5 वर्षों से नहीं ली किसी ने पर्स की सुध ,अब मोक्ष धाम सोंदर्यकरण कार्यों में देने का लिया फैसला
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सिरमौर , 12 मार्च [ विशाल सूद ] ! ईमानदारी आज भी जीवित है और इसका एक उदाहरण देखने को मिलता है सिरमौर जिला मुख्यालय नाहन के मुख्य बाजार में। बाजार में कक्क्ड़ की दुकान जोकि क्राफ्ट्स के सामान की एक प्रसिद्ध दुकान मानी जाती है और यहां पर हमेशा भीड़ लगी रहती है और नाहन सहित अनेक ग्रामीण क्षेत्रों से भी लोग यहां पहुंचते हैं। इस दुकान में कई वर्षों से एक पर्स टंगा मिलता है। मालिक सुनील कक्क्ड़ ने बतायाकि लगभग पांच वर्ष पूर्व कोई ग्राहक यहां यह पर्स भूल गया और फिर लेने नहीं आया है। उन्होंने तभी से इसे दुकान में टांग कर रखा है ताकि यदि असली मालिक यहां आये और अपनी अमानत सही पहचान बताकर ले जाये। दुकानदार सुनील ने बतायाकि कोई लगभग पांच वर्ष पूर्व कोई ग्राहक यह पर्स दुकान में भूल गया और आजतक लेने नहीं आया है। इसके अंदर नकद राशि व् सोने का कोई जेवर भी है। असली मालिक राशि बताकर व् जेवर का विवरण बताकर ले जा सकता है। लेकिन अभीतक कोई नहीं आया है। उन्होंने इसे दुकान में टांग कर रखा था ताकि यदि असली मालिक आये तो इसे पहचान ले। अब उनका निर्णय है कि इस पर्स की राशि व् जेवर को बेचकर इसकी राशि नाहन के मोक्ष धाम में चल रहे सोंदर्यकरण कार्यों की समिति को दे दी जाये। उल्लेखनीय हैकि सुनील ने पिछले इतने वर्षों से किसी की अमानत को संभालकर रखकर एक ईमानदारी की मिसाल पेश की है।
सिरमौर , 12 मार्च [ विशाल सूद ] ! ईमानदारी आज भी जीवित है और इसका एक उदाहरण देखने को मिलता है सिरमौर जिला मुख्यालय नाहन के मुख्य बाजार में। बाजार में कक्क्ड़ की दुकान जोकि क्राफ्ट्स के सामान की एक प्रसिद्ध दुकान मानी जाती है और यहां पर हमेशा भीड़ लगी रहती है और नाहन सहित अनेक ग्रामीण क्षेत्रों से भी लोग यहां पहुंचते हैं।
इस दुकान में कई वर्षों से एक पर्स टंगा मिलता है। मालिक सुनील कक्क्ड़ ने बतायाकि लगभग पांच वर्ष पूर्व कोई ग्राहक यहां यह पर्स भूल गया और फिर लेने नहीं आया है। उन्होंने तभी से इसे दुकान में टांग कर रखा है ताकि यदि असली मालिक यहां आये और अपनी अमानत सही पहचान बताकर ले जाये।
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दुकानदार सुनील ने बतायाकि कोई लगभग पांच वर्ष पूर्व कोई ग्राहक यह पर्स दुकान में भूल गया और आजतक लेने नहीं आया है। इसके अंदर नकद राशि व् सोने का कोई जेवर भी है। असली मालिक राशि बताकर व् जेवर का विवरण बताकर ले जा सकता है। लेकिन अभीतक कोई नहीं आया है। उन्होंने इसे दुकान में टांग कर रखा था ताकि यदि असली मालिक आये तो इसे पहचान ले।
अब उनका निर्णय है कि इस पर्स की राशि व् जेवर को बेचकर इसकी राशि नाहन के मोक्ष धाम में चल रहे सोंदर्यकरण कार्यों की समिति को दे दी जाये। उल्लेखनीय हैकि सुनील ने पिछले इतने वर्षों से किसी की अमानत को संभालकर रखकर एक ईमानदारी की मिसाल पेश की है।
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