मौजूदा समय में शिवलिंग का आकार 5 फीट तक पहुंचा, शिवलिंग की लगातार 43 दिन पूजा करने से मनोकामना होती है पूर्ण, शिवरात्रि पर्व पर मंदिर में हजारों की संख्या में श्रद्धालु होते हैं नतमस्तक
- विज्ञापन (Article Top Ad) -
हमीरपुर , 14 फरवरी [ विशाल सूद ] ! हिमाचल प्रदेश के जिला हमीरपुर के नादौन में ब्यास नदी के किनारे राजाओं के समय से स्थापित लमलेश्वर शिव मंदिर में चमत्कारी स्वयं भू शिवलिंग अचंभित करने वाला है। स्वयं भू शिवलिंग चार सालों में एक तिल या जौ के समान बढ जाता है और वर्तमान में इस शिवलिंग का आकार बढकर 5 फुट तक हो गया है। मान्यता है कि शिविलिंग की 43 दिनों तक सच्चे मन से पूजा करने पर मनोकामना पूर्ण होती है। 500 वर्ष पूर्व लमलेश्वर शिव मंदिर की स्थापना कटोच वंश के द्वारा की गई थी। शिवरात्रि पर्व को लेकर मंदिर में सजावट का काम किया जा रहा है। शिवरात्रि पर्व के दौरान काफी संख्या में श्रद्धालु यहां पर नतमस्तक होने के लिए पहुंचते हैं। हिमाचल प्रदेश में कटोच वंश के राजाओं इतिहास महत्वपूर्ण है। कटोच वंश के राजाओं ने अनेकों मंदिरों और ऐतिहासिक किलों का निर्माण करवाया है। नादौन क्षेत्र में भी लमलेश्वर मंदिर का निर्माण कटोच वंश राजा ने करवाया है, स्थानीय लोगों अनुसार लमलेश्वर मन्दिर 500 वर्ष पुराना मंदिर है। कटोच वंश के एक राजा को स्वप्न आया था कि व्यास नदी के किनारे एक शिवलिंग मौजूद है। तब राजा ने अपने सैनिकों को व्यास नदी के किनारे भेजा वहां पर सैनिकों ने शिवलिंग को पाया और उस शिवलिंग को उठाकर नादौन में स्थापित किया था। बाद में राजा द्वारा मंदिर का निर्माण करवाया गया। तब से लेकर शिवलिंग का आकार चार वर्ष में एक तिल या जौ जितना बढ़ता है। मौजूदा समय में शिवलिंग बढ़कर 5 फिट तक ऊंचा हो चुका है। मान्यता है कि लमलेश्वर मंदिर में लगातार 43 दिन आराधना करने से मनवांछित फल की पूर्ति होती है। लमलेश्वर मंदिर के पुजारी राकेश शर्मा की माने तो मंदिर में शिवलिंग चार वर्षों में एक बार एक तिल के बराबर बढ़ता है। जो बढ़कर 5 फिट तक पहुंच चुका है। लमलेश्वर मन्दिर में हजारों की संख्या में श्रद्धालु नतमस्तक होते हैं। विदेशों से भी श्रद्धालु मंदिर में नतमस्तक होते हैं। वहीं मंदिर में नतमस्तक होने पहुंचे सीमा नन्दा और राधा का कहना है कि लमलेश्वर मंदिर में हजारों की संख्या में श्रद्धालु नतमस्तक होते हैं । इस मंदिर में जो शिवलिंग है वह चार साल में एक तिल के आकार में बढ़ता है। लमलेश्वर मंदिर में जो श्रद्धालु आराधना करते हैं भगवान शिव उनकी हर मनोकामना को पूर्ण करते हैं। वहीं जिला कांगड़ा से आई मंदिर में नतमस्तक के लिए पहुंची श्रद्धालु बिंदिया ने बताया कि लमलेश्वर महादेव मंदिर में सबकी मनोकामनाएं पूर्ण होती है उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले उन्होंने मनोकामना मंदिर में मांगी थी कि उन्हें बेटा हो जाये, अब यह उनकी मन्नत पूरी हो गई है।
