जन को यह समझाना है, भारत स्वच्छ बनाना है, पेड़ लगाओ- पर्यावरण बचाओ के नारे लगाते हुए एक जागरूकता रैली निकाली । स्वयंसेवियों द्वारा लोगों से कहा कि घर से निकला कूड़ा बाहर खुले में न फेंके । सूखा व गीला कचरा अलग अलग रखें तथा निश्चित स्थान और ही कूड़े का निष्पादन करें। प्रोफेसर अविनाश ने कहा कि समुदाय की सेवा के साथ ही व्यकितत्व विकास एवम चरित्र निर्माण होता है । निःस्वार्थ एवम निष्काम समुदाय सेवा ही राष्ट्रीय सेवा योजना का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए। समाज सेवा करने में आनन्द महसूस करें । अकादमिक सत्र में प्रजापिता ब्रम्हकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की मुख्य शिक्षिका बहन सोनिया व बहन दुर्गा द्वारा महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। उन्होंने शरीर के तत्वों, आत्मा का शरीर में महत्व, नशे के दुष्प्रभाव, नशे से बचाव के उपाय, ध्यान करने से कैसे तनाव से मुक्ति पाएं, नशे से बचने के लिए परमार्श का महत्व इत्यादि विषयों पर महत्वपूर्ण विचार रखे। उन्होंने जीवन में शांति, सुख व समृद्धि की महत्व प्र अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि तनाव, गुस्सा, द्वेष व ईर्ष्या अंदर ही अंदर हमें खोखला कर देती है और बहुत ऊर्जा इसमें खर्च होती हैँ। परमपिता परमात्मा परमधाम निवासी है, निराकार हैँ व जीवन मृत्यु के परे है। हम सबके शरीर में आत्मा हैँ, रूह हैँ, और रूह के बिना शरीर मृत हैँ। हमरे शरीर में परमात्मा नहीं हैँ बल्कि आत्मा हैँ। ईश्वर एक है। जीवन की सम्पन्नता क्या हैँ जीवन की नीर्धनता क्या हैँ? उन्होंने स्वयंसेवियों से ध्यान लगाने की विधि को प्रायोगिक रूप में करवाकर अभ्यास करवाया व नियमित तौर पर ध्यान करने का आह्वान किया। दूसरे अकादमिक सत्र में रविंद्र सिंह, वरिष्ठ सहायक एवं साहित्यकार स्त्रोत व्यक्ति के रूप में उपस्थित रहें। रविंद्र सिंह द्वारा अच्छी किताबों का महत्व, जीवन में संतोष कैसे लाएं, मान की शक्ति को कैसे बढ़ाएं, लोगों की अच्छाई के साथ उन्हें आत्मसात करें, उनकी बुराइयों को नज़रअंदाज़ करें, अच्छे व्यवहार का जीवन में मूल्य, समाज में परिवर्तन कैसे लाएं, चार युगों की विशेषताएं, नशा मुक्ति के साधन का विस्तृत वर्णन, धार्मिक पाठ का मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्व, सोशल मीडिया के लाभ और हानियां बताईं तथा सभी स्वयंसेवियों से आह्वान किया कि शिविर के दौरान जो कुछ भी सीखा जा रहा है वे अपनी जिंदगी में आत्मसात करें और अपने आस-पड़ोस में भी लोगों को जागृत करें। रविंद्र सिंह द्वारा वर्तमान समय में समाज में चल रहें चिट्टे के रूप में फ़ैल रहें जानलेवा नशे के विरुद्ध जागरूकता फैलाई गयी । उन्होंने कहा कि यह नशा हमारे समाज में, हिमाचल में, चम्बा में बहुत तेजी से फ़ैल रहा हैँ और बहुत से परिवारों को बर्बाद कर रहा हैँ। उन्होंने अपने जीवन के अनुभव के आधार पर नशे के दुष्प्रभाव से सम्बंधित कुछ लघु कथाएँ बता कर स्वयंसेवियों को जागृत करने की कोशिश की। प्रोफेसर अविनाश द्वारा रविन्द्र सिंह को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के अधीक्षक ग्रेड 1 श्री मनमोहन सिंह, वरिष्ठ सहायक रविंद्र सिंह, कनिष्ठ कार्यालय सहायक हितेश सलवानिआ, कार्यक्रम अधिकारियों में प्रोफेसर अविनाश, प्रोफेसर संतोष व स्वयंसेवियों में पायल, मनीषा, मेघा ठाकुर, रोहित, बिंदिया, कृतिका शर्मा, आदित्य, विनायक, अंकिता, कार्तिक, अदिति, कविन्द्र, अक्षिता, नागेश, भारती, सुनैना, हिमानी, अमित, भावना, पलक, पिंकू, चुना लोन, अक्षिता, अश्विन, नीरज, शान्तो, खेम राज, मनीषा, साधना, जानवी, नेहा, अमृता, जीतेन्द्र नेगी, बीना, तमन्ना, शिवानी, अखिल, निखिल गौतम, लतू व शेर सिंह इत्यादि उपस्थित रहे ।
