- विज्ञापन (Article Top Ad) -
ऊना , 14 फरवरी [ विशाल सूद ] ! हिमाचल प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता और सुजानपुर के पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने प्रदेश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति को लेकर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि हाल ही में प्रदेश के वित्त सचिव द्वारा सरकार को सौंपी गई आंतरिक रिपोर्ट से साफ जाहिर हो गया है कि हिमाचल प्रदेश गंभीर वित्तीय संकट के दौर से गुजर रहा है और हालात लगातार बद से बदतर होते जा रहे हैं। ये बात उन्होंने मीडिया से बात करते हुए ऊना में कही। वहीं राजेंद्र राणा ने कहा कि स्थिति इतनी चिंताजनक हो चुकी है कि सरकार के पास कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की किस्तें देने, लंबित एरियर चुकाने और यहां तक कि पहले से लिए गए कर्ज की अदायगी तक के लिए धन उपलब्ध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह संकट प्राकृतिक नहीं, बल्कि सरकार की गलत नीतियों, आर्थिक कुप्रबंधन और फिजूलखर्ची का परिणाम है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सत्ता में आते ही सरकारी खजाने का दुरुपयोग किया है। जनता के पैसे को विकास कार्यों में लगाने के बजाय अपने करीबियों और मित्रों पर लुटाया गया। राणा ने आरोप लगाया कि सरकार ने रेवड़ियों की तरह पद और सुविधाएं बांटी हैं, जिससे प्रदेश का वित्तीय ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है। राजेंद्र राणा ने कहा कि जो मुख्यमंत्री वर्ष 2027 तक हिमाचल को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का सपना दिखा रहे थे, आज उन्हीं के कार्यकाल में प्रदेश दिवालियापन की कगार पर खड़ा है। कर्मचारियों, पेंशनरों और आम जनता को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जबकि सरकार जमीनी हकीकत से आंखें मूंदे बैठी है। उन्होंने कहा कि एक हिमाचली होने के नाते उन्हें यह स्थिति बेहद पीड़ादायक लगती है। प्रदेश की साख पूरे देश में गिर रही है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। राणा ने दो टूक शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने मित्रों को 50 ,50 हजार में नौकरियों दे दी गई हैं उस के इलावा मुख्यमंत्री कार्यकाल में 35 लोगों की फौज अपने लिए खड़ी कर दी है,ओर उनको सेलरिया दी जा रही है । उन्होंने कहा कि वाटर सेस कमीशन लगा कर 32 करोड़ इकठ्ठा किया, जब की सुप्रीम कोर्ट ने उस पर स्टे लगा दिया। हर जगह फिजूल खर्ची हो रही है प्रदेश तो आर्थिक संकट में जाएगा ही। उन्होंने कहा कि केंद्र ने पहले ही कई राज्यों को आगाह किया था कि आने वाले समय में RGD के माध्यम से आने वाले पैसे को कम किया जा सकता है फिर भी सरकार ने उस पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि जिस सरकार में एजेंट अधिक हो वहां भ्रष्टाचार होना सुनिश्चित है उन्होंने कहा कि डॉक्टरों का विभाग इस में अब से ऊपर है उन्होंने कहा कि ट्रेज़री में ताले उनके लिए लगे है जो इनको कमीशन नहीं देते, बल्कि उन के लिए ट्रेज़री एक मिनट के लिए खोली जाती हैं और कमीशन देने वालों को टोकन भी जारी किया जाता है ओर उन को पेयमट भी की जा रही हैं । उन्होंने कहा कि प्रदेश की सरकार व मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू केंद्र सरकार को अब दोष दे रहे हैं। केंद्र सरकार को दोष देने की बजाए अपने खर्चों में कमी करें। वहीं उन्होंने मीडिया के प्रश्न के उतर में कहा कि प्रदेश सरकार को दिसंबर तक पंचायती चुनाव करवाने थे लेकिन डिजास्टर एक लग कर ये अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सके गए,, वहीं उन्होंने कहा कि अब 31 मई तक सरकार को चुनाव करवाने ही पड़ेंगे, क्योंकि अब सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद प्रदेश सरकार को ये निर्णय मानना ही पड़ेगा।
