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शिमला , 07 अगस्त ! भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात की उनके साथ सिरमौर के भाजपा नेता बलदेव भंडारी भी उपस्थित रहें। बैठक में सोलन मीनस रोड और चैला नेरीपुल कुम्हारहट्टी रोड का उन्नयन हेतु विस्तृत चर्चा की गई कश्यप ने केंद्रीय मंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया कि 2016 में जब गडकरी ने हिमाचल प्रदेश का दौरा किया था तो इन दोनों सड़कों को कुछ अन्य सड़कों के साथ राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किया गया था। ये दोनों सड़कें राजगढ़ से गुजरती हैं जो जिला सिरमौर का आंतरिक क्षेत्र है। राजगढ़ को एशिया की आड़ू घाटी के रूप में भी जाना जाता है और यह बेमौसमी सब्जियों के लिए प्रसिद्ध है। सोलन मीनस रोड जो राजगढ़ सब डिवीजन से होकर गुजरती है, राज्य राजमार्ग संख्या 6 हुआ करती थी और इसका निर्माण 1958-1962 के बीच किया गया था। तब से ट्रैफिक वॉल्यूम कई गुना बढ़ गया है। यह सड़क मीनस में सोलन को उत्तराखंड से जोड़ती है जो टोंस नदी (यमुना नदी की सहायक नदी) पर स्थित है। यह सड़क राजगढ़, रेणुका और शिलाई के सुदूर उपमंडलों के लोगों के लिए जीवन रेखा है। जिला सिरमौर में पांच उपमंडल हैं और यह सड़क तीन उपमंडलों से होकर गुजरती है, जिससे जिला सिरमौर का पचास प्रतिशत से अधिक क्षेत्र कवर होता है। लेकिन पचास वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उक्त सड़क की हालत में सुधार नहीं हुआ है। सड़क की शुरुआत के बाद से सड़क की चौड़ाई नहीं बदली है। सड़क बहुत संकरी है और इससे साल भर दुर्घटनाएं होती रहती हैं। राजगढ़ क्षेत्र भी बहुत खूबसूरत है और साल भर बहुत सारे पर्यटक भी इस क्षेत्र में आते हैं। प्रसिद्ध चूड़धार चोटी और गुरुद्वारा बरू साहिब साल भर आगंतुकों को आकर्षित करते हैं। यह मुख्य सड़क है जो क्षेत्र के लोगों को शिमला और चंडीगढ़ से जोड़ती है। राजगढ़ डिवीजन से गुजरने वाली एक अन्य महत्वपूर्ण सड़क चैला नेरिपुल कुम्हारहट्टी सड़क है जो जिले के सेब उत्पादक क्षेत्र की जीवन रेखा भी है। शिमला जिले का अस्सी फीसदी सेब इसी मार्ग से शिमला जाते है। देश के विभिन्न कोनों में फल पहुंचाने के लिए सेब और अन्य फलों से लदे मल्टीएक्सल ट्रक इस मार्ग पर चलते हैं। सड़क का पूरा हिस्सा संकरा होने के कारण लंबे समय तक ट्रैफिक जाम रहता है, जिससे आम जनता को काफी असुविधा होती है और किसानों को भी भारी नुकसान होता है, क्योंकि सड़क की खराब स्थिति के कारण उनकी उपज समय पर बाजार तक नहीं पहुंच पाती है। कश्यप ने मंत्री से अनुरोध किया इन सड़कों को तत्काल उन्नयन की आवश्यकता है। अच्छी कनेक्टिविटी के बिना क्षेत्र का विकास एवं प्रगति संभव नहीं है। यदि इन सड़कों को राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा देने में समय लगेगा तो अनुरोध है कि उक्त सड़कों के चौड़ीकरण एवं स्थिति में सुधार के लिए सीआरएफ के तहत धनराशि उपलब्ध कराई जाए। कश्यप ने एक और मांग उठाते हुए कहा की सराहां- चंडीगढ़ सड़क पच्छाद विधान सभा, जिला सिरमौर कि एक मुख्य सड़क है जो पच्छाद विधानसभा को सीधे चंडीगढ़- हरियाणा व पंजाब से जोड़ती है। इस सड़क कि लम्बाई 42 किलोमीटर है। यह सड़क कई वर्षो से बनी हुई है परन्तु वर्तमान में इस सड़क कि हालत बहुत ही दयनीय है। इस सड़क से पच्छाद विधान सभा कि 8 पंचायतो की लगभग 15000 की जनसंख्या को यातायात की सुविधा मिलती है। धन के अभाव से इस सड़क की हालत बहुत ख़राब हो गयी है। इस सड़क में आनेवाली सारी निजी व सरकारी भूमि हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग के नाम पर है। इस सड़क को कुछ वर्ष पूर्व जब केंद्र ने 68 नेशनल हाईवे की घोषणा की थी उसमे भी इसे डाला गया था, परन्तु उसका भी कोई कार्य नहीं हुआ। कश्यप ने गडकरी से निवेदन किया की इस सड़क के लिए सीआरएफ से आवश्यक धन उपलब्ध करवाया जाए। इसके लिए क्षेत्र कि समस्त जनता आपके आभारी रहेगी ।
