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धर्मशाला, 19 फ़रवरी [ विशाल सूद ] ! आज धर्मशाला के प्रेस क्लब, नगरोटा बगवां में ओबीसी, एससी, एसटी संघर्ष समिति हिमाचल प्रदेश द्वारा एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए समिति के प्रतिनिधि सौरभ कौंडल ने बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों के समर्थन में 28 फ़रवरी 2026 को एससी, एसटी और ओबीसी के तीनों संगठन संयुक्त रूप से एक विशाल रैली आयोजित करेंगे। रैली का आयोजन दाढ़ी मेला ग्राउंड से प्रातः 11 बजे प्रारम्भ होगा, जहां से रैली उपायुक्त कार्यालय तक जाएगी। वहां उपायुक्त महोदय के माध्यम से राज्यपाल महोदय को ज्ञापन प्रेषित किया जाएगा। सौरभ कौंडल ने कहा कि जातिगत भेदभाव आज भी समाज के भीतर जारी है और निरंतर बढ़ रहा है। इसके बावजूद देश का एक वर्ग इन नियमों का विरोध कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब यूजीसी ने ऐसे नियम बनाए हों। यूजीसी रेगुलेशन 2012 के अंतर्गत भी जातिगत भेदभाव रोकने हेतु समता समितियों का गठन किया गया था। इसके बावजूद 2016 में हैदराबाद विश्वविद्यालय के रोहित वेमुला तथा 2019 में टॉपीवाला नेशनल मेडिकल कॉलेज की डॉ. पायल तड़वी की जातिगत भेदभाव के चलते आत्महत्या की घटनाएँ सामने आईं। इसके बाद दोनों परिवारों ने न्याय एवं जातिगत भेदभाव समाप्त करने की मांग को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की। मामले की सुनवाई के दौरान यूजीसी द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत आंकड़ों में जातिगत भेदभाव के मामलों में 118.4 प्रतिशत वृद्धि दर्शाई गई, जिसे देखकर न्यायालय की पीठ भी आश्चर्यचकित हुई। न्यायालय ने पाया कि 2012 के नियम ऐसे मामलों को रोकने में पर्याप्त नहीं हैं। परिणामस्वरूप सितंबर 2025 में सर्वोच्च न्यायालय ने यूजीसी को 8 सप्ताह के भीतर कठोर नियम बनाने के निर्देश दिए। इसके बाद यूजीसी ने नए नियम तैयार कर 13 जनवरी 2026 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित किए। उन्होंने बताया कि 24 जनवरी को इन नियमों के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई और 29 जनवरी को सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह कहते हुए नियमों पर स्थगन आदेश लगा दिया कि इनका दुरुपयोग हो सकता है। उन्होंने कहा कि एक ओर न्यायालय ने जातिगत भेदभाव बढ़ने पर सख्त नियम बनाने के निर्देश दिए और दूसरी ओर उन्हीं नियमों पर रोक लगाना एक विरोधाभासी स्थिति उत्पन्न करता है। उन्होंने बताया कि 2012 के नियम एससी और एसटी के साथ होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए बनाए गए थे, जबकि नए नियमों में ओबीसी को भी शामिल किया गया है क्योंकि भेदभाव उनके साथ भी होता है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में ओबीसी प्रोफेसरों के 80 प्रतिशत, एसटी प्रोफेसरों के 83 प्रतिशत तथा एससी प्रोफेसरों के 64 प्रतिशत पद रिक्त हैं। इससे स्पष्ट है कि भेदभाव केवल छात्रों तक सीमित नहीं है बल्कि शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों में भी देखा जाता है। हिमाचल प्रदेश के संदर्भ में उन्होंने कहा कि 2005 के 93वें संविधान संशोधन, जिसे 2006 में पूरे देश में लागू किया गया, को आज तक राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू नहीं किया गया है। वहीं 2019 में हुए 103वें संविधान संशोधन को उसी वर्ष लागू कर दिया गया। उन्होंने प्रश्न उठाया कि अनुच्छेद 15(5) के अंतर्गत ओबीसी के लिए किए गए प्रावधानों को लागू न करना और ईडब्लूएस संशोधन को लागू कर देना क्या