मॉडल पीएचसी जंगल वेरी में अंतरराष्ट्रीय महिला शोषण उन्मूलन दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
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हमीरपुर , 25व्नोबर [ बिंदिया ठाकुर ] ! मॉडल पीएचसी जंगल वेरी में मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय महिला शोषण उन्मूलन दिवस पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. सुरेंद्र सिंह डोगरा ने की, जबकि फीमेल हेल्थ सुपरवाइजर श्रीमती रविंद्र, कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर हिंदू धीमान और फार्मासिस्ट ऑफिसर सुरेंद्र भरवाल विशेष रूप से उपस्थित रहे। डॉ. डोगरा ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि महिलाओं के विरुद्ध किसी भी रूप में हिंसा—चाहे वह शारीरिक हो, मानसिक हो, यौन हो या भावनात्मक—पूरी मानवता पर कलंक है। उन्होंने बताया कि किसी भी तरह की धमकी, जबरदस्ती या स्वतंत्रता पर रोक लगाना भी हिंसा की श्रेणी में आता है और यह पूरी तरह दंडनीय अपराध है। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति प्रकृति का मूल स्रोत है, और महिलाओं के सम्मान तथा सुरक्षा की जिम्मेदारी समाज के हर व्यक्ति की है। उन्होंने यह भी बताया कि हिंसा के चार मुख्य प्रकार—शारीरिक, यौन, मनोवैज्ञानिक और वंचना—महिलाओं के जीवन को गहराई से प्रभावित करते हैं। इसलिए आवश्यक है कि समाज, परिवार और संस्थाएँ मिलकर जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाने में योगदान दें। डॉ. सुरेंद्र सिंह डोगरा ने जोर देकर कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों की शिक्षा सभी को मिलनी चाहिए। पीड़िता के करीब काम करने वाले पेशेवरों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। शिक्षा प्रणाली में लैंगिक समानता और सम्मान आधारित संबंधों की समझ को बढ़ावा देना जरूरी है।घरेलू हिंसा और यौन अपराधों के आरोपियों के लिए पुनर्वास और उपचार कार्यक्रम भी आवश्यक हैं। कार्यक्रम के अंत में यह सामूहिक संदेश दिया गया कि एक सुरक्षित, सम्मानित और सशक्त महिला ही समृद्ध समाज की नींव रखती है। हम सब मिलकर ऐसा वातावरण बनाएं जहाँ हर महिला निर्भय और सम्मानपूर्वक अपना जीवन जी सके।
हमीरपुर , 25व्नोबर [ बिंदिया ठाकुर ] ! मॉडल पीएचसी जंगल वेरी में मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय महिला शोषण उन्मूलन दिवस पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. सुरेंद्र सिंह डोगरा ने की, जबकि फीमेल हेल्थ सुपरवाइजर श्रीमती रविंद्र, कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर हिंदू धीमान और फार्मासिस्ट ऑफिसर सुरेंद्र भरवाल विशेष रूप से उपस्थित रहे।
डॉ. डोगरा ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि महिलाओं के विरुद्ध किसी भी रूप में हिंसा—चाहे वह शारीरिक हो, मानसिक हो, यौन हो या भावनात्मक—पूरी मानवता पर कलंक है। उन्होंने बताया कि किसी भी तरह की धमकी, जबरदस्ती या स्वतंत्रता पर रोक लगाना भी हिंसा की श्रेणी में आता है और यह पूरी तरह दंडनीय अपराध है।
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उन्होंने कहा कि मातृशक्ति प्रकृति का मूल स्रोत है, और महिलाओं के सम्मान तथा सुरक्षा की जिम्मेदारी समाज के हर व्यक्ति की है। उन्होंने यह भी बताया कि हिंसा के चार मुख्य प्रकार—शारीरिक, यौन, मनोवैज्ञानिक और वंचना—महिलाओं के जीवन को गहराई से प्रभावित करते हैं। इसलिए आवश्यक है कि समाज, परिवार और संस्थाएँ मिलकर जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाने में योगदान दें।
डॉ. सुरेंद्र सिंह डोगरा ने जोर देकर कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों की शिक्षा सभी को मिलनी चाहिए। पीड़िता के करीब काम करने वाले पेशेवरों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। शिक्षा प्रणाली में लैंगिक समानता और सम्मान आधारित संबंधों की समझ को बढ़ावा देना जरूरी है।घरेलू हिंसा और यौन अपराधों के आरोपियों के लिए पुनर्वास और उपचार कार्यक्रम भी आवश्यक हैं।
कार्यक्रम के अंत में यह सामूहिक संदेश दिया गया कि एक सुरक्षित, सम्मानित और सशक्त महिला ही समृद्ध समाज की नींव रखती है। हम सब मिलकर ऐसा वातावरण बनाएं जहाँ हर महिला निर्भय और सम्मानपूर्वक अपना जीवन जी सके।
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