चम्बा , 05 जनवरी [ शिवानी ] ! आज राजकीय महाविद्यालय चम्बा की राष्ट्रीय सेवा योजना के सात दिवसीय विशेष शिविर "संकल्प 2025-26" के पांचवे दिन के कार्यक्रम का आयोजन हुआ । उक्त जानकारी देते हुए कार्यक्रम अधिकारी प्रोफेसर अविनाश ने कहा कि पांचवे दिन सर्वप्रथम स्वयंसेवी अक्षिता द्वारा चौथे दिन की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। इसके उपरांत एन एस एस लक्ष्य गीत "उठें समाज के लिए उठें- उठें, जगें स्वराष्ट्र के लिए जगें जगें, स्वयं सजें वसुंधरा संवार दें" गाकर दिन की शुरुआत की ।
कलाम सदन से स्वयंसेवी पलक द्वारा दिन का सुविचार "* अनुभव ही सबसे ज़्यादा साखद अध्यापक हैँ, क्यूंकि वो परीक्षा पहले लेता हैँ और सीख बाद में देता हैँ*" प्रस्तुत किया व उसका वर्णन किया। स्वयंसेवी एकता ने सजारात्मकता का जीवन में महत्व विषय प्र अपने महत्वपूर्ण विचार रखे कलाम सदन से शेर सिंह ने *ए पी जे अब्दुल कलाम* के जीवन पर अपने विचार रखे।
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स्वयंसेवी नीरज ने अपनी स्वरचित कविता *पहलगांव* सबके समक्ष प्रस्तुत की। पूर्व प्रस्तावित कार्यक्रमानुसार दूसरे दिन स्वयंसेवियों द्वारा महाविद्यालय परिसर में साफ सफाई की गयी। कूड़ा, प्लास्टिक, पॉलिथीन इकठ्ठा किया गया। नालियों मे से मिट्टी निकाली गयी, कूड़ा निकाला गया । महाविद्यालय भवन में कमरों की विस्तृत सफाई की गयी।
स्वयंसेवियों द्वारा गांव में प्लास्टिक हटाओ- पर्यावरण बचाओ, प्लास्टिक का धुआं- मौत का कुआं, सब बीमारियों की एक दवाई, घर में रखो साफ सफाई, जन-जन को यह समझाना है, भारत स्वच्छ बनाना है, पेड़ लगाओ- पर्यावरण बचाओ के नारे लगाते हुए एक जागरूकता रैली निकाली । स्वयंसेवियों द्वारा लोगों से कहा कि घर से निकला कूड़ा बाहर खुले में न फेंके । सूखा व गीला कचरा अलग अलग रखें तथा निश्चित स्थान और ही कूड़े का निष्पादन करें।
प्रोफेसर अविनाश ने कहा कि समुदाय की सेवा के साथ ही व्यकितत्व विकास एवम चरित्र निर्माण होता है । निःस्वार्थ एवम निष्काम समुदाय सेवा ही राष्ट्रीय सेवा योजना का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए। समाज सेवा करने में आनन्द महसूस करें । अकादमिक सत्र में प्रजापिता ब्रम्हकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की मुख्य शिक्षिका बहन सोनिया व बहन दुर्गा द्वारा महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। उन्होंने शरीर के तत्वों, आत्मा का शरीर में महत्व, नशे के दुष्प्रभाव, नशे से बचाव के उपाय, ध्यान करने से कैसे तनाव से मुक्ति पाएं, नशे से बचने के लिए परमार्श का महत्व इत्यादि विषयों पर महत्वपूर्ण विचार रखे।
उन्होंने जीवन में शांति, सुख व समृद्धि की महत्व प्र अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि तनाव, गुस्सा, द्वेष व ईर्ष्या अंदर ही अंदर हमें खोखला कर देती है और बहुत ऊर्जा इसमें खर्च होती हैँ। परमपिता परमात्मा परमधाम निवासी है, निराकार हैँ व जीवन मृत्यु के परे है। हम सबके शरीर में आत्मा हैँ, रूह हैँ, और रूह के बिना शरीर मृत हैँ। हमरे शरीर में परमात्मा नहीं हैँ बल्कि आत्मा हैँ। ईश्वर एक है। जीवन की सम्पन्नता क्या हैँ जीवन की नीर्धनता क्या हैँ?
