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शिमला , 19 फरवरी [ विशाल सूद ] ! शिमला के कसुम्पटी स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के डीजीएम कार्यालय के बाहर आज सीटू से संबंधित एसबीआई कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन ने बैंक प्रबंधन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। यूनियन ने अनुबंध कर्मचारियों के तबादले के आदेशों को गैर-कानूनी बताते हुए तत्काल रद्द करने की मांग की। सीटू के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की विभिन्न शाखाओं में कार्यरत अनुबंध श्रमिकों के ट्रांसफर आदेश पूरी तरह से अवैध हैं। उनका कहना है कि जब मामला लेबर ऑफिस में विचाराधीन है और समझौता वार्ता चल रही है, तब श्रमिकों का तबादला करना औद्योगिक विवाद अधिनियम और ठेका मजदूर अधिनियम 1970 का खुला उल्लंघन है। उन्होंने आरोप लगाया कि हाउसकीपिंग के लिए नियुक्त कर्मचारियों से मेसेंजर, एटीएम संचालन, खाना बनाने और चाय पिलाने जैसे कई अतिरिक्त कार्य कराए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न्यूनतम वेतन तक नहीं दिया जा रहा। विजेंद्र मेहरा ने कहा कि 12 हजार रुपये के मामूली वेतन में पहाड़ी क्षेत्रों में ट्रांसफर करना कर्मचारियों को मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित करने जैसा है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2015 और 2018 में हुए लिखित समझौतों में स्पष्ट रूप से तय किया गया था कि किसी भी अनुबंध श्रमिक का तबादला नहीं किया जाएगा, लेकिन बैंक प्रबंधन अब उन समझौतों की अनदेखी कर रहा है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ट्रांसफर आदेश वापस नहीं लिए गए तो आंदोलन और उग्र रूप लेगा।
शिमला , 19 फरवरी [ विशाल सूद ] ! शिमला के कसुम्पटी स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के डीजीएम कार्यालय के बाहर आज सीटू से संबंधित एसबीआई कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन ने बैंक प्रबंधन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। यूनियन ने अनुबंध कर्मचारियों के तबादले के आदेशों को गैर-कानूनी बताते हुए तत्काल रद्द करने की मांग की।
सीटू के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की विभिन्न शाखाओं में कार्यरत अनुबंध श्रमिकों के ट्रांसफर आदेश पूरी तरह से अवैध हैं। उनका कहना है कि जब मामला लेबर ऑफिस में विचाराधीन है और समझौता वार्ता चल रही है, तब श्रमिकों का तबादला करना औद्योगिक विवाद अधिनियम और ठेका मजदूर अधिनियम 1970 का खुला उल्लंघन है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि हाउसकीपिंग के लिए नियुक्त कर्मचारियों से मेसेंजर, एटीएम संचालन, खाना बनाने और चाय पिलाने जैसे कई अतिरिक्त कार्य कराए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न्यूनतम वेतन तक नहीं दिया जा रहा। विजेंद्र मेहरा ने कहा कि 12 हजार रुपये के मामूली वेतन में पहाड़ी क्षेत्रों में ट्रांसफर करना कर्मचारियों को मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित करने जैसा है।
उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2015 और 2018 में हुए लिखित समझौतों में स्पष्ट रूप से तय किया गया था कि किसी भी अनुबंध श्रमिक का तबादला नहीं किया जाएगा, लेकिन बैंक प्रबंधन अब उन समझौतों की अनदेखी कर रहा है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ट्रांसफर आदेश वापस नहीं लिए गए तो आंदोलन और उग्र रूप लेगा।
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