भेदभाव की मंशा को नहीं दर्शाता। इस अवसर पर गदर फ्रंट के संयोजक रवि कुमार दलित ने कहा कि यूजीसी के इन नियमों से क्षेत्रवाद के नाम पर होने वाला भेदभाव भी समाप्त होगा। हिमाचल के विद्यार्थी जब दिल्ली, चंडीगढ़ आदि स्थानों पर पढ़ने जाते हैं तो उन्हें क्षेत्रीय पहचान के आधार पर भेदभाव का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रवाद के नाम पर सामान्य वर्ग के साथ भी भेदभाव होता है। ओबीसी कल्याण मंडल के प्रदेशाध्यक्ष कर्नल स्वरूप कोहली ने कहा कि हिमाचल की सरकारें पक्षपात करती रही हैं। 93वाँ संविधान संशोधन लागू न करना और 103वाँ संशोधन लागू कर देना क्या पक्षपात नहीं है? घृत बाहती चांग के प्रदेशाध्यक्ष श्रीकण्ठ चौधरी ने कहा कि हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार हमेशा जातिवाद को बढ़ावा देते रहे हैं और ओबीसी आरक्षण का विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि 1990 में भी उन्होंने यही किया और आज भी वही रुख बनाए हुए हैं, जो इस आयु में उन्हें शोभा नहीं देता। उन्होंने कहा कि इन सभी भेदभावों को समाप्त करने तथा यूजीसी के नियमों को लागू करवाने के उद्देश्य से यह रैली आयोजित की जा रही है। समिति ने हिमाचल प्रदेश की समस्त जनता से अपील की है कि वे इस रैली में शामिल होकर इसे सफल बनाएं। प्रेस वार्ता में घृत बाहती चांग महासभा के नगरोटा बगवां ब्लॉक अध्यक्ष राज कुमार नंबरदार, गुरु रविदास महासभा बैजनाथ के संगठन मंत्री राम तिलक, नगरोटा बगवां से रमेश चंद एवं जगदीश चंद, चौधरी फाउंडेशन के राज्य महासचिव बिपिन चौधरी, रोहित चौधरी, नीटू चौधरी, दलित अधिकार मंच जिला कांगड़ा के प्रधान अश्वनी मेहमी, तथा गुरु रविदास सभा हिमाचल प्रदेश के वाइस प्रेसिडेंट कमल सरोज भी उपस्थित रहे।
धर्मशाला, 19 फ़रवरी [ विशाल सूद ] ! आज धर्मशाला के प्रेस क्लब, नगरोटा बगवां में ओबीसी, एससी, एसटी संघर्ष समिति हिमाचल प्रदेश द्वारा एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए समिति के प्रतिनिधि सौरभ कौंडल ने बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों के समर्थन में 28 फ़रवरी 2026 को एससी, एसटी और ओबीसी के तीनों संगठन संयुक्त रूप से एक विशाल रैली आयोजित करेंगे।
रैली का आयोजन दाढ़ी मेला ग्राउंड से प्रातः 11 बजे प्रारम्भ होगा, जहां से रैली उपायुक्त कार्यालय तक जाएगी। वहां उपायुक्त महोदय के माध्यम से राज्यपाल महोदय को ज्ञापन प्रेषित किया जाएगा।
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सौरभ कौंडल ने कहा कि जातिगत भेदभाव आज भी समाज के भीतर जारी है और निरंतर बढ़ रहा है। इसके बावजूद देश का एक वर्ग इन नियमों का विरोध कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब यूजीसी ने ऐसे नियम बनाए हों। यूजीसी रेगुलेशन 2012 के अंतर्गत भी जातिगत भेदभाव रोकने हेतु समता समितियों का गठन किया गया था।
इसके बावजूद 2016 में हैदराबाद विश्वविद्यालय के रोहित वेमुला तथा 2019 में टॉपीवाला नेशनल मेडिकल कॉलेज की डॉ. पायल तड़वी की जातिगत भेदभाव के चलते आत्महत्या की घटनाएँ सामने आईं। इसके बाद दोनों परिवारों ने न्याय एवं जातिगत भेदभाव समाप्त करने की मांग को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की।
मामले की सुनवाई के दौरान यूजीसी द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत आंकड़ों में जातिगत भेदभाव के मामलों में 118.4 प्रतिशत वृद्धि दर्शाई गई, जिसे देखकर न्यायालय की पीठ भी आश्चर्यचकित हुई। न्यायालय ने पाया कि 2012 के नियम ऐसे मामलों को रोकने में पर्याप्त नहीं हैं। परिणामस्वरूप सितंबर 2025 में सर्वोच्च न्यायालय ने यूजीसी को 8 सप्ताह के भीतर कठोर नियम बनाने के निर्देश दिए। इसके बाद यूजीसी ने नए नियम तैयार कर 13 जनवरी 2026 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित किए।
