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शिमला , 02 फरवरी [ विशाल सूद ] -राजपूत कल्याण सभा, हिमाचल प्रदेश ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा लागू किए गए समता/इक्विटी से संबंधित नए विनियमों पर गहरी चिंता जताते हुए इनके पुनर्विचार अथवा वापसी की मांग की है। इस संबंध में सभा ने उपायुक्त एसडीएम के माध्यम से केंद्र सरकार व संबंधित प्राधिकरणों को ज्ञापन प्रेषित किया है 24 जनवरी को आयोजित वर्चुअल बैठक में शिक्षाविदों, प्रशासनिक अधिकारियों, पूर्व सैन्य अधिकारियों तथा सामाजिक प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से यह मत व्यक्त किया कि वर्तमान स्वरूप में ये विनियम उच्च शिक्षा के मूल उद्देश्यों के प्रतिकूल सिद्ध हो सकते हैं। सभा का मानना है कि इन नियमों के लागू होने से सामान्य वर्ग के छात्रों में भय, असुरक्षा और अपराधीकरण की भावना पनपने की आशंका है, जिससे न केवल उनका मानसिक संतुलन प्रभावित होगा बल्कि स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्भीक शैक्षणिक वातावरण भी बाधित होगा यूजीसी द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2019-20 में भेदभाव संबंधी शिकायतों की संख्या 173 थी, जो वर्ष 2023-24 में बढ़कर 378 हो गई यह शिकायतें देश के 2257 उच्च शिक्षण संस्थानों से संबंधित रहीं, जबकि इनमें से लगभग 90 प्रतिशत मामलों का समाधान पहले से स्थापित Equal Opportunity Cells (EOCs) और SC/ST Cells के माध्यम से प्रभावी ढंग से किया जा चुका है। राजपूत कल्याण सभा ने प्रश्न उठाया है कि जब वर्तमान संस्थागत तंत्र विवादों के समाधान में सक्षम है, तो अतिरिक्त कठोर, दंडात्मक और व्यापक अधिकारों से युक्त नए विनियमों की आवश्यकता क्यों महसूस की गई सभा ने यह भी चिंता जताई कि इन नियमों के कारण छात्र राजनीति में जाति-आधारित ध्रुवीकरण बढ़ सकता है, जिससे विश्वविद्यालय परिसरों का शैक्षणिक विवेक हाशिये पर चला जाएगा अंत में सभा ने आग्रह किया है कि यूजीसी के समता/इक्विटी से संबंधित उक्त विनियमों को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए अथवा शिक्षाविदों, छात्र संगठनों और राज्य सरकारों से व्यापक परामर्श के उपरांत पुनर्विचार हेतु भेजा जाए, ताकि उच्च शिक्षण संस्थानों में भयमुक्त, समरस, संतुलित एवं गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित किया जा सके सभा ने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रपति, केंद्र सरकार तथा हिमाचल प्रदेश के जनप्रतिनिधि इस विषय की गंभीरता को समझते हुए राष्ट्रहित व शिक्षा हित में उचित निर्णय लेंगे।
शिमला , 02 फरवरी [ विशाल सूद ] -राजपूत कल्याण सभा, हिमाचल प्रदेश ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा लागू किए गए समता/इक्विटी से संबंधित नए विनियमों पर गहरी चिंता जताते हुए इनके पुनर्विचार अथवा वापसी की मांग की है। इस संबंध में सभा ने उपायुक्त एसडीएम के माध्यम से केंद्र सरकार व संबंधित प्राधिकरणों को ज्ञापन प्रेषित किया है 24 जनवरी को आयोजित वर्चुअल बैठक में शिक्षाविदों, प्रशासनिक अधिकारियों, पूर्व सैन्य अधिकारियों तथा सामाजिक प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से यह मत व्यक्त किया कि वर्तमान स्वरूप में ये विनियम उच्च शिक्षा के मूल उद्देश्यों के प्रतिकूल सिद्ध हो सकते हैं।
सभा का मानना है कि इन नियमों के लागू होने से सामान्य वर्ग के छात्रों में भय, असुरक्षा और अपराधीकरण की भावना पनपने की आशंका है, जिससे न केवल उनका मानसिक संतुलन प्रभावित होगा बल्कि स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्भीक शैक्षणिक वातावरण भी बाधित होगा यूजीसी द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2019-20 में भेदभाव संबंधी शिकायतों की संख्या 173 थी, जो वर्ष 2023-24 में बढ़कर 378 हो गई यह शिकायतें देश के 2257 उच्च शिक्षण संस्थानों से संबंधित रहीं, जबकि इनमें से लगभग 90 प्रतिशत मामलों का समाधान पहले से स्थापित Equal Opportunity Cells (EOCs) और SC/ST Cells के माध्यम से प्रभावी ढंग से किया जा चुका है।
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राजपूत कल्याण सभा ने प्रश्न उठाया है कि जब वर्तमान संस्थागत तंत्र विवादों के समाधान में सक्षम है, तो अतिरिक्त कठोर, दंडात्मक और व्यापक अधिकारों से युक्त नए विनियमों की आवश्यकता क्यों महसूस की गई सभा ने यह भी चिंता जताई कि इन नियमों के कारण छात्र राजनीति में जाति-आधारित ध्रुवीकरण बढ़ सकता है, जिससे विश्वविद्यालय परिसरों का शैक्षणिक विवेक हाशिये पर चला जाएगा अंत में सभा ने आग्रह किया है कि यूजीसी के समता/इक्विटी से संबंधित उक्त विनियमों को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए अथवा शिक्षाविदों, छात्र संगठनों और राज्य सरकारों से व्यापक परामर्श के उपरांत पुनर्विचार हेतु भेजा जाए, ताकि उच्च शिक्षण संस्थानों में भयमुक्त, समरस, संतुलित एवं गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित किया जा सके सभा ने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रपति, केंद्र सरकार तथा हिमाचल प्रदेश के जनप्रतिनिधि इस विषय की गंभीरता को समझते हुए राष्ट्रहित व शिक्षा हित में उचित निर्णय लेंगे।
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