मुख्यमंत्री सुक्खू आखिर पंचायत चुनाव क्यों नहीं करवाना चाहते? सरकार बनाम सरकार बनाकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को किया जा रहा बाधित
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शिमला , 04 फरवरी [ विशाल सूद ] ! भारतीय जनता पार्टी हिमाचल प्रदेश की प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने पंचायती राज चुनावों पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर एसएलपी को लेकर कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में कांग्रेस सरकार लगातार लोकतंत्र का गला घोंटने का कार्य कर रही है और अब चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाकर एक बार फिर पंचायत चुनावों को टालने का प्रयास किया जा रहा है। संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि एसएलपी में Petitioners और Respondents की सूची देखकर यह साफ प्रतीत होता है कि यह मामला “सरकार बनाम सरकार” बन चुका है। एक तरफ सरकार के ही शीर्ष अधिकारी याचिकाकर्ता हैं और दूसरी तरफ चुनाव आयोग व जिला निर्वाचन अधिकारी प्रतिवादी बनाए गए हैं। यह कांग्रेस सरकार की अंदरूनी अव्यवस्था, प्रशासनिक अराजकता और लोकतांत्रिक प्रणाली के प्रति नकारात्मक सोच को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव लोकतंत्र की सबसे मजबूत आधारशिला होते हैं, लेकिन कांग्रेस सरकार जानबूझकर इन्हें रोकना चाहती है। आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी है कि मुख्यमंत्री सुक्खू पंचायत चुनाव करवाने से डर रहे हैं? क्या कांग्रेस सरकार को जनता के बीच जाने का साहस नहीं है? प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि सत्ता में आते ही कांग्रेस सरकार ने पंचायतों को कमजोर करने, स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका को समाप्त करने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को पंगु बनाने की नीति अपनाई है। अब सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से चुनाव आयोग पर दबाव बनाकर चुनावों को टालने की साजिश की जा रही है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि भाजपा स्पष्ट करती है कि लोकतंत्र में चुनाव कोई विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्य प्रक्रिया है। जनता को अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार है और कांग्रेस सरकार उस अधिकार को छीनने का प्रयास कर रही है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि भाजपा पंचायत चुनावों में किसी भी प्रकार की देरी या बाधा को स्वीकार नहीं करेगी और कांग्रेस सरकार के लोकतंत्र विरोधी षड्यंत्र के खिलाफ सड़कों से लेकर न्यायालय तक जनहित की लड़ाई लड़ेगी। उन्होंने मांग की कि कांग्रेस सरकार तत्काल राजनीतिक स्वार्थ छोड़कर पंचायत चुनाव समय पर करवाए और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा डालने का काम बंद करे।
शिमला , 04 फरवरी [ विशाल सूद ] ! भारतीय जनता पार्टी हिमाचल प्रदेश की प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने पंचायती राज चुनावों पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर एसएलपी को लेकर कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में कांग्रेस सरकार लगातार लोकतंत्र का गला घोंटने का कार्य कर रही है और अब चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाकर एक बार फिर पंचायत चुनावों को टालने का प्रयास किया जा रहा है।
संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि एसएलपी में Petitioners और Respondents की सूची देखकर यह साफ प्रतीत होता है कि यह मामला “सरकार बनाम सरकार” बन चुका है। एक तरफ सरकार के ही शीर्ष अधिकारी याचिकाकर्ता हैं और दूसरी तरफ चुनाव आयोग व जिला निर्वाचन अधिकारी प्रतिवादी बनाए गए हैं। यह कांग्रेस सरकार की अंदरूनी अव्यवस्था, प्रशासनिक अराजकता और लोकतांत्रिक प्रणाली के प्रति नकारात्मक सोच को उजागर करता है।
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उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव लोकतंत्र की सबसे मजबूत आधारशिला होते हैं, लेकिन कांग्रेस सरकार जानबूझकर इन्हें रोकना चाहती है। आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी है कि मुख्यमंत्री सुक्खू पंचायत चुनाव करवाने से डर रहे हैं? क्या कांग्रेस सरकार को जनता के बीच जाने का साहस नहीं है?
प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि सत्ता में आते ही कांग्रेस सरकार ने पंचायतों को कमजोर करने, स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका को समाप्त करने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को पंगु बनाने की नीति अपनाई है। अब सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से चुनाव आयोग पर दबाव बनाकर चुनावों को टालने की साजिश की जा रही है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि भाजपा स्पष्ट करती है कि लोकतंत्र में चुनाव कोई विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्य प्रक्रिया है। जनता को अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार है और कांग्रेस सरकार उस अधिकार को छीनने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि भाजपा पंचायत चुनावों में किसी भी प्रकार की देरी या बाधा को स्वीकार नहीं करेगी और कांग्रेस सरकार के लोकतंत्र विरोधी षड्यंत्र के खिलाफ सड़कों से लेकर न्यायालय तक जनहित की लड़ाई लड़ेगी।
उन्होंने मांग की कि कांग्रेस सरकार तत्काल राजनीतिक स्वार्थ छोड़कर पंचायत चुनाव समय पर करवाए और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा डालने का काम बंद करे।
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