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शिमला , 27 मार्च [ विशाल सूद ] ! हिमाचल प्रदेश विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान राज्य में लॉटरी सिस्टम को दोबारा शुरू करने का मुद्दा गरमा गया। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक राकेश जामवाल द्वारा पूछे गए सवाल का सरकार की ओर से लिखित में जवाब दिया गया, जिसमें लॉटरी को फिर से शुरू करने की तैयारी साफ तौर पर सामने आई है। सरकार ने अपने जवाब में बताया कि इस मुद्दे पर एक सब-कमेटी का गठन किया गया था, जिसकी सिफारिशों के आधार पर लॉटरी शुरू करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही लॉटरी नियम-2026 और इससे जुड़ी टेंडर प्रक्रिया तैयार की जा रही है। हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है, जिससे साफ है कि सरकार जल्द ही प्रदेश में लॉटरी सिस्टम शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। सरकार का तर्क है कि लॉटरी के जरिए प्रदेश के राजस्व में बढ़ोतरी होगी। लॉटरी टिकट पर मिलने वाले जीएसटी से सरकार को आय के नए स्रोत मिलेंगे, जिससे आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद मिलेगी। हालांकि, इस फैसले को लेकर विपक्ष ने कड़ा ऐतराज जताया है। राकेश जमवाल ने कहा कि सरकार ने केवल आय बढ़ाने के नजरिए से यह फैसला लिया है, जबकि इसके सामाजिक और आर्थिक दुष्प्रभावों का कोई ठोस आकलन नहीं किया गया है। उनका कहना है कि लॉटरी का सीधा असर प्रदेश के युवाओं और मजदूर वर्ग पर पड़ेगा, जो पहले ही कई चुनौतियों से जूझ रहे हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पूर्व में वीरभद्र सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने ही लॉटरी सिस्टम को बंद किया था, लेकिन अब मौजूदा सरकार इसे फिर से शुरू करने जा रही है। जमवाल ने कहा कि अन्य राज्यों का उदाहरण देना उचित नहीं है, क्योंकि हिमाचल जैसे शांतिप्रिय और छोटे राज्य की परिस्थितियां अलग हैं। उन्होंने चिंता जताई कि प्रदेश पहले ही नशे जैसी गंभीर समस्या से जूझ रहा है और ऐसे में लॉटरी को बढ़ावा देना युवाओं के भविष्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। रोजगार के मुद्दे पर भी उन्होंने सरकार को घेरा और कहा कि कांग्रेस सरकार अपने एक लाख नौकरियों के वादे को पूरा नहीं कर पाई है और अब लॉटरी को रोजगार के साधन के रूप में पेश किया जा रहा है। भाजपा ने साफ किया है कि वह इस फैसले का विरोध जारी रखेगी और हिमाचल में लॉटरी सिस्टम को दोबारा शुरू करने के खिलाफ आवाज उठाती रहेगी।
शिमला , 27 मार्च [ विशाल सूद ] ! हिमाचल प्रदेश विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान राज्य में लॉटरी सिस्टम को दोबारा शुरू करने का मुद्दा गरमा गया। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक राकेश जामवाल द्वारा पूछे गए सवाल का सरकार की ओर से लिखित में जवाब दिया गया, जिसमें लॉटरी को फिर से शुरू करने की तैयारी साफ तौर पर सामने आई है।
सरकार ने अपने जवाब में बताया कि इस मुद्दे पर एक सब-कमेटी का गठन किया गया था, जिसकी सिफारिशों के आधार पर लॉटरी शुरू करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही लॉटरी नियम-2026 और इससे जुड़ी टेंडर प्रक्रिया तैयार की जा रही है। हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है, जिससे साफ है कि सरकार जल्द ही प्रदेश में लॉटरी सिस्टम शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
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सरकार का तर्क है कि लॉटरी के जरिए प्रदेश के राजस्व में बढ़ोतरी होगी। लॉटरी टिकट पर मिलने वाले जीएसटी से सरकार को आय के नए स्रोत मिलेंगे, जिससे आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद मिलेगी। हालांकि, इस फैसले को लेकर विपक्ष ने कड़ा ऐतराज जताया है। राकेश जमवाल ने कहा कि सरकार ने केवल आय बढ़ाने के नजरिए से यह फैसला लिया है, जबकि इसके सामाजिक और आर्थिक दुष्प्रभावों का कोई ठोस आकलन नहीं किया गया है।
उनका कहना है कि लॉटरी का सीधा असर प्रदेश के युवाओं और मजदूर वर्ग पर पड़ेगा, जो पहले ही कई चुनौतियों से जूझ रहे हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पूर्व में वीरभद्र सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने ही लॉटरी सिस्टम को बंद किया था, लेकिन अब मौजूदा सरकार इसे फिर से शुरू करने जा रही है।
जमवाल ने कहा कि अन्य राज्यों का उदाहरण देना उचित नहीं है, क्योंकि हिमाचल जैसे शांतिप्रिय और छोटे राज्य की परिस्थितियां अलग हैं। उन्होंने चिंता जताई कि प्रदेश पहले ही नशे जैसी गंभीर समस्या से जूझ रहा है और ऐसे में लॉटरी को बढ़ावा देना युवाओं के भविष्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। रोजगार के मुद्दे पर भी उन्होंने सरकार को घेरा और कहा कि कांग्रेस सरकार अपने एक लाख नौकरियों के वादे को पूरा नहीं कर पाई है और अब लॉटरी को रोजगार के साधन के रूप में पेश किया जा रहा है। भाजपा ने साफ किया है कि वह इस फैसले का विरोध जारी रखेगी और हिमाचल में लॉटरी सिस्टम को दोबारा शुरू करने के खिलाफ आवाज उठाती रहेगी।
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