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चम्बा आठ मार्च 1948 को हुआ था ऐतिहासिक विलय चम्बा के विलय के बाद अस्तित्व में आया था हिमाचल प्रदेशपूरे विश्व ने रविवार को जब अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया, वहीं चंबा के निवासी अपनी अस्मिता और गौरव के प्रतीक 'चंबा दिवस' का जश्न मनाते नजर आए। ऐतिहासिक नगर चंबा के लिए आठ मार्च का दिन केवल कैलेंडर की एक तारीख मात्र नहीं है, बल्कि यह उस शौर्य, दूरदर्शिता और त्याग का प्रतीक है, जिसने आधुनिक हिमाचल प्रदेश की नींव रखी। आठ मार्च 1948 को ही चंबा रियासत का भारतीय गणतंत्र में विलय हुआ था, जो कालांतर में हिमाचल निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुआ। यह जानकारी चंबा दिवस के अवसर लोगों को दी गई। चंबा दिवस पर जिला मुख्यालय चंबा सहित मैहला के जटकरी क्षेत्र के भागर गांव, कुंडी-सुनारा, चंबा के चमीणू, पांगी तथा तीसा में कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। चमीणू में स्वच्छता अभियान भी चलाया गया, जिसमें ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस दौरान वक्ताओं ने चंबा के गौरवशाली इतिहास और हिमाचल के गठन में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। लोगों को बताया गया कि हिमाचल प्रदेश के गठन के इतिहास को खंगालें तो पता चलता है कि आजादी के समय परिस्थितियां अत्यंत चुनौतीपूर्ण थीं। हिमाचल गैजेट के अनुसार, उस समय पंजाब के राजनेता इन पहाड़ी रियासतों को पंजाब में मिलाने की कोशिश कर रहे थे। चंबा की जनता और प्रजामंडल के नेताओं ने इस मंशा के विरुद्ध आवाज उठाई और अपनी अलग सांस्कृतिक पहचान (वेशभूषा, खान-पान और भाषा) के आधार पर पृथक पहाड़ी राज्य की मांग की। भारत सरकार के तत्कालीन रियासती मंत्रालय के सचिव वीपी मेनन ने अपनी पुस्तक इंटीग्रेशन ऑफ द इंडियन स्टेट्स में चंबा की भूमिका का विशेष जिक्र किया है। यदि चंबा के लोग उस समय दबाव के आगे झुक जाते, तो चंबा आज पंजाब के गुरदासपुर जिले का हिस्सा होता और हिमाचल का वर्तमान स्वरूप अस्तित्व में ही नहीं आता।इस अवसर पर सेवा हिमालया के सदस्यों सहित बेबी, रंजू, काजल, किरण, राधा, बबली, पूजा, दिव्या, आंचल, आरती, नव्या राणा, दीपिका, अनु देवी, मान देई, हंसी देवी और रवि देवी। जितेंद्र, सोनू ठाकुर, सूरज चौहान, रवि कुमार, सतीश शर्मा, कुलदीप सिंह, नवकाश भारद्वाज, किशोरी लाल, पवन कुमार, नवीन कुमार, मुकेश कुमार, दिनेश कुमार सहित अन्य लोग मौजूद रहे। चंबा का इतिहास केवल राजाओं की गाथा नहीं, बल्कि यहां के जनमानस के अटूट संकल्प की कहानी है। आज 'नॉट ऑन मैप' के माध्यम से हम चंबा की इसी सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर ले जा रहे हैं। चंबा दिवस हमें याद दिलाता है कि हमारी जड़ें कितनी गहरी हैं और पर्यटन के साथ-साथ इनका संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। मनुज शर्मा, सह-संस्थापक, नाट आन मैप। हिमाचल के अस्तित्व में चंबा का विलय एक मील का पत्थर था। हमें यह समझना होगा कि चंबा की प्राकृतिक संपदा और यहां के जल-जंगल-जमीन ही हिमाचल की आर्थिक रीढ़ हैं। चंबा दिवस पर हमें अपनी पहचान के साथ-साथ अपने पर्यावरण को बचाने का भी संकल्प लेना चाहिए। कुलभूषण उपमन्यु, पर्यावरणविद।
