*मंडी मेडिकल कॉलेज बना रेफरल सेंटर, बुनियादी सुविधाएं ठप*
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शिमला , 28 मार्च [ विशाल सूद ] ! भाजपा के मुख्य प्रवक्ता राकेश जमवाल ने विधानसभा में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सरकार की कार्यशैली पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में “रोबोटिक सर्जरी” के नाम पर केवल शोर मचाया जा रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात पूरी तरह से विपरीत हैं। उन्होंने कहा कि जब सदन के भीतर सरकार से यह पूछा गया कि किन-किन मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी शुरू की जा रही है, कितनी मशीनें खरीदी गई हैं, डॉक्टरों और स्टाफ को क्या प्रशिक्षण दिया गया है, तो सरकार का जवाब था कि “सूचना एकत्रित की जा रही है।” यह जवाब अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि सरकार बिना तैयारी के केवल घोषणाएं कर रही है। राकेश जमवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री हर मंच से रोबोटिक सर्जरी, पेट स्कैन और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करते हैं, लेकिन जब तथ्य सामने रखने की बारी आती है तो सरकार के पास कोई स्पष्ट आंकड़े नहीं होते। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है और मशीनें खरीद ली हैं, तो फिर सदन में इसकी जानकारी देने में देरी क्यों हो रही है। यह स्पष्ट करता है कि सरकार केवल प्रचार पर ध्यान दे रही है, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में कोई ठोस कार्य नहीं किया गया है। मंडी के नेरचौक स्थित मेडिकल कॉलेज का उदाहरण देते हुए जमवाल ने कहा कि यह संस्थान आज पूरी तरह से “रेफरल सेंटर” बनकर रह गया है। यहां आने वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत बड़े संस्थानों की ओर भेज दिया जाता है, जबकि कई बीमारियों का इलाज स्थानीय स्तर पर ही संभव है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा बार-बार एमआरआई, कैथ लैब और अन्य आधुनिक सुविधाएं शुरू करने की घोषणाएं की गईं, लेकिन तीन वर्ष बीतने के बावजूद इनका कोई अता-पता नहीं है। इससे साफ है कि सरकार की प्राथमिकता केवल घोषणाएं करना है, न कि उन्हें धरातल पर उतारना। विधायक राकेश जमवाल ने आगे कहा कि जब प्रदेश के अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी है, रेडियोलॉजी विभाग पूरी तरह से सुचारू नहीं हैं और जरूरी उपकरण तक उपलब्ध नहीं हैं, तब रोबोटिक सर्जरी जैसी महंगी तकनीक की बात करना आम जनता के साथ मजाक है। जमवाल ने सवाल उठाया कि क्या सरकार ने यह आकलन किया है कि रोबोटिक सर्जरी का खर्च कितना होगा और क्या गरीब तथा मध्यम वर्ग के लोग इसका लाभ उठा पाएंगे। उन्होंने कहा कि पहले से ही लैपरोस्कोपिक सर्जरी महंगी होती है, ऐसे में रोबोटिक सर्जरी आम आदमी की पहुंच से बाहर हो सकती है। हिमकेयर योजना को लेकर भी जमवाल ने सरकार को घेरते हुए कहा कि एक तरफ सरकार इस योजना पर पुनर्विचार कर उसे बंद करने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर महंगी स्वास्थ्य सेवाओं की घोषणाएं कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अस्पतालों पर करोड़ों रुपये की देनदारियां लंबित हैं और सरकार उन्हें चुकाने में विफल रही है, जिससे आम जनता को उपचार में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति दर्शाती है कि सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारियों से बच रही है। जमवाल ने आईजीएमसी शिमला की स्थिति पर भी चिंता जताते हुए कहा कि यह प्रदेश का सबसे पुराना और प्रमुख मेडिकल कॉलेज है, लेकिन यहां से भी डॉक्टरों का स्थानांतरण किया जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं और कमजोर हो रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करना चाहती है तो उसे सबसे पहले बुनियादी ढांचे, डॉक्टरों की उपलब्धता और जरूरी उपकरणों पर ध्यान देना चाहिए। राकेश जमवाल ने कहा कि भाजपा इस मुद्दे को लगातार उठाती रहेगी और सरकार को जवाबदेह बनाएगी। उन्होंने मांग की कि सरकार रोबोटिक सर्जरी जैसे बड़े दावों से पहले प्रदेश के अस्पतालों की जमीनी हकीकत सुधारने पर ध्यान दे, ताकि आम जनमानस को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।
