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शिमला , 11 मार्च [ विशाल सूद ] ! डाॅ. सिकंदर कुमार, राज्यसभा सांसद एवं प्रदेश महामंत्री भाजपा ने आज सदन में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री से पूछा कि क्या वर्तमान केंद्रीय बजट में प्रस्तावित क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्रों से विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश को लाभ होगा, तथा क्या इससे राज्य द्वारा विशिष्ट क्षेत्रों में चिकित्सा पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए की जा रही पहल को सहयोग प्राप्त होगा ? क्या मंत्रालय हिमाचल प्रदेश के कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में उच्च शिशु मृत्यु दर से निपटने हेतु विशेषीकृत, अत्याधुनिक उन्नत बाल चिकित्सा देखभाल और नवाचार केंद्र स्थापित करने की येाजना बना रहा है और मंत्रालय द्वारा हिमाचल प्रदेश में चिकित्सा उपकरण पार्कों की स्थापना को शीघ्रता से पूर्ण करने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं, जो राज्य में चिकित्सा उपकरणों की लागत को कम करने के लिए महत्वपूर्ण हैं ? डाॅ. सिकंदर के प्रश्नों का उत्तर देते हुए केेंद्रीय स्वाथ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने सदन को बताया कि भारत को चिकित्सा पर्यटन सेवाओं के केंद्र के रूप में बढ़ावा देने के लिए, भारत सरकार ने केंद्रीय बजट 2026-27 में निजी क्षेत्र की साझेदारी में पांच क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्र स्थापित करने में राज्यों को सहायता प्रदान करने की येाजना प्रस्तावित की है। ये केंद्र एकीकृत स्वास्थ्य परिचर्चा सेवा परिसर के रूप में कार्य करेंगे जिनमें चिकित्सा, शिक्षा और अनुसंधान सुविधा केंद्र होंगे। इनमें आयुष केंद्र, महत्वपूर्ण चिकित्सा पर्यटन सुविधा केंद्र और निदान, उपचार पश्चात परिचर्या और पुनर्वास के लिए बुनियादी ढांचा होगा। केन्द्रीय राज्य मंत्री ने बताया कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है और स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की होती है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय संबंधित राज्यों द्वारा प्रस्तुत वार्षिक कार्यक्रम कार्यान्वयन योजना के आधार पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत प्रजनन, मातृ, नवजात, बाल, किशोर स्वास्थ्य एवं पोषण कार्यनीति के कार्यान्वयन में सहायत करता है। उन्होनें कहा कि मेडिकल डिवाइस पार्क के प्रोन्नयन हेतु इस योजना का उदेश्य संसाधनों के अनुकूलन और मितव्ययता के माध्यम से प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और लागत कम करने के लिए साझा बुनियादी ढांचा और परीक्षण सुविधाएं तैयार करना है जिससे घरेलू बाजार में चिकित्सा उपकरणों की बेहतर उपलब्धता और सामथ्र्य सुनिश्चित हो सके। इस योजना के तहत, भारत सरकार ने उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश की राज्य सरकारों से प्राप्त प्रस्तावों को मंजूदी दी थी। हालांकि, हिमाचल प्रदेश सरकार ने बाद में यह कहते हुए योजना से बाहर हो गई कि वह परियोजना का वित्तपोषण अपने संसाधनों से करेगी।
शिमला , 11 मार्च [ विशाल सूद ] ! डाॅ. सिकंदर कुमार, राज्यसभा सांसद एवं प्रदेश महामंत्री भाजपा ने आज सदन में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री से पूछा कि क्या वर्तमान केंद्रीय बजट में प्रस्तावित क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्रों से विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश को लाभ होगा, तथा क्या इससे राज्य द्वारा विशिष्ट क्षेत्रों में चिकित्सा पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए की जा रही पहल को सहयोग प्राप्त होगा ?
क्या मंत्रालय हिमाचल प्रदेश के कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में उच्च शिशु मृत्यु दर से निपटने हेतु विशेषीकृत, अत्याधुनिक उन्नत बाल चिकित्सा देखभाल और नवाचार केंद्र स्थापित करने की येाजना बना रहा है और मंत्रालय द्वारा हिमाचल प्रदेश में चिकित्सा उपकरण पार्कों की स्थापना को शीघ्रता से पूर्ण करने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं, जो राज्य में चिकित्सा उपकरणों की लागत को कम करने के लिए महत्वपूर्ण हैं ?
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डाॅ. सिकंदर के प्रश्नों का उत्तर देते हुए केेंद्रीय स्वाथ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने सदन को बताया कि भारत को चिकित्सा पर्यटन सेवाओं के केंद्र के रूप में बढ़ावा देने के लिए, भारत सरकार ने केंद्रीय बजट 2026-27 में निजी क्षेत्र की साझेदारी में पांच क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्र स्थापित करने में राज्यों को सहायता प्रदान करने की येाजना प्रस्तावित की है। ये केंद्र एकीकृत स्वास्थ्य परिचर्चा सेवा परिसर के रूप में कार्य करेंगे जिनमें चिकित्सा, शिक्षा और अनुसंधान सुविधा केंद्र होंगे। इनमें आयुष केंद्र, महत्वपूर्ण चिकित्सा पर्यटन सुविधा केंद्र और निदान, उपचार पश्चात परिचर्या और पुनर्वास के लिए बुनियादी ढांचा होगा।
केन्द्रीय राज्य मंत्री ने बताया कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है और स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की होती है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय संबंधित राज्यों द्वारा प्रस्तुत वार्षिक कार्यक्रम कार्यान्वयन योजना के आधार पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत प्रजनन, मातृ, नवजात, बाल, किशोर स्वास्थ्य एवं पोषण कार्यनीति के कार्यान्वयन में सहायत करता है।
उन्होनें कहा कि मेडिकल डिवाइस पार्क के प्रोन्नयन हेतु इस योजना का उदेश्य संसाधनों के अनुकूलन और मितव्ययता के माध्यम से प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और लागत कम करने के लिए साझा बुनियादी ढांचा और परीक्षण सुविधाएं तैयार करना है जिससे घरेलू बाजार में चिकित्सा उपकरणों की बेहतर उपलब्धता और सामथ्र्य सुनिश्चित हो सके। इस योजना के तहत, भारत सरकार ने उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश की राज्य सरकारों से प्राप्त प्रस्तावों को मंजूदी दी थी। हालांकि, हिमाचल प्रदेश सरकार ने बाद में यह कहते हुए योजना से बाहर हो गई कि वह परियोजना का वित्तपोषण अपने संसाधनों से करेगी।
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