चम्बा आठ मार्च 1948 को हुआ था ऐतिहासिक विलय चम्बा के विलय के बाद अस्तित्व में आया था हिमाचल प्रदेश
पूरे विश्व ने रविवार को जब अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया, वहीं चंबा के निवासी अपनी अस्मिता और गौरव के प्रतीक 'चंबा दिवस' का जश्न मनाते नजर आए। ऐतिहासिक नगर चंबा के लिए आठ मार्च का दिन केवल कैलेंडर की एक तारीख मात्र नहीं है, बल्कि यह उस शौर्य, दूरदर्शिता और त्याग का प्रतीक है, जिसने आधुनिक हिमाचल प्रदेश की नींव रखी। आठ मार्च 1948 को ही चंबा रियासत का भारतीय गणतंत्र में विलय हुआ था, जो कालांतर में हिमाचल निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुआ। यह जानकारी चंबा दिवस के अवसर लोगों को दी गई। चंबा दिवस पर जिला मुख्यालय चंबा सहित मैहला के जटकरी क्षेत्र के भागर गांव, कुंडी-सुनारा, चंबा के चमीणू, पांगी तथा तीसा में कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
चमीणू में स्वच्छता अभियान भी चलाया गया, जिसमें ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस दौरान वक्ताओं ने चंबा के गौरवशाली इतिहास और हिमाचल के गठन में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। लोगों को बताया गया कि हिमाचल प्रदेश के गठन के इतिहास को खंगालें तो पता चलता है कि आजादी के समय परिस्थितियां अत्यंत चुनौतीपूर्ण थीं। हिमाचल गैजेट के अनुसार, उस समय पंजाब के राजनेता इन पहाड़ी रियासतों को पंजाब में मिलाने की कोशिश कर रहे थे। चंबा की जनता और प्रजामंडल के नेताओं ने इस मंशा के विरुद्ध आवाज उठाई और अपनी अलग सांस्कृतिक पहचान (वेशभूषा, खान-पान और भाषा) के आधार पर पृथक पहाड़ी राज्य की मांग की।
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भारत सरकार के तत्कालीन रियासती मंत्रालय के सचिव वीपी मेनन ने अपनी पुस्तक इंटीग्रेशन ऑफ द इंडियन स्टेट्स में चंबा की भूमिका का विशेष जिक्र किया है। यदि चंबा के लोग उस समय दबाव के आगे झुक जाते, तो चंबा आज पंजाब के गुरदासपुर जिले का हिस्सा होता और हिमाचल का वर्तमान स्वरूप अस्तित्व में ही नहीं आता।
इस अवसर पर सेवा हिमालया के सदस्यों सहित बेबी, रंजू, काजल, किरण, राधा, बबली, पूजा, दिव्या, आंचल, आरती, नव्या राणा, दीपिका, अनु देवी, मान देई, हंसी देवी और रवि देवी। जितेंद्र, सोनू ठाकुर, सूरज चौहान, रवि कुमार, सतीश शर्मा, कुलदीप सिंह, नवकाश भारद्वाज, किशोरी लाल, पवन कुमार, नवीन कुमार, मुकेश कुमार, दिनेश कुमार सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
चंबा का इतिहास केवल राजाओं की गाथा नहीं, बल्कि यहां के जनमानस के अटूट संकल्प की कहानी है। आज 'नॉट ऑन मैप' के माध्यम से हम चंबा की इसी सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर ले जा रहे हैं। चंबा दिवस हमें याद दिलाता है कि हमारी जड़ें कितनी गहरी हैं और पर्यटन के साथ-साथ इनका संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
मनुज शर्मा, सह-संस्थापक, नाट आन मैप।
हिमाचल के अस्तित्व में चंबा का विलय एक मील का पत्थर था। हमें यह समझना होगा कि चंबा की प्राकृतिक संपदा और यहां के जल-जंगल-जमीन ही हिमाचल की आर्थिक रीढ़ हैं। चंबा दिवस पर हमें अपनी पहचान के साथ-साथ अपने पर्यावरण को बचाने का भी संकल्प लेना चाहिए। कुलभूषण उपमन्यु, पर्यावरणविद।
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