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शिमला , 17 फरवरी [ विशाल सूद ] ! आरडीजी पर बजट सत्र के दूसरे दिन भी तीखी बहस देखने को मिली. सदन के बाहर उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने भाजपा को घेरते हुए उनका स्पष्ट रुख पूछा है. डिप्टी सीएम ने भारत के संविधान की प्रति दिखाते हुए कहा कि संविधान निर्माताओं ने दूरदर्शिता के साथ राज्यों को अधिकार दिए. मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि आरडीजी केवल आर्थिक मुद्दा नहीं बल्कि हिमाचल और हिमाचलियत का प्रश्न है. उन्होंने कहा कि जो लोग पहले “स्टेट हुड मारो ठूड” जैसे नारे लगाते थे, वही आज आरडीजी का विरोध कर रहे हैं. मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि संविधान में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि कंसोलिडेटेड फंड से धन का बंटवारा किस प्रकार होगा. उन्होंने कहा कि देश के नेताओं ने उसी समय इन प्रश्नों का समाधान कर दिया था. उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के निर्माण के समय यह स्पष्ट था कि इस पर्वतीय राज्य को केंद्र सहायता करेगा. रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट को कंसोलिडेटेड फंड ऑफ इंडिया से जोड़ा गया. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों से राज्यों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है और सवाल उठाया कि यदि राज्यों को सशक्त नहीं करना था तो उनका गठन ही क्यों किया गया. उनका कहना था कि जीएसटी व्यवस्था से बड़े राज्यों को अपेक्षाकृत अधिक लाभ हुआ, जबकि हिमाचल जैसे छोटे और विशेष श्रेणी के राज्य को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा। पहले जीएसटी कंपनसेशन बंद किया गया और अब आरडीजी को भी समाप्त करने की बात हो रही है, जो हिमाचल के लिए गंभीर विषय है. उप मुख्यमंत्री ने कहा कि 17 में से 12 राज्यों में आरडीजी पर निर्भरता केवल 1 प्रतिशत के आसपास है, ऐसे राज्यों को इसकी विशेष आवश्यकता नहीं है, लेकिन हिमाचल के लिए यह अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि नागालैंड की आरडीजी पर निर्भरता 17 प्रतिशत और हिमाचल की 13 प्रतिशत है, जबकि कर्नाटक की निर्भरता मात्र 1 प्रतिशत है। पूर्व जयराम सरकार को 16 हजार करोड़ रुपये जीएसटी कंपनसेशन और 54 हजार करोड़ रुपये आरडीजी के माध्यम से प्राप्त हुए थे। आरडीजी बंद होने के संदर्भ में जयराम ठाकुर के चुनाव के लिए तैयार रहने वाले बयान का भी उल्लेख किया गया. मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश था कि आरडीजी हिमाचल की आवश्यकता है और इसे बंद करना प्रदेश के साथ फरेब के समान होगा.
शिमला , 17 फरवरी [ विशाल सूद ] ! आरडीजी पर बजट सत्र के दूसरे दिन भी तीखी बहस देखने को मिली. सदन के बाहर उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने भाजपा को घेरते हुए उनका स्पष्ट रुख पूछा है. डिप्टी सीएम ने भारत के संविधान की प्रति दिखाते हुए कहा कि संविधान निर्माताओं ने दूरदर्शिता के साथ राज्यों को अधिकार दिए. मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि आरडीजी केवल आर्थिक मुद्दा नहीं बल्कि हिमाचल और हिमाचलियत का प्रश्न है. उन्होंने कहा कि जो लोग पहले “स्टेट हुड मारो ठूड” जैसे नारे लगाते थे, वही आज आरडीजी का विरोध कर रहे हैं.
मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि संविधान में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि कंसोलिडेटेड फंड से धन का बंटवारा किस प्रकार होगा. उन्होंने कहा कि देश के नेताओं ने उसी समय इन प्रश्नों का समाधान कर दिया था. उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के निर्माण के समय यह स्पष्ट था कि इस पर्वतीय राज्य को केंद्र सहायता करेगा. रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट को कंसोलिडेटेड फंड ऑफ इंडिया से जोड़ा गया.
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उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों से राज्यों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है और सवाल उठाया कि यदि राज्यों को सशक्त नहीं करना था तो उनका गठन ही क्यों किया गया. उनका कहना था कि जीएसटी व्यवस्था से बड़े राज्यों को अपेक्षाकृत अधिक लाभ हुआ, जबकि हिमाचल जैसे छोटे और विशेष श्रेणी के राज्य को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा। पहले जीएसटी कंपनसेशन बंद किया गया और अब आरडीजी को भी समाप्त करने की बात हो रही है, जो हिमाचल के लिए गंभीर विषय है. उप मुख्यमंत्री ने कहा कि 17 में से 12 राज्यों में आरडीजी पर निर्भरता केवल 1 प्रतिशत के आसपास है, ऐसे राज्यों को इसकी विशेष आवश्यकता नहीं है, लेकिन हिमाचल के लिए यह अनिवार्य है।
उन्होंने बताया कि नागालैंड की आरडीजी पर निर्भरता 17 प्रतिशत और हिमाचल की 13 प्रतिशत है, जबकि कर्नाटक की निर्भरता मात्र 1 प्रतिशत है। पूर्व जयराम सरकार को 16 हजार करोड़ रुपये जीएसटी कंपनसेशन और 54 हजार करोड़ रुपये आरडीजी के माध्यम से प्राप्त हुए थे। आरडीजी बंद होने के संदर्भ में जयराम ठाकुर के चुनाव के लिए तैयार रहने वाले बयान का भी उल्लेख किया गया. मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश था कि आरडीजी हिमाचल की आवश्यकता है और इसे बंद करना प्रदेश के साथ फरेब के समान होगा.
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