हमीरपुर , 14 फरवरी [ विशाल सूद ] ! हिमाचल प्रदेश के जिला हमीरपुर के नादौन में ब्यास नदी के किनारे राजाओं के समय से स्थापित लमलेश्वर शिव मंदिर में चमत्कारी स्वयं भू शिवलिंग अचंभित करने वाला है। स्वयं भू शिवलिंग चार सालों में एक तिल या जौ के समान बढ जाता है और वर्तमान में इस शिवलिंग का आकार बढकर 5 फुट तक हो गया है। मान्यता है कि शिविलिंग की 43 दिनों तक सच्चे मन से पूजा करने पर मनोकामना पूर्ण होती है। 500 वर्ष पूर्व लमलेश्वर शिव मंदिर की स्थापना कटोच वंश के द्वारा की गई थी। शिवरात्रि पर्व को लेकर मंदिर में सजावट का काम किया जा रहा है। शिवरात्रि पर्व के दौरान काफी संख्या में श्रद्धालु यहां पर नतमस्तक होने के लिए पहुंचते हैं।
हिमाचल प्रदेश में कटोच वंश के राजाओं इतिहास महत्वपूर्ण है। कटोच वंश के राजाओं ने अनेकों मंदिरों और ऐतिहासिक किलों का निर्माण करवाया है। नादौन क्षेत्र में भी लमलेश्वर मंदिर का निर्माण कटोच वंश राजा ने करवाया है, स्थानीय लोगों अनुसार लमलेश्वर मन्दिर 500 वर्ष पुराना मंदिर है। कटोच वंश के एक राजा को स्वप्न आया था कि व्यास नदी के किनारे एक शिवलिंग मौजूद है।
- विज्ञापन (Article Inline Ad) -
तब राजा ने अपने सैनिकों को व्यास नदी के किनारे भेजा वहां पर सैनिकों ने शिवलिंग को पाया और उस शिवलिंग को उठाकर नादौन में स्थापित किया था। बाद में राजा द्वारा मंदिर का निर्माण करवाया गया। तब से लेकर शिवलिंग का आकार चार वर्ष में एक तिल या जौ जितना बढ़ता है। मौजूदा समय में शिवलिंग बढ़कर 5 फिट तक ऊंचा हो चुका है। मान्यता है कि लमलेश्वर मंदिर में लगातार 43 दिन आराधना करने से मनवांछित फल की पूर्ति होती है।
लमलेश्वर मंदिर के पुजारी राकेश शर्मा की माने तो मंदिर में शिवलिंग चार वर्षों में एक बार एक तिल के बराबर बढ़ता है। जो बढ़कर 5 फिट तक पहुंच चुका है। लमलेश्वर मन्दिर में हजारों की संख्या में श्रद्धालु नतमस्तक होते हैं। विदेशों से भी श्रद्धालु मंदिर में नतमस्तक होते हैं।
वहीं मंदिर में नतमस्तक होने पहुंचे सीमा नन्दा और राधा का कहना है कि लमलेश्वर मंदिर में हजारों की संख्या में श्रद्धालु नतमस्तक होते हैं । इस मंदिर में जो शिवलिंग है वह चार साल में एक तिल के आकार में बढ़ता है। लमलेश्वर मंदिर में जो श्रद्धालु आराधना करते हैं भगवान शिव उनकी हर मनोकामना को पूर्ण करते हैं।
वहीं जिला कांगड़ा से आई मंदिर में नतमस्तक के लिए पहुंची श्रद्धालु बिंदिया ने बताया कि लमलेश्वर महादेव मंदिर में सबकी मनोकामनाएं पूर्ण होती है उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले उन्होंने मनोकामना मंदिर में मांगी थी कि उन्हें बेटा हो जाये, अब यह उनकी मन्नत पूरी हो गई है।
- विज्ञापन (Article Bottom Ad) -
- विज्ञापन (Sidebar Ad 1) -
- विज्ञापन (Sidebar Ad 2) -
- विज्ञापन (Sidebar Ad 3) -
- विज्ञापन (Sidebar Ad 4) -