उन्होंने स्वयंसेवियों से ध्यान लगाने की विधि को प्रायोगिक रूप में करवाकर अभ्यास करवाया व नियमित तौर पर ध्यान करने का आह्वान किया। दूसरे अकादमिक सत्र में रविंद्र सिंह, वरिष्ठ सहायक एवं साहित्यकार स्त्रोत व्यक्ति के रूप में उपस्थित रहें। रविंद्र सिंह द्वारा अच्छी किताबों का महत्व, जीवन में संतोष कैसे लाएं, मान की शक्ति को कैसे बढ़ाएं, लोगों की अच्छाई के साथ उन्हें आत्मसात करें, उनकी बुराइयों को नज़रअंदाज़ करें, अच्छे व्यवहार का जीवन में मूल्य, समाज में परिवर्तन कैसे लाएं, चार युगों की विशेषताएं, नशा मुक्ति के साधन का विस्तृत वर्णन, धार्मिक पाठ का मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्व, सोशल मीडिया के लाभ और हानियां बताईं तथा सभी स्वयंसेवियों से आह्वान किया कि शिविर के दौरान जो कुछ भी सीखा जा रहा है वे अपनी जिंदगी में आत्मसात करें और अपने आस-पड़ोस में भी लोगों को जागृत करें।
रविंद्र सिंह द्वारा वर्तमान समय में समाज में चल रहें चिट्टे के रूप में फ़ैल रहें जानलेवा नशे के विरुद्ध जागरूकता फैलाई गयी । उन्होंने कहा कि यह नशा हमारे समाज में, हिमाचल में, चम्बा में बहुत तेजी से फ़ैल रहा हैँ और बहुत से परिवारों को बर्बाद कर रहा हैँ। उन्होंने अपने जीवन के अनुभव के आधार पर नशे के दुष्प्रभाव से सम्बंधित कुछ लघु कथाएँ बता कर स्वयंसेवियों को जागृत करने की कोशिश की। प्रोफेसर अविनाश द्वारा रविन्द्र सिंह को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के अधीक्षक ग्रेड 1 श्री मनमोहन सिंह, वरिष्ठ सहायक रविंद्र सिंह, कनिष्ठ कार्यालय सहायक हितेश सलवानिआ, कार्यक्रम अधिकारियों में प्रोफेसर अविनाश, प्रोफेसर संतोष व स्वयंसेवियों में पायल, मनीषा, मेघा ठाकुर, रोहित, बिंदिया, कृतिका शर्मा, आदित्य, विनायक, अंकिता, कार्तिक, अदिति, कविन्द्र, अक्षिता, नागेश, भारती, सुनैना, हिमानी, अमित, भावना, पलक, पिंकू, चुना लोन, अक्षिता, अश्विन, नीरज, शान्तो, खेम राज, मनीषा, साधना, जानवी, नेहा, अमृता, जीतेन्द्र नेगी, बीना, तमन्ना, शिवानी, अखिल, निखिल गौतम, लतू व शेर सिंह इत्यादि उपस्थित रहे ।
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