ऊना , 14 फरवरी [ विशाल सूद ] ! हिमाचल प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता और सुजानपुर के पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने प्रदेश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति को लेकर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि हाल ही में प्रदेश के वित्त सचिव द्वारा सरकार को सौंपी गई आंतरिक रिपोर्ट से साफ जाहिर हो गया है कि हिमाचल प्रदेश गंभीर वित्तीय संकट के दौर से गुजर रहा है और हालात लगातार बद से बदतर होते जा रहे हैं। ये बात उन्होंने मीडिया से बात करते हुए ऊना में कही।
वहीं राजेंद्र राणा ने कहा कि स्थिति इतनी चिंताजनक हो चुकी है कि सरकार के पास कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की किस्तें देने, लंबित एरियर चुकाने और यहां तक कि पहले से लिए गए कर्ज की अदायगी तक के लिए धन उपलब्ध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह संकट प्राकृतिक नहीं, बल्कि सरकार की गलत नीतियों, आर्थिक कुप्रबंधन और फिजूलखर्ची का परिणाम है।
- विज्ञापन (Article Inline Ad) -
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सत्ता में आते ही सरकारी खजाने का दुरुपयोग किया है। जनता के पैसे को विकास कार्यों में लगाने के बजाय अपने करीबियों और मित्रों पर लुटाया गया। राणा ने आरोप लगाया कि सरकार ने रेवड़ियों की तरह पद और सुविधाएं बांटी हैं, जिससे प्रदेश का वित्तीय ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है।
राजेंद्र राणा ने कहा कि जो मुख्यमंत्री वर्ष 2027 तक हिमाचल को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का सपना दिखा रहे थे, आज उन्हीं के कार्यकाल में प्रदेश दिवालियापन की कगार पर खड़ा है। कर्मचारियों, पेंशनरों और आम जनता को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जबकि सरकार जमीनी हकीकत से आंखें मूंदे बैठी है।
उन्होंने कहा कि एक हिमाचली होने के नाते उन्हें यह स्थिति बेहद पीड़ादायक लगती है। प्रदेश की साख पूरे देश में गिर रही है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। राणा ने दो टूक शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने मित्रों को 50 ,50 हजार में नौकरियों दे दी गई हैं उस के इलावा मुख्यमंत्री कार्यकाल में 35 लोगों की फौज अपने लिए खड़ी कर दी है,ओर उनको सेलरिया दी जा रही है । उन्होंने कहा कि वाटर सेस कमीशन लगा कर 32 करोड़ इकठ्ठा किया, जब की सुप्रीम कोर्ट ने उस पर स्टे लगा दिया।
हर जगह फिजूल खर्ची हो रही है प्रदेश तो आर्थिक संकट में जाएगा ही। उन्होंने कहा कि केंद्र ने पहले ही कई राज्यों को आगाह किया था कि आने वाले समय में RGD के माध्यम से आने वाले पैसे को कम किया जा सकता है फिर भी सरकार ने उस पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि जिस सरकार में एजेंट अधिक हो वहां भ्रष्टाचार होना सुनिश्चित है उन्होंने कहा कि डॉक्टरों का विभाग इस में अब से ऊपर है उन्होंने कहा कि ट्रेज़री में ताले उनके लिए लगे है जो इनको कमीशन नहीं देते, बल्कि उन के लिए ट्रेज़री एक मिनट के लिए खोली जाती हैं और कमीशन देने वालों को टोकन भी जारी किया जाता है ओर उन को पेयमट भी की जा रही हैं ।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की सरकार व मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू केंद्र सरकार को अब दोष दे रहे हैं। केंद्र सरकार को दोष देने की बजाए अपने खर्चों में कमी करें। वहीं उन्होंने मीडिया के प्रश्न के उतर में कहा कि प्रदेश सरकार को दिसंबर तक पंचायती चुनाव करवाने थे लेकिन डिजास्टर एक लग कर ये अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सके गए,, वहीं उन्होंने कहा कि अब 31 मई तक सरकार को चुनाव करवाने ही पड़ेंगे, क्योंकि अब सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद प्रदेश सरकार को ये निर्णय मानना ही पड़ेगा।
- विज्ञापन (Article Bottom Ad) -
- विज्ञापन (Sidebar Ad 1) -
- विज्ञापन (Sidebar Ad 2) -
- विज्ञापन (Sidebar Ad 3) -
- विज्ञापन (Sidebar Ad 4) -