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शिमला , 12 जनवरी [ विशाल सूद ] ! मौसम की लगातार बेरुखी और लंबे समय से बारिश व बर्फबारी न होने के कारण हिमाचल प्रदेश के बागवान गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। प्रदेश की खेती और बागवानी बड़े पैमाने पर वर्षा पर निर्भर है और मौजूदा हालात से स्वाभाविक रूप से बागवानों पर दबाव पड़ा है। यह केवल हिमाचल का नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन से जुड़ा मुद्दा है। बागवानो ने बताया कि पिछले करीब तीन महीनों से बारिश नहीं हुई है, जिससे हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। सूखे के कारण न केवल मौजूदा फसलों पर असर पड़ा है, बल्कि नए प्लांटेशन का काम भी ठप हो गया है। 100 दिनों से अधिक समय से बारिश नहीं होने के कारण पानी की किल्लत बढ़ गई है। पहाड़ी क्षेत्रों में सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं हैं और खेती पूरी तरह से बारिश पर निर्भर है। ऐसे में यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में संकट और गहरा सकता है।बागवानों का कहना है कि मैदानी इलाकों में सिंचाई के सहारे किसी हद तक खेती की जा सकती है, लेकिन हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में बारिश और बर्फबारी के बिना खेती-बागवानी करना लगभग असंभव हो जाता है। लंबे सूखे से सेब सहित अन्य फलों की पैदावार पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही । राजस्व एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने बताया कि बागवानी क्षेत्र में इस समय बड़ी संख्या में पौधे खरीदे जा चुके हैं। जिन क्षेत्रों में सीमित जल स्रोत उपलब्ध हैं, वहां किसी तरह प्लांटेशन किया जा रहा है, लेकिन जहां पानी का स्रोत नहीं है, वहां स्थिति बेहद कठिन बनी हुई है।उन्होंने उम्मीद जताई कि अभी मौसम में बदलाव की संभावना बनी हुई है। कई बार लोहड़ी के आसपास या 25–26 जनवरी के बाद अच्छी बर्फबारी होती रही है। यदि आने वाले समय में भी मौसम में सुधार नहीं होता है, तो सरकार को आगे की रणनीति पर विचार करना पड़ेगा।
शिमला , 12 जनवरी [ विशाल सूद ] ! मौसम की लगातार बेरुखी और लंबे समय से बारिश व बर्फबारी न होने के कारण हिमाचल प्रदेश के बागवान गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। प्रदेश की खेती और बागवानी बड़े पैमाने पर वर्षा पर निर्भर है और मौजूदा हालात से स्वाभाविक रूप से बागवानों पर दबाव पड़ा है। यह केवल हिमाचल का नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन से जुड़ा मुद्दा है।
बागवानो ने बताया कि पिछले करीब तीन महीनों से बारिश नहीं हुई है, जिससे हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। सूखे के कारण न केवल मौजूदा फसलों पर असर पड़ा है, बल्कि नए प्लांटेशन का काम भी ठप हो गया है। 100 दिनों से अधिक समय से बारिश नहीं होने के कारण पानी की किल्लत बढ़ गई है।
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पहाड़ी क्षेत्रों में सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं हैं और खेती पूरी तरह से बारिश पर निर्भर है। ऐसे में यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में संकट और गहरा सकता है।बागवानों का कहना है कि मैदानी इलाकों में सिंचाई के सहारे किसी हद तक खेती की जा सकती है, लेकिन हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में बारिश और बर्फबारी के बिना खेती-बागवानी करना लगभग असंभव हो जाता है। लंबे सूखे से सेब सहित अन्य फलों की पैदावार पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही ।
राजस्व एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने बताया कि बागवानी क्षेत्र में इस समय बड़ी संख्या में पौधे खरीदे जा चुके हैं। जिन क्षेत्रों में सीमित जल स्रोत उपलब्ध हैं, वहां किसी तरह प्लांटेशन किया जा रहा है, लेकिन जहां पानी का स्रोत नहीं है, वहां स्थिति बेहद कठिन बनी हुई है।उन्होंने उम्मीद जताई कि अभी मौसम में बदलाव की संभावना बनी हुई है। कई बार लोहड़ी के आसपास या 25–26 जनवरी के बाद अच्छी बर्फबारी होती रही है। यदि आने वाले समय में भी मौसम में सुधार नहीं होता है, तो सरकार को आगे की रणनीति पर विचार करना पड़ेगा।
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