सेब आयात ड्यूटी घटाने पर भड़के बागवान, केंद्र के फैसले से हिमाचल को बड़ा नुकसान: जगत नेगी नॉर्थ ईस्ट के सेब उत्पादक राज्यों पर भी पड़ेगा असर,
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शिमला , 13 जनवरी [ विशाल सूद ] ! हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार की कैबिनेट मंत्रियों के बीच गुटबाज़ी एक बार फिर ज़ाहिर हो गई है। हिमाचल प्रदेश सरकार में बाग़वानी मंत्री जगत सिंह ने लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के बयान को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि वे विक्रमादित्य सिंह के बयान से इत्तेफ़ाक़ नहीं रखते। नेगी ने कहा कि कई ऐसे अधिकारी हैं, जो बाहरी राज्यों से हैं और अच्छा काम कर रहे हैं। ऐसे बयानों से अधिकारी हतोत्साहित होते हैं। बाग़वानी मंत्री ने कहा कि विक्रमादित्य सिंह को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे किस अधिकारी की बात कर रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के बागवानी मंत्री जगत नेगी ने बागवानों से जुड़े विभिन्न ज्वलंत मुद्दों को लेकर एक अहम बैठक की। इस बैठक में प्रदेश की विभिन्न बागवानी एवं किसान संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायकों को भी बैठक में आमंत्रित किया गया था, लेकिन वे शामिल नहीं हुए। बैठक में केंद्र सरकार की नीतियों, खासकर सेब आयात से जुड़े फैसलों पर गहन चर्चा की गई। जगत नेगी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा न्यूज़ीलैंड से आयात होने वाले सेब पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाने का फैसला हिमाचल प्रदेश के बागवानों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने बताया कि अगस्त से सितंबर के बीच हिमाचल का सेब पीक सीजन में होता है। इसी दौरान कोल्ड स्टोरेज से हिमाचल का सेब देश की प्रमुख मंडियों में पहुंचता है। यदि इसी समय न्यूज़ीलैंड का सेब भी बाजार में उतरेगा तो इससे दाम गिरेंगे और स्थानीय बागवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। बागवानी मंत्री ने कहा कि आयात ड्यूटी में कटौती का असर केवल हिमाचल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नॉर्थ ईस्ट के सेब उत्पादक राज्यों पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा। इसी मुद्दे को लेकर आज अलग-अलग संगठनों के साथ बैठक की गई। मंत्री जगत नेगी ने बताया कि केंद्र सरकार की मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS) के तहत इस सीजन में 98 हजार मीट्रिक टन सेब खरीदा गया। उन्होंने कहा कि इस योजना में पहले केंद्र सरकार द्वारा सेब खरीद की भरपाई की जाती थी, लेकिन इस बार केंद्र ने MIS के तहत कोई राशि जारी नहीं की, जिससे राज्य सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा। बागवानी मंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की गलत व्यापार और आयात नीतियों का सीधा नुकसान हिमाचल प्रदेश के बागवानों को उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार के मंत्रियों से मुलाकात करेंगे और न्यूज़ीलैंड के साथ सेब आयात से जुड़े समझौते को रद्द करने की मांग करेंगे। जगत नेगी ने कहा कि यदि 1 डॉलर 25 सेंट की दर से सेब आयात किया गया तो इससे हिमाचल के बागवानों की लागत और बाजार मूल्य दोनों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। मंत्री जगत नेगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2014 के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय सेब पर 100 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी लगाने का वादा किया गया था, लेकिन मौजूदा स्थिति इसके ठीक उलट है और इंपोर्ट ड्यूटी लगातार घटाई जा रही है। बागवानी मंत्री ने कहा कि बागवानों से जुड़े इस अहम मुद्दे पर विपक्ष के विधायकों को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन उनके न आने से यह साफ होता है कि विपक्ष इस गंभीर विषय को लेकर गंभीर नहीं है। बैठक में यह भी तय किया गया कि बागवानों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाएगा।
शिमला , 13 जनवरी [ विशाल सूद ] ! हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार की कैबिनेट मंत्रियों के बीच गुटबाज़ी एक बार फिर ज़ाहिर हो गई है। हिमाचल प्रदेश सरकार में बाग़वानी मंत्री जगत सिंह ने लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के बयान को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि वे विक्रमादित्य सिंह के बयान से इत्तेफ़ाक़ नहीं रखते।
नेगी ने कहा कि कई ऐसे अधिकारी हैं, जो बाहरी राज्यों से हैं और अच्छा काम कर रहे हैं। ऐसे बयानों से अधिकारी हतोत्साहित होते हैं। बाग़वानी मंत्री ने कहा कि विक्रमादित्य सिंह को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे किस अधिकारी की बात कर रहे हैं।
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हिमाचल प्रदेश के बागवानी मंत्री जगत नेगी ने बागवानों से जुड़े विभिन्न ज्वलंत मुद्दों को लेकर एक अहम बैठक की। इस बैठक में प्रदेश की विभिन्न बागवानी एवं किसान संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायकों को भी बैठक में आमंत्रित किया गया था, लेकिन वे शामिल नहीं हुए।
बैठक में केंद्र सरकार की नीतियों, खासकर सेब आयात से जुड़े फैसलों पर गहन चर्चा की गई। जगत नेगी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा न्यूज़ीलैंड से आयात होने वाले सेब पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाने का फैसला हिमाचल प्रदेश के बागवानों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने बताया कि अगस्त से सितंबर के बीच हिमाचल का सेब पीक सीजन में होता है।
इसी दौरान कोल्ड स्टोरेज से हिमाचल का सेब देश की प्रमुख मंडियों में पहुंचता है। यदि इसी समय न्यूज़ीलैंड का सेब भी बाजार में उतरेगा तो इससे दाम गिरेंगे और स्थानीय बागवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। बागवानी मंत्री ने कहा कि आयात ड्यूटी में कटौती का असर केवल हिमाचल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नॉर्थ ईस्ट के सेब उत्पादक राज्यों पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा। इसी मुद्दे को लेकर आज अलग-अलग संगठनों के साथ बैठक की गई।
मंत्री जगत नेगी ने बताया कि केंद्र सरकार की मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS) के तहत इस सीजन में 98 हजार मीट्रिक टन सेब खरीदा गया। उन्होंने कहा कि इस योजना में पहले केंद्र सरकार द्वारा सेब खरीद की भरपाई की जाती थी, लेकिन इस बार केंद्र ने MIS के तहत कोई राशि जारी नहीं की, जिससे राज्य सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा। बागवानी मंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की गलत व्यापार और आयात नीतियों का सीधा नुकसान हिमाचल प्रदेश के बागवानों को उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार के मंत्रियों से मुलाकात करेंगे और न्यूज़ीलैंड के साथ सेब आयात से जुड़े समझौते को रद्द करने की मांग करेंगे। जगत नेगी ने कहा कि यदि 1 डॉलर 25 सेंट की दर से सेब आयात किया गया तो इससे हिमाचल के बागवानों की लागत और बाजार मूल्य दोनों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
मंत्री जगत नेगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2014 के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय सेब पर 100 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी लगाने का वादा किया गया था, लेकिन मौजूदा स्थिति इसके ठीक उलट है और इंपोर्ट ड्यूटी लगातार घटाई जा रही है।
बागवानी मंत्री ने कहा कि बागवानों से जुड़े इस अहम मुद्दे पर विपक्ष के विधायकों को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन उनके न आने से यह साफ होता है कि विपक्ष इस गंभीर विषय को लेकर गंभीर नहीं है। बैठक में यह भी तय किया गया कि बागवानों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाएगा।
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