सीएम बोले- 1100 करोड़ नहीं, 100 करोड़ का संभावित घोटाला
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शिमला , 27 मार्च [ विशाल सूद ] ! हिमाचल प्रदेश में हिमकेयर योजना को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने आज अपनी गलती सुधारने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पहले सदन में 1100 करोड़ के घोटाले की बात कही। अब वे इसे 100 करोड़ रुपए का घोटाला बता रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष ने इस पूरे मामले की जांच हाईकोर्ट के सिटिंग जज से करवाने की मांग की है। जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमकेयर योजना को आयुष्मान भारत के पैटर्न पर लागू किया गया था, ताकि आयुष्मान भारत से बाहर रह गए लोगों को भी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि पहले लोग बीमारी के समय जमीन गिरवी रखने और रिश्तेदारों से उधार लेने को मजबूर होते थे, लेकिन इस योजना ने गरीब परिवारों को बड़ी राहत दी।उन्होंने आरोप लगाया कि योजना को बंद करने से पहले इसे बदनाम करने की कोशिश की जा रही है और मनगढ़ंत आरोप लगाकर जनता को गुमराह किया जा रहा है। जयराम ठाकुर ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि हिमकेयर योजना पर करीब 972 करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि इसका अनुमानित वार्षिक खर्च लगभग 200 करोड़ रुपये था। उनके अनुसार, तीन वर्षों में करीब 600 करोड़ रुपये खर्च होना चाहिए था। उन्होंने सवाल उठाया कि दवाइयों की ऊंचे दामों पर खरीद के कारण खर्च बढ़ा है और पूरे मामले की जांच होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि इस मामले की जांच किसी सिटिंग हाईकोर्ट जज की निगरानी में करवाई जाए और ऑडिट केवल पूर्व सरकार का ही नहीं, बल्कि वर्तमान सरकार के तीन वर्षों का भी किया जाए। जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष को प्रश्नकाल में अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री राजनीतिक कारणों से योजना को बंद करना चाहते हैं, जिससे गरीब और जरूरतमंद लोगों को नुकसान हो रहा है।
शिमला , 27 मार्च [ विशाल सूद ] ! हिमाचल प्रदेश में हिमकेयर योजना को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने आज अपनी गलती सुधारने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पहले सदन में 1100 करोड़ के घोटाले की बात कही। अब वे इसे 100 करोड़ रुपए का घोटाला बता रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष ने इस पूरे मामले की जांच हाईकोर्ट के सिटिंग जज से करवाने की मांग की है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमकेयर योजना को आयुष्मान भारत के पैटर्न पर लागू किया गया था, ताकि आयुष्मान भारत से बाहर रह गए लोगों को भी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि पहले लोग बीमारी के समय जमीन गिरवी रखने और रिश्तेदारों से उधार लेने को मजबूर होते थे, लेकिन इस योजना ने गरीब परिवारों को बड़ी राहत दी।उन्होंने आरोप लगाया कि योजना को बंद करने से पहले इसे बदनाम करने की कोशिश की जा रही है और मनगढ़ंत आरोप लगाकर जनता को गुमराह किया जा रहा है।
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जयराम ठाकुर ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि हिमकेयर योजना पर करीब 972 करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि इसका अनुमानित वार्षिक खर्च लगभग 200 करोड़ रुपये था। उनके अनुसार, तीन वर्षों में करीब 600 करोड़ रुपये खर्च होना चाहिए था। उन्होंने सवाल उठाया कि दवाइयों की ऊंचे दामों पर खरीद के कारण खर्च बढ़ा है और पूरे मामले की जांच होनी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि इस मामले की जांच किसी सिटिंग हाईकोर्ट जज की निगरानी में करवाई जाए और ऑडिट केवल पूर्व सरकार का ही नहीं, बल्कि वर्तमान सरकार के तीन वर्षों का भी किया जाए। जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष को प्रश्नकाल में अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री राजनीतिक कारणों से योजना को बंद करना चाहते हैं, जिससे गरीब और जरूरतमंद लोगों को नुकसान हो रहा है।
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