स्थानीय लोगों का विरोध, जमीन देने से इनकार, मंत्री विक्रमादित्य सिंह से मिला प्रतिनिधिमंडल,
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शिमला , 31 दिसंबर [ विशाल सूद ] ! शहर में लगातार बढ़ती आबादी, ट्रैफिक और सरकारी दफ्तरों के दबाव को कम करने के लिए प्रदेश सरकार शिमला से बाहर एक नई सैटेलाइट माउंटेन टाउनशिप बसाने की योजना पर काम कर रही है। प्रस्तावित टाउनशिप शिमला ग्रामीण क्षेत्र के जाठिया देवी इलाके में विकसित की जानी है। इसी मुद्दे को लेकर जाठिया देवी के स्थानीय लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह से मिला और अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि किसी भी तरह का फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया जाएगा और सभी पहलुओं पर गहराई से विचार किया जाएगा। इस संबंध में कैबिनेट मंत्री और शिमला के विधायक विक्रमादित्य सिंह ने सरकार का पक्ष स्पष्ट किया है। विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि शिमला शहर अत्यधिक कंजेस्टेड हो चुका है। राजधानी होने के कारण यहां अधिकांश सरकारी कार्यालय और कमर्शियल गतिविधियां केंद्रित हैं, जिससे यातायात और जनसंख्या का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसी दबाव को कम करने के उद्देश्य से शिमला से बाहर नया शहर बसाने का प्रस्ताव वर्षों से विचाराधीन है, जिस पर पिछली सरकारों के समय से काम चलता आ रहा है। उन्होंने बताया कि जाठिया देवी में प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप के लिए केंद्र सरकार को “हिल टाउनशिप” के नाम से प्रस्ताव भेजा गया है, हालांकि अभी तक इसकी औपचारिक मंजूरी नहीं मिली है। इसके बावजूद राज्य सरकार लैंड पूलिंग मॉडल के तहत हिमुडा के माध्यम से विकास की संभावनाओं पर विचार कर रही है। मंत्री के अनुसार हिमुडा के पास पहले से ही लगभग 282 बीघा भूमि उपलब्ध है, जिसे पहले चरण में विकसित किया जाएगा। विक्रमादित्य सिंह ने साफ कहा कि स्थानीय लोगों की भावनाओं का सम्मान करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि जाठिया देवी के कुछ लोग हाल ही में उनसे मिले और अपनी आपत्तियां रखीं। इस पूरे मुद्दे पर जल्द ही एक जनरल हाउस मीटिंग आयोजित की जाएगी, जिसमें वे स्वयं शामिल होंगे। मंत्री ने आश्वासन दिया कि पहले से अधिग्रहित भूमि पर ही कार्रवाई की जाएगी और रिहायशी क्षेत्रों, शमलात भूमि या किसानों की उपजाऊ जमीन पर स्थानीय सहमति के बिना कोई कदम नहीं उठाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जाठिया देवी क्षेत्र कृषि और फ्लोरीकल्चर के लिहाज से बेहद प्रगतिशील है, जहां किसान-बागवान सब्जियों और फूलों की खेती कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। सरकार का उद्देश्य विकास के नाम पर इस उपजाऊ भूमि को नुकसान पहुंचाना नहीं है। जनमत के साथ ही सरकार आगे बढ़ेगी और स्थानीय लोगों की सहमति के बिना एक इंच जमीन पर भी कार्रवाई नहीं होगी। गौरतलब है कि इस प्रस्ताव को लेकर जाठिया देवी और बागी पंचायत के स्थानीय लोगों में भारी रोष देखने को मिल रहा है। बागी पंचायत के तहत आने वाले आठ राजस्व गांवों की भूमि अधिग्रहण के दायरे में बताई जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लगभग 3000 बीघा से अधिक भूमि अधिग्रहण की तैयारी की जा रही है, जबकि पहले चरण में यहां 119 फ्लैट, वन, टू और थ्री बीएचके फ्लैट्स के साथ विला और इको-रिजॉर्ट बनाने की योजना है। स्थानीय लोगोँ ने एकमत होकर निर्णय लिया है कि किसी भी कीमत पर इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन नहीं दी जाएगी। उनका आरोप है कि यह परियोजना स्थानीय लोगों को विस्थापित कर बाहरी लोगों को बसाने का प्रयास है। ग्रामीणों के अनुसार अगर यह कोई राष्ट्रहित की परियोजना होती तो वे कुछ हद तक सहयोग करने को तैयार थे, लेकिन यह पूरी तरह से कमाई पर आधारित मॉडल है। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि इस क्षेत्र में 11 मंदिर स्थित हैं, जिनके अधिग्रहण की भी आशंका है। पूर्व प्रधान मदन लाल शास्त्री ने कहा कि सरकार द्वारा कराए गए सामाजिक प्रभाव आकलन (SIA) सर्वे में भी यह माना गया है कि यह क्षेत्र उपजाऊ है, लोगों की आजीविका खेती पर निर्भर है और रोजगार के अन्य साधन सीमित हैं। फिलहाल जाठिया देवी में प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप को लेकर सरकार और स्थानीय लोगों के बीच सहमति बनना बड़ी चुनौती बनी हुई है। आने वाले दिनों में जनरल हाउस मीटिंग और आगे की बातचीत इस परियोजना की दिशा तय करेगी।
