- विज्ञापन (Article Top Ad) -
चम्बा ! जिला चंबा में मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना सहित समस्त कल्याणकारी योजनाओं का लाभ जिला के ग्रामीण व दूरदराज क्षेत्रों में आम जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन चंबा निरंतर प्रयासरत है इस कड़ी में उपायुक्त मुकेश रेपसवाल के निर्देशानुसार सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग चंबा द्वारा जिला में 17 दिसंबर 2025 से 16 जनवरी 2026 तक एक विशेष मुहिम के तहत मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना तथा इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना के पात्र लाभार्थियों को चिन्हित करने के लिए अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत कुल 257 नए लाभार्थियों को चिन्हित किया गया, जिसमें इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना से संबंधित 200 तथा मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना से संबंधित 57 लाभार्थी शामिल है। एक माह तक चले इस विशेष अभियान के दौरान जिला के आईसीडीएस परियोजना चुवाड़ी के अंतर्गत 57, भरमौर के अंतर्गत 8, मैहला के अंतर्गत 12, तीसा के अंतर्गत 23, पांगी के अंतर्गत 37, सलूनी के अंतर्गत 84 तथा चंबा के अंतर्गत 36 लाभार्थियों को चिन्हित किया गया है। इस संबंध में अधिक जानकारी देते हुए जिला कार्यक्रम अधिकारी कमल किशोर ने बताया कि हाल ही में गत एक माह के दौरान मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना तथा इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना के अंतर्गत चिन्हित नए 257 व्यक्तियों की दस्तावेज संबंधी औपचारिकताएं पूर्ण करने के उपरांत उन्हें शीघ्र ही स्वीकृति प्रदान करते हुए योजना में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के अंतर्गत जिला चंबा में वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 1,61,35,430 रुपए खर्च किए गए हैं जिसके तहत 522 पात्र लाभार्थियों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ दिया गया है जबकि इस अवधि में 150 लोगों को त्योहारी भता तथा वस्त्र एवं पोषण अनुदान तथा 30 व्यक्तियों को व्यवसायिक/उच्च शिक्षा के लिए अनुदान दिया गया। योजना के अंतर्गत वित्त वर्ष 25-26 के दौरान अब तक 3,10,75,393 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं जिसके अंतर्गत 474 पात्र लाभार्थियों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ दिया जा रहा है इस अवधि में 151 लाभार्थियों को त्यौहारी भत्ता, 35 को शादी के लिए अनुदान तथा 57 को गृह निर्माण के लिए सहायता राशि प्रदान की गई है।उल्लेखनीय है कि इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना का शुभारंभ वर्तमान प्रदेश सरकार द्वारा 3 सितंबर 2024 को किया गया था इस योजना का उद्देश्य विधवाओं, निराश्रित तथा तलाकशुदा महिलाओं और दिव्यांग अभिभावकों के बच्चों को शिक्षा देने के आर्थिक मदद प्रदान करना है। योजना के तहत पात्र बच्चों को 18 साल तक शिक्षा स्वास्थ्य और पोषण संबंधी जरूरतों की पूर्ति के लिए हर महीने ₹1000 का अनुदान प्रदान किया जाता है इसके अतिरिक्त 18 से 27 वर्ष की आयु के वे विद्यार्थी जो कि हिमाचल प्रदेश में स्थित सरकारी संस्थान से डिग्री डिप्लोमा या अन्य व्यवसायों में कोर्स कर रहे हैं उनको डिग्री, डिप्लोमा व अन्य व्यवसाय कोर्स के लिए अनुदान दिया जाता है, जिसमें कोर्स की फीस, हॉस्टल की फीस और मैस का शुल्क शामिल है। यदि किसी विद्यार्थी को सरकारी हॉस्टल नहीं मिलता है तो उसे 3000 रूपए की राशि प्रतिमाह दी जाती है। इस योजना के अंतर्गत केवल वही विद्यार्थी पात्र हैं जिनकी पारिवारिक आय एक लाख रुपए से अधिक न हो।इसी प्रकार मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के अंतर्गत 0-27 साल के अनाथ बच्चों को शामिल किया गया है (दोनों माता-पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र) जबकि खास स्थिति में अगर बच्चे सेमी अनाथ हैं तो बाल कल्याण समिति की रिपोर्ट पर बच्चों को त्यागा हुआ और सरेंडर किया हुआ घोषित किया जाता है, तथा उन्हें भी 27 साल की उम्र तक इस योजना के तहत शामिल किया जा सकता है। योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थी की सामाजिक सुरक्षा के लिए 0 से 27 वर्ष की आयु तक 4000 रुपये प्रतिमाह सहायता राशि दी जाती है। लाभार्थी को शादी के समय 2 लाख रुपये का विवाह अनुदान भी दिया जाता है। यही नहीं उसे घर बनाने के लिए भी 3 लाख रुपये का अनुदान चार किस्तों में दिया जाता है। यदि लाभार्थी हिमाचल प्रदेश राज्य के किसी सरकारी या सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थान से उच्च/व्यावसायिक शिक्षा ग्रहण कर रहा है वास्तविक आधार पर पढ़ाई पर होने वाला खर्चा भी राज्य सरकार द्वारा दिया जाता है ।इसके अलावा बाल देखभाल संस्थानों के बच्चों को भी मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत कवर किया गया है जिसमें सामाजिक सुरक्षा 1000 रुपए (14 वर्ष की आयु तक) और 2500 रुपए (18 वर्ष की आयु तक) प्रति माह के साथ-साथ त्योहारी भत्ता 500 रूपए भी प्रदान किया जा रहा है। https://we.tl/t-gZN6Eo0Dab
- विज्ञापन (Article Inline Ad) -
- विज्ञापन (Article Bottom Ad) -
- विज्ञापन (Sidebar Ad 1) -
- विज्ञापन (Sidebar Ad 2) -
- विज्ञापन (Sidebar Ad 3) -
- विज्ञापन (Sidebar Ad 4) -