“कानून ताक पर रखकर पंचायतें बनाई”—कांग्रेस सरकार की धांधली हाईकोर्ट में बेनकाब
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शिमला 06 अप्रैल [ विशाल सूद ] ! भाजपा प्रदेश वरिष्ठ प्रवक्ता त्रिलोक कपूर ने माननीय उच्च न्यायालय के हालिया निर्णय का स्वागत करते हुए कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि 13 फरवरी 2026 के बाद बनाई गई नई पंचायतों, उनके पुनर्गठन एवं डिलिमिटेशन को मान्य नहीं माना जाएगा। त्रिलोक कपूर ने कहा कि यह फैसला कांग्रेस सरकार की उस मनमानी पर सीधा तमाचा है, जिसमें नियम-कानूनों को ताक पर रखकर पंचायतों का गठन और पुनर्गठन किया गया। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने साफ कहा है कि पंचायतों के गठन, पुनर्गठन और परिसीमन के लिए जो प्रक्रिया कानून में निर्धारित है, उसका पालन अनिवार्य है और उसका उल्लंघन अवैध है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने पंचायत चुनावों को प्रभावित करने के उद्देश्य से जल्दबाजी में नए प्रस्ताव जारी किए और नियमों की अनदेखी करते हुए परिसीमन की प्रक्रिया पूरी की, जो अब न्यायालय द्वारा असंवैधानिक और अवैध करार दी गई है। त्रिलोक कपूर ने कहा, “यह केवल प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि सुनियोजित राजनीतिक साजिश थी, ताकि चुनावी समीकरण अपने पक्ष में बदले जा सकें। लेकिन अब अदालत ने कांग्रेस की इस चाल को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है।” उन्होंने कहा कि न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन पंचायतों का गठन या परिसीमन 13 फरवरी 2026 के बाद किया गया है, उन्हें चुनाव प्रक्रिया में आधार नहीं बनाया जा सकता और चुनाव पूर्व स्थिति के अनुसार ही होंगे। कपूर ने कांग्रेस सरकार पर तंज कसते हुए कहा, “कांग्रेस सरकार ‘नियम तोड़ो और सत्ता जोड़ो’ की नीति पर चल रही थी, लेकिन अब कानून ने उन्हें आईना दिखा दिया है।” उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और जो अधिकारी एवं राजनीतिक लोग इसमें दोषी हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। अंत में त्रिलोक कपूर ने कहा कि भाजपा इस मुद्दे को जनता के बीच लेकर जाएगी और कांग्रेस सरकार की “लोकतंत्र विरोधी और कानून विरोधी नीतियों” को उजागर करेगी।
शिमला 06 अप्रैल [ विशाल सूद ] ! भाजपा प्रदेश वरिष्ठ प्रवक्ता त्रिलोक कपूर ने माननीय उच्च न्यायालय के हालिया निर्णय का स्वागत करते हुए कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि 13 फरवरी 2026 के बाद बनाई गई नई पंचायतों, उनके पुनर्गठन एवं डिलिमिटेशन को मान्य नहीं माना जाएगा।
त्रिलोक कपूर ने कहा कि यह फैसला कांग्रेस सरकार की उस मनमानी पर सीधा तमाचा है, जिसमें नियम-कानूनों को ताक पर रखकर पंचायतों का गठन और पुनर्गठन किया गया। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने साफ कहा है कि पंचायतों के गठन, पुनर्गठन और परिसीमन के लिए जो प्रक्रिया कानून में निर्धारित है, उसका पालन अनिवार्य है और उसका उल्लंघन अवैध है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने पंचायत चुनावों को प्रभावित करने के उद्देश्य से जल्दबाजी में नए प्रस्ताव जारी किए और नियमों की अनदेखी करते हुए परिसीमन की प्रक्रिया पूरी की, जो अब न्यायालय द्वारा असंवैधानिक और अवैध करार दी गई है।
त्रिलोक कपूर ने कहा, “यह केवल प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि सुनियोजित राजनीतिक साजिश थी, ताकि चुनावी समीकरण अपने पक्ष में बदले जा सकें। लेकिन अब अदालत ने कांग्रेस की इस चाल को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है।”
उन्होंने कहा कि न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन पंचायतों का गठन या परिसीमन 13 फरवरी 2026 के बाद किया गया है, उन्हें चुनाव प्रक्रिया में आधार नहीं बनाया जा सकता और चुनाव पूर्व स्थिति के अनुसार ही होंगे।
कपूर ने कांग्रेस सरकार पर तंज कसते हुए कहा, “कांग्रेस सरकार ‘नियम तोड़ो और सत्ता जोड़ो’ की नीति पर चल रही थी, लेकिन अब कानून ने उन्हें आईना दिखा दिया है।”
उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और जो अधिकारी एवं राजनीतिक लोग इसमें दोषी हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
अंत में त्रिलोक कपूर ने कहा कि भाजपा इस मुद्दे को जनता के बीच लेकर जाएगी और कांग्रेस सरकार की “लोकतंत्र विरोधी और कानून विरोधी नीतियों” को उजागर करेगी।
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