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चम्बा , 02 अप्रैल [ शिवानी ] ! वैसे तो हिमाचल प्रदेश में बारहों महीने कहीं न कहीं देवी देवताओं की जातर मेले त्यौंहार चले ही रहते है पर चम्बा जिला जिसकी स्थापना 10,वी शताब्दी में चम्बा के राजा साहिल वर्मन के समय से हुई और उसी समय से चम्बा की इस नगरी में साल के बारहों महीने कोई न कोई त्यौहार व मेलो का आयोजन शुरू हुआ। चैत्र मास की सक्रांति में जैसे ही नए साल का आगमन होता है ठीक उसी महीने में चम्बा की सबसे प्रिय प्रतियोगिता ऐतिहासिक खिन्नू गेम का भी आगाज होता है। ऐतिहासिक खिन्नू गेम जिसका आगाज आज से करीब एक हजार वर्ष पहले चम्बा के राजा साहिल वर्मन ने अपने हाथों से शुरू करवाया था जोकि आज भी उसी शानोशौकत से चंबा के ऐतिहासिक चौगान में मनाया जाता है। बताए चले कि शुरू से चली आ रही इस प्रतियोगिता का आगाज बाबा चरपट नाथ के मंदिर से इस ही होता चला आ रहा है और आज भी इसकी शुरुआत बाबा चरपट नाथ जी के मंदिर से शुरू की गई। बैंड बाजों से संशोधित इस ऐतिहासिक खिन्नू गेम को देखने लोग आते है।चम्बा के ऐतिहासिक चौगान में बाबा चरपट के साथ खड़े दिखाई दे रहे बच्चे और बड़े बजुर्ग आज भी अपनी इस प्राचीन धरोहर को संभाले हुए है। चंबा के सबसे वरिष्ठ नागरिक श्रीचंद नय्यर जी ने इसके इतिहास के बारे में जानकारी दी और कहा कि चम्बा के राजा जब इस ऐतिहासिक खिन्नू गेम को लेकर मंदिर जाते थे तो अपनी प्राचीन परम्परा के अंतर्गत ही प्रायः यह संभव होता था तथा राजा जी के आगमन और मंदिर में जाने के उपरांत ही अन्य सभी प्रकार की गेम्स को खेलने की अनुमति मिल करती थी। उन्होंने कहा कि देव भूमि से प्रचलित हमारा हिमाचल प्रदेश जिसमें जगह जगह माता शक्ति पीठ देवियां विराजमान है इसलिए जब भी हमारे चम्बा के खिलाड़ी किसी दूसरी जगह खेलने को जाया करते थे,तो वह लोग अपनी देवियों के नारे लगाते थे, तो दूसरी और हमारे लोग बाबा चरपट नाथ जी के जयकारे नारे लगाते थे। पर सबसे बड़ी बात इसमें यह भी थी कि जब भी कभी कोई बाहर से टीम हमारे चंबा खेलने को आती थी तो यह इतिहास रहा है कि सबसे पहले चरपट नाथ को ही मनाया जाता था। आज भी इस ऐतिहासिक बाबा चरपट नाथ जी के मंदिर में आज ही के दिन भगवान भोले नाथ जी के आराध्य बाबा चरपट नाथ के मंदिर में रात्री के समय भगवान शिव का नुआला रखा जाता है और उसी के साथ ही भंडारे का आयोजन भी किया जाता है।
चम्बा , 02 अप्रैल [ शिवानी ] ! वैसे तो हिमाचल प्रदेश में बारहों महीने कहीं न कहीं देवी देवताओं की जातर मेले त्यौंहार चले ही रहते है पर चम्बा जिला जिसकी स्थापना 10,वी शताब्दी में चम्बा के राजा साहिल वर्मन के समय से हुई और उसी समय से चम्बा की इस नगरी में साल के बारहों महीने कोई न कोई त्यौहार व मेलो का आयोजन शुरू हुआ। चैत्र मास की सक्रांति में जैसे ही नए साल का आगमन होता है ठीक उसी महीने में चम्बा की सबसे प्रिय प्रतियोगिता ऐतिहासिक खिन्नू गेम का भी आगाज होता है।
ऐतिहासिक खिन्नू गेम जिसका आगाज आज से करीब एक हजार वर्ष पहले चम्बा के राजा साहिल वर्मन ने अपने हाथों से शुरू करवाया था जोकि आज भी उसी शानोशौकत से चंबा के ऐतिहासिक चौगान में मनाया जाता है। बताए चले कि शुरू से चली आ रही इस प्रतियोगिता का आगाज बाबा चरपट नाथ के मंदिर से इस ही होता चला आ रहा है और आज भी इसकी शुरुआत बाबा चरपट नाथ जी के मंदिर से शुरू की गई। बैंड बाजों से संशोधित इस ऐतिहासिक खिन्नू गेम को देखने लोग आते है।
चम्बा के ऐतिहासिक चौगान में बाबा चरपट के साथ खड़े दिखाई दे रहे बच्चे और बड़े बजुर्ग आज भी अपनी इस प्राचीन धरोहर को संभाले हुए है। चंबा के सबसे वरिष्ठ नागरिक श्रीचंद नय्यर जी ने इसके इतिहास के बारे में जानकारी दी और कहा कि चम्बा के राजा जब इस ऐतिहासिक खिन्नू गेम को लेकर मंदिर जाते थे तो अपनी प्राचीन परम्परा के अंतर्गत ही प्रायः यह संभव होता था तथा राजा जी के आगमन और मंदिर में जाने के उपरांत ही अन्य सभी प्रकार की गेम्स को खेलने की अनुमति मिल करती थी।
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उन्होंने कहा कि देव भूमि से प्रचलित हमारा हिमाचल प्रदेश जिसमें जगह जगह माता शक्ति पीठ देवियां विराजमान है इसलिए जब भी हमारे चम्बा के खिलाड़ी किसी दूसरी जगह खेलने को जाया करते थे,तो वह लोग अपनी देवियों के नारे लगाते थे, तो दूसरी और हमारे लोग बाबा चरपट नाथ जी के जयकारे नारे लगाते थे।
पर सबसे बड़ी बात इसमें यह भी थी कि जब भी कभी कोई बाहर से टीम हमारे चंबा खेलने को आती थी तो यह इतिहास रहा है कि सबसे पहले चरपट नाथ को ही मनाया जाता था। आज भी इस ऐतिहासिक बाबा चरपट नाथ जी के मंदिर में आज ही के दिन भगवान भोले नाथ जी के आराध्य बाबा चरपट नाथ के मंदिर में रात्री के समय भगवान शिव का नुआला रखा जाता है और उसी के साथ ही भंडारे का आयोजन भी किया जाता है।
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