धरणी ने आपात सहायता सीमा 5 लाख करने के प्रस्ताव का किया स्वागत एमडब्ल्यूबी अध्यक्ष चंद्रशेखर धरणी बोले, मुख्यमंत्री का निर्णय सराहनीय पेंशन, कैशलेस इलाज और पारिवारिक पेंशन समेत कई मांगें दोहराईं प्रतिनिधिमंडल जल्द करेगा मुख्यमंत्री से मुलाकात
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शिमला/चंडीगढ़ , 02 मार्च [ विशाल सूद ] ! हरियाणा सरकार द्वारा बजट 2026-27 में पत्रकारों के हित में की गई घोषणा का मीडिया जगत में स्वागत हुआ है। मीडिया वेलबीइंग एसोसिएशन (एमडब्ल्यूबीए) के अध्यक्ष चंद्रशेखर धरणी ने मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा ‘हरियाणा मीडिया पर्सनेल वेलफेयर फंड एडमिनिस्ट्रेशन स्कीम’ के तहत आपात स्थितियों में मीडियाकर्मियों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता की अधिकतम सीमा 2.50 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने के प्रस्ताव का स्वागत किया है। धरणी ने कहा कि आपदा अथवा आकस्मिक परिस्थितियों में यह बढ़ी हुई राशि पत्रकारों के लिए संबल साबित होगी। उन्होंने बताया कि एसोसिएशन का एक प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही मुख्यमंत्री से मिलकर उनका आभार व्यक्त करेगा। धरणी ने बताया कि एमडब्ल्यूबीए का गठन कोरोना काल में हुआ था। उस समय पत्रकारों की आर्थिक सुरक्षा को लेकर कई मुद्दे उठाए गए थे। तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को भी आर्थिक सहायता बढ़ाने संबंधी ज्ञापन सौंपा गया था। इसके अलावा संगठन द्वारा मंत्री अनिल विज, पूर्व शिक्षा मंत्री कंवर पाल गुर्जर, तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता, मंत्री विपुल गोयल, कृष्ण लाल पंवार, कृष्ण बेदी, श्रुति चौधरी तथा रणबीर गंगवा सहित कई जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपे गए थे। धरणी ने कहा कि संगठन के निरंतर प्रयासों से पहले भी पत्रकारों के हित में महत्वपूर्ण फैसले हुए हैं। पत्रकार पेंशन को 10 हजार से बढ़ाकर 15 हजार रुपये प्रतिमाह करवाने में संगठन ने सक्रिय भूमिका निभाई थी। इसके लिए मुख्यमंत्री आवास पर तत्कालीन सीएम मनोहर लाल का आभार भी जताया गया था। इसके अलावा पत्रकारों के विरुद्ध मामला दर्ज होने पर सुविधाएं बंद करने संबंधी अधिसूचना को निरस्त करवाने में भी एमडब्ल्यूबीए की अहम भूमिका रही। हाल ही में मुख्यमंत्री आवास, चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को सौंपे गए ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गई हैं। इनमें सेवानिवृत्त पत्रकारों को न्यूनतम 30 हजार रुपये मासिक पेंशन देने, पेंशन नियमों को सरल और पारदर्शी बनाने तथा पांच वर्ष की अनिवार्य मान्यता (एक्रीडिटेशन) की शर्त समाप्त करने की मांग प्रमुख है। संगठन ने न्यूनतम 15 वर्ष की सक्रिय पत्रकारिता पूर्ण करने वालों को पेंशन का अधिकार देने और न्यूनतम आयु सीमा 58 वर्ष निर्धारित करने की भी अपील की है। इसके अतिरिक्त पत्रकारों और उनके परिवारों को 10 लाख रुपये तक वार्षिक कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने, पेंशनधारी पत्रकार की मृत्यु पर पारिवारिक पेंशन लागू करने तथा सरकारी बसों में दो सीटें आरक्षित करने की मांग भी की गई है। निजी बसों में पुलिस कर्मियों की तर्ज पर निशुल्क यात्रा की सुविधा देने की अपील की गई है। पत्रकारों के लिए विशेष आवासीय योजनाएं तथा उनके बच्चों को शिक्षा संस्थानों व सरकारी नौकरियों में 3 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग भी रखी है। धरणी ने कहा कि संगठन ने कैंसर और किडनी ट्रांसप्लांट जैसे गंभीर मामलों में भी पत्रकारों की सहायता की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार पत्रकार समुदाय की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेकर हरियाणा की पत्रकारिता को नई दिशा देगी।