उन्होंने बताया कि 24 जनवरी को इन नियमों के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई और 29 जनवरी को सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह कहते हुए नियमों पर स्थगन आदेश लगा दिया कि इनका दुरुपयोग हो सकता है। उन्होंने कहा कि एक ओर न्यायालय ने जातिगत भेदभाव बढ़ने पर सख्त नियम बनाने के निर्देश दिए और दूसरी ओर उन्हीं नियमों पर रोक लगाना एक विरोधाभासी स्थिति उत्पन्न करता है।
उन्होंने बताया कि 2012 के नियम एससी और एसटी के साथ होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए बनाए गए थे, जबकि नए नियमों में ओबीसी को भी शामिल किया गया है क्योंकि भेदभाव उनके साथ भी होता है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में ओबीसी प्रोफेसरों के 80 प्रतिशत, एसटी प्रोफेसरों के 83 प्रतिशत तथा एससी प्रोफेसरों के 64 प्रतिशत पद रिक्त हैं। इससे स्पष्ट है कि भेदभाव केवल छात्रों तक सीमित नहीं है बल्कि शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों में भी देखा जाता है।
हिमाचल प्रदेश के संदर्भ में उन्होंने कहा कि 2005 के 93वें संविधान संशोधन, जिसे 2006 में पूरे देश में लागू किया गया, को आज तक राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू नहीं किया गया है। वहीं 2019 में हुए 103वें संविधान संशोधन को उसी वर्ष लागू कर दिया गया। उन्होंने प्रश्न उठाया कि अनुच्छेद 15(5) के अंतर्गत ओबीसी के लिए किए गए प्रावधानों को लागू न करना और ईडब्लूएस संशोधन को लागू कर देना क्या भेदभाव की मंशा को नहीं दर्शाता।
इस अवसर पर गदर फ्रंट के संयोजक रवि कुमार दलित ने कहा कि यूजीसी के इन नियमों से क्षेत्रवाद के नाम पर होने वाला भेदभाव भी समाप्त होगा। हिमाचल के विद्यार्थी जब दिल्ली, चंडीगढ़ आदि स्थानों पर पढ़ने जाते हैं तो उन्हें क्षेत्रीय पहचान के आधार पर भेदभाव का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रवाद के नाम पर सामान्य वर्ग के साथ भी भेदभाव होता है।
ओबीसी कल्याण मंडल के प्रदेशाध्यक्ष कर्नल स्वरूप कोहली ने कहा कि हिमाचल की सरकारें पक्षपात करती रही हैं। 93वाँ संविधान संशोधन लागू न करना और 103वाँ संशोधन लागू कर देना क्या पक्षपात नहीं है? घृत बाहती चांग के प्रदेशाध्यक्ष श्रीकण्ठ चौधरी ने कहा कि हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार हमेशा जातिवाद को बढ़ावा देते रहे हैं और ओबीसी आरक्षण का विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि 1990 में भी उन्होंने यही किया और आज भी वही रुख बनाए हुए हैं, जो इस आयु में उन्हें शोभा नहीं देता।
उन्होंने कहा कि इन सभी भेदभावों को समाप्त करने तथा यूजीसी के नियमों को लागू करवाने के उद्देश्य से यह रैली आयोजित की जा रही है। समिति ने हिमाचल प्रदेश की समस्त जनता से अपील की है कि वे इस रैली में शामिल होकर इसे सफल बनाएं।
प्रेस वार्ता में घृत बाहती चांग महासभा के नगरोटा बगवां ब्लॉक अध्यक्ष राज कुमार नंबरदार, गुरु रविदास महासभा बैजनाथ के संगठन मंत्री राम तिलक, नगरोटा बगवां से रमेश चंद एवं जगदीश चंद, चौधरी फाउंडेशन के राज्य महासचिव बिपिन चौधरी, रोहित चौधरी, नीटू चौधरी, दलित अधिकार मंच जिला कांगड़ा के प्रधान अश्वनी मेहमी, तथा गुरु रविदास सभा हिमाचल प्रदेश के वाइस प्रेसिडेंट कमल सरोज भी उपस्थित रहे।
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