शिमला , 07 अगस्त ! भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात की उनके साथ सिरमौर के भाजपा नेता बलदेव भंडारी भी उपस्थित रहें।
बैठक में सोलन मीनस रोड और चैला नेरीपुल कुम्हारहट्टी रोड का उन्नयन हेतु विस्तृत चर्चा की गई
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कश्यप ने केंद्रीय मंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया कि 2016 में जब गडकरी ने हिमाचल प्रदेश का दौरा किया था तो इन दोनों सड़कों को कुछ अन्य सड़कों के साथ राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किया गया था। ये दोनों सड़कें राजगढ़ से गुजरती हैं जो जिला सिरमौर का आंतरिक क्षेत्र है। राजगढ़ को एशिया की आड़ू घाटी के रूप में भी जाना जाता है और यह बेमौसमी सब्जियों के लिए प्रसिद्ध है। सोलन मीनस रोड जो राजगढ़ सब डिवीजन से होकर गुजरती है, राज्य राजमार्ग संख्या 6 हुआ करती थी और इसका निर्माण 1958-1962 के बीच किया गया था। तब से ट्रैफिक वॉल्यूम कई गुना बढ़ गया है। यह सड़क मीनस में सोलन को उत्तराखंड से जोड़ती है जो टोंस नदी (यमुना नदी की सहायक नदी) पर स्थित है। यह सड़क राजगढ़, रेणुका और शिलाई के सुदूर उपमंडलों के लोगों के लिए जीवन रेखा है। जिला सिरमौर में पांच उपमंडल हैं और यह सड़क तीन उपमंडलों से होकर गुजरती है, जिससे जिला सिरमौर का पचास प्रतिशत से अधिक क्षेत्र कवर होता है। लेकिन पचास वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उक्त सड़क की हालत में सुधार नहीं हुआ है। सड़क की शुरुआत के बाद से सड़क की चौड़ाई नहीं बदली है। सड़क बहुत संकरी है और इससे साल भर दुर्घटनाएं होती रहती हैं। राजगढ़ क्षेत्र भी बहुत खूबसूरत है और साल भर बहुत सारे पर्यटक भी इस क्षेत्र में आते हैं। प्रसिद्ध चूड़धार चोटी और गुरुद्वारा बरू साहिब साल भर आगंतुकों को आकर्षित करते हैं। यह मुख्य सड़क है जो क्षेत्र के लोगों को शिमला और चंडीगढ़ से जोड़ती है।
राजगढ़ डिवीजन से गुजरने वाली एक अन्य महत्वपूर्ण सड़क चैला नेरिपुल कुम्हारहट्टी सड़क है जो जिले के सेब उत्पादक क्षेत्र की जीवन रेखा भी है। शिमला जिले का अस्सी फीसदी सेब इसी मार्ग से शिमला जाते है। देश के विभिन्न कोनों में फल पहुंचाने के लिए सेब और अन्य फलों से लदे मल्टीएक्सल ट्रक इस मार्ग पर चलते हैं। सड़क का पूरा हिस्सा संकरा होने के कारण लंबे समय तक ट्रैफिक जाम रहता है, जिससे आम जनता को काफी असुविधा होती है और किसानों को भी भारी नुकसान होता है, क्योंकि सड़क की खराब स्थिति के कारण उनकी उपज समय पर बाजार तक नहीं पहुंच पाती है।
कश्यप ने मंत्री से अनुरोध किया इन सड़कों को तत्काल उन्नयन की आवश्यकता है। अच्छी कनेक्टिविटी के बिना क्षेत्र का विकास एवं प्रगति संभव नहीं है। यदि इन सड़कों को राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा देने में समय लगेगा तो अनुरोध है कि उक्त सड़कों के चौड़ीकरण एवं स्थिति में सुधार के लिए सीआरएफ के तहत धनराशि उपलब्ध कराई जाए।
कश्यप ने एक और मांग उठाते हुए कहा की सराहां- चंडीगढ़ सड़क पच्छाद विधान सभा, जिला सिरमौर कि एक मुख्य सड़क है जो पच्छाद विधानसभा को सीधे चंडीगढ़- हरियाणा व पंजाब से जोड़ती है। इस सड़क कि लम्बाई 42 किलोमीटर है। यह सड़क कई वर्षो से बनी हुई है परन्तु वर्तमान में इस सड़क कि हालत बहुत ही दयनीय है। इस सड़क से पच्छाद विधान सभा कि 8 पंचायतो की लगभग 15000 की जनसंख्या को यातायात की सुविधा मिलती है। धन के अभाव से इस सड़क की हालत बहुत ख़राब हो गयी है।
इस सड़क में आनेवाली सारी निजी व सरकारी भूमि हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग के नाम पर है। इस सड़क को कुछ वर्ष पूर्व जब केंद्र ने 68 नेशनल हाईवे की घोषणा की थी उसमे भी इसे डाला गया था, परन्तु उसका भी कोई कार्य नहीं हुआ।
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