शिमला/चंडीगढ़ , 02 मार्च [ विशाल सूद ] ! हरियाणा सरकार द्वारा बजट 2026-27 में पत्रकारों के हित में की गई घोषणा का मीडिया जगत में स्वागत हुआ है। मीडिया वेलबीइंग एसोसिएशन (एमडब्ल्यूबीए) के अध्यक्ष चंद्रशेखर धरणी ने मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा ‘हरियाणा मीडिया पर्सनेल वेलफेयर फंड एडमिनिस्ट्रेशन स्कीम’ के तहत आपात स्थितियों में मीडियाकर्मियों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता की अधिकतम सीमा 2.50 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने के प्रस्ताव का स्वागत किया है।
धरणी ने कहा कि आपदा अथवा आकस्मिक परिस्थितियों में यह बढ़ी हुई राशि पत्रकारों के लिए संबल साबित होगी। उन्होंने बताया कि एसोसिएशन का एक प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही मुख्यमंत्री से मिलकर उनका आभार व्यक्त करेगा।
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धरणी ने बताया कि एमडब्ल्यूबीए का गठन कोरोना काल में हुआ था। उस समय पत्रकारों की आर्थिक सुरक्षा को लेकर कई मुद्दे उठाए गए थे। तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को भी आर्थिक सहायता बढ़ाने संबंधी ज्ञापन सौंपा गया था। इसके अलावा संगठन द्वारा मंत्री अनिल विज, पूर्व शिक्षा मंत्री कंवर पाल गुर्जर, तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता, मंत्री विपुल गोयल, कृष्ण लाल पंवार, कृष्ण बेदी, श्रुति चौधरी तथा रणबीर गंगवा सहित कई जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपे गए थे।
धरणी ने कहा कि संगठन के निरंतर प्रयासों से पहले भी पत्रकारों के हित में महत्वपूर्ण फैसले हुए हैं। पत्रकार पेंशन को 10 हजार से बढ़ाकर 15 हजार रुपये प्रतिमाह करवाने में संगठन ने सक्रिय भूमिका निभाई थी। इसके लिए मुख्यमंत्री आवास पर तत्कालीन सीएम मनोहर लाल का आभार भी जताया गया था। इसके अलावा पत्रकारों के विरुद्ध मामला दर्ज होने पर सुविधाएं बंद करने संबंधी अधिसूचना को निरस्त करवाने में भी एमडब्ल्यूबीए की अहम भूमिका रही।
हाल ही में मुख्यमंत्री आवास, चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को सौंपे गए ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गई हैं। इनमें सेवानिवृत्त पत्रकारों को न्यूनतम 30 हजार रुपये मासिक पेंशन देने, पेंशन नियमों को सरल और पारदर्शी बनाने तथा पांच वर्ष की अनिवार्य मान्यता (एक्रीडिटेशन) की शर्त समाप्त करने की मांग प्रमुख है। संगठन ने न्यूनतम 15 वर्ष की सक्रिय पत्रकारिता पूर्ण करने वालों को पेंशन का अधिकार देने और न्यूनतम आयु सीमा 58 वर्ष निर्धारित करने की भी अपील की है।
इसके अतिरिक्त पत्रकारों और उनके परिवारों को 10 लाख रुपये तक वार्षिक कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने, पेंशनधारी पत्रकार की मृत्यु पर पारिवारिक पेंशन लागू करने तथा सरकारी बसों में दो सीटें आरक्षित करने की मांग भी की गई है। निजी बसों में पुलिस कर्मियों की तर्ज पर निशुल्क यात्रा की सुविधा देने की अपील की गई है।
पत्रकारों के लिए विशेष आवासीय योजनाएं तथा उनके बच्चों को शिक्षा संस्थानों व सरकारी नौकरियों में 3 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग भी रखी है। धरणी ने कहा कि संगठन ने कैंसर और किडनी ट्रांसप्लांट जैसे गंभीर मामलों में भी पत्रकारों की सहायता की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार पत्रकार समुदाय की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेकर हरियाणा की पत्रकारिता को नई दिशा देगी।
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