शिमला , 31 दिसंबर [ विशाल सूद ] ! शहर में लगातार बढ़ती आबादी, ट्रैफिक और सरकारी दफ्तरों के दबाव को कम करने के लिए प्रदेश सरकार शिमला से बाहर एक नई सैटेलाइट माउंटेन टाउनशिप बसाने की योजना पर काम कर रही है। प्रस्तावित टाउनशिप शिमला ग्रामीण क्षेत्र के जाठिया देवी इलाके में विकसित की जानी है।
इसी मुद्दे को लेकर जाठिया देवी के स्थानीय लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह से मिला और अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि किसी भी तरह का फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया जाएगा और सभी पहलुओं पर गहराई से विचार किया जाएगा। इस संबंध में कैबिनेट मंत्री और शिमला के विधायक विक्रमादित्य सिंह ने सरकार का पक्ष स्पष्ट किया है।
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विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि शिमला शहर अत्यधिक कंजेस्टेड हो चुका है। राजधानी होने के कारण यहां अधिकांश सरकारी कार्यालय और कमर्शियल गतिविधियां केंद्रित हैं, जिससे यातायात और जनसंख्या का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसी दबाव को कम करने के उद्देश्य से शिमला से बाहर नया शहर बसाने का प्रस्ताव वर्षों से विचाराधीन है, जिस पर पिछली सरकारों के समय से काम चलता आ रहा है।
उन्होंने बताया कि जाठिया देवी में प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप के लिए केंद्र सरकार को “हिल टाउनशिप” के नाम से प्रस्ताव भेजा गया है, हालांकि अभी तक इसकी औपचारिक मंजूरी नहीं मिली है। इसके बावजूद राज्य सरकार लैंड पूलिंग मॉडल के तहत हिमुडा के माध्यम से विकास की संभावनाओं पर विचार कर रही है। मंत्री के अनुसार हिमुडा के पास पहले से ही लगभग 282 बीघा भूमि उपलब्ध है, जिसे पहले चरण में विकसित किया जाएगा।
विक्रमादित्य सिंह ने साफ कहा कि स्थानीय लोगों की भावनाओं का सम्मान करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि जाठिया देवी के कुछ लोग हाल ही में उनसे मिले और अपनी आपत्तियां रखीं। इस पूरे मुद्दे पर जल्द ही एक जनरल हाउस मीटिंग आयोजित की जाएगी, जिसमें वे स्वयं शामिल होंगे। मंत्री ने आश्वासन दिया कि पहले से अधिग्रहित भूमि पर ही कार्रवाई की जाएगी और रिहायशी क्षेत्रों, शमलात भूमि या किसानों की उपजाऊ जमीन पर स्थानीय सहमति के बिना कोई कदम नहीं उठाया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि जाठिया देवी क्षेत्र कृषि और फ्लोरीकल्चर के लिहाज से बेहद प्रगतिशील है, जहां किसान-बागवान सब्जियों और फूलों की खेती कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। सरकार का उद्देश्य विकास के नाम पर इस उपजाऊ भूमि को नुकसान पहुंचाना नहीं है। जनमत के साथ ही सरकार आगे बढ़ेगी और स्थानीय लोगों की सहमति के बिना एक इंच जमीन पर भी कार्रवाई नहीं होगी।
गौरतलब है कि इस प्रस्ताव को लेकर जाठिया देवी और बागी पंचायत के स्थानीय लोगों में भारी रोष देखने को मिल रहा है। बागी पंचायत के तहत आने वाले आठ राजस्व गांवों की भूमि अधिग्रहण के दायरे में बताई जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लगभग 3000 बीघा से अधिक भूमि अधिग्रहण की तैयारी की जा रही है, जबकि पहले चरण में यहां 119 फ्लैट, वन, टू और थ्री बीएचके फ्लैट्स के साथ विला और इको-रिजॉर्ट बनाने की योजना है। स्थानीय लोगोँ ने एकमत होकर निर्णय लिया है कि किसी भी कीमत पर इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन नहीं दी जाएगी। उनका आरोप है कि यह परियोजना स्थानीय लोगों को विस्थापित कर बाहरी लोगों को बसाने का प्रयास है।
ग्रामीणों के अनुसार अगर यह कोई राष्ट्रहित की परियोजना होती तो वे कुछ हद तक सहयोग करने को तैयार थे, लेकिन यह पूरी तरह से कमाई पर आधारित मॉडल है। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि इस क्षेत्र में 11 मंदिर स्थित हैं, जिनके अधिग्रहण की भी आशंका है। पूर्व प्रधान मदन लाल शास्त्री ने कहा कि सरकार द्वारा कराए गए सामाजिक प्रभाव आकलन (SIA) सर्वे में भी यह माना गया है कि यह क्षेत्र उपजाऊ है, लोगों की आजीविका खेती पर निर्भर है और रोजगार के अन्य साधन सीमित हैं।
फिलहाल जाठिया देवी में प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप को लेकर सरकार और स्थानीय लोगों के बीच सहमति बनना बड़ी चुनौती बनी हुई है। आने वाले दिनों में जनरल हाउस मीटिंग और आगे की बातचीत इस परियोजना की दिशा तय करेगी।
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