शिमला , 28 मार्च [ विशाल सूद ] ! भाजपा के मुख्य प्रवक्ता राकेश जमवाल ने विधानसभा में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सरकार की कार्यशैली पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में “रोबोटिक सर्जरी” के नाम पर केवल शोर मचाया जा रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात पूरी तरह से विपरीत हैं। उन्होंने कहा कि जब सदन के भीतर सरकार से यह पूछा गया कि किन-किन मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी शुरू की जा रही है, कितनी मशीनें खरीदी गई हैं, डॉक्टरों और स्टाफ को क्या प्रशिक्षण दिया गया है, तो सरकार का जवाब था कि “सूचना एकत्रित की जा रही है।” यह जवाब अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि सरकार बिना तैयारी के केवल घोषणाएं कर रही है।
राकेश जमवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री हर मंच से रोबोटिक सर्जरी, पेट स्कैन और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करते हैं, लेकिन जब तथ्य सामने रखने की बारी आती है तो सरकार के पास कोई स्पष्ट आंकड़े नहीं होते। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है और मशीनें खरीद ली हैं, तो फिर सदन में इसकी जानकारी देने में देरी क्यों हो रही है। यह स्पष्ट करता है कि सरकार केवल प्रचार पर ध्यान दे रही है, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में कोई ठोस कार्य नहीं किया गया है।
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मंडी के नेरचौक स्थित मेडिकल कॉलेज का उदाहरण देते हुए जमवाल ने कहा कि यह संस्थान आज पूरी तरह से “रेफरल सेंटर” बनकर रह गया है। यहां आने वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत बड़े संस्थानों की ओर भेज दिया जाता है, जबकि कई बीमारियों का इलाज स्थानीय स्तर पर ही संभव है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा बार-बार एमआरआई, कैथ लैब और अन्य आधुनिक सुविधाएं शुरू करने की घोषणाएं की गईं, लेकिन तीन वर्ष बीतने के बावजूद इनका कोई अता-पता नहीं है। इससे साफ है कि सरकार की प्राथमिकता केवल घोषणाएं करना है, न कि उन्हें धरातल पर उतारना।
विधायक राकेश जमवाल ने आगे कहा कि जब प्रदेश के अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी है, रेडियोलॉजी विभाग पूरी तरह से सुचारू नहीं हैं और जरूरी उपकरण तक उपलब्ध नहीं हैं, तब रोबोटिक सर्जरी जैसी महंगी तकनीक की बात करना आम जनता के साथ मजाक है। जमवाल ने सवाल उठाया कि क्या सरकार ने यह आकलन किया है कि रोबोटिक सर्जरी का खर्च कितना होगा और क्या गरीब तथा मध्यम वर्ग के लोग इसका लाभ उठा पाएंगे। उन्होंने कहा कि पहले से ही लैपरोस्कोपिक सर्जरी महंगी होती है, ऐसे में रोबोटिक सर्जरी आम आदमी की पहुंच से बाहर हो सकती है।
हिमकेयर योजना को लेकर भी जमवाल ने सरकार को घेरते हुए कहा कि एक तरफ सरकार इस योजना पर पुनर्विचार कर उसे बंद करने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर महंगी स्वास्थ्य सेवाओं की घोषणाएं कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अस्पतालों पर करोड़ों रुपये की देनदारियां लंबित हैं और सरकार उन्हें चुकाने में विफल रही है, जिससे आम जनता को उपचार में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति दर्शाती है कि सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारियों से बच रही है।
जमवाल ने आईजीएमसी शिमला की स्थिति पर भी चिंता जताते हुए कहा कि यह प्रदेश का सबसे पुराना और प्रमुख मेडिकल कॉलेज है, लेकिन यहां से भी डॉक्टरों का स्थानांतरण किया जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं और कमजोर हो रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करना चाहती है तो उसे सबसे पहले बुनियादी ढांचे, डॉक्टरों की उपलब्धता और जरूरी उपकरणों पर ध्यान देना चाहिए।
राकेश जमवाल ने कहा कि भाजपा इस मुद्दे को लगातार उठाती रहेगी और सरकार को जवाबदेह बनाएगी। उन्होंने मांग की कि सरकार रोबोटिक सर्जरी जैसे बड़े दावों से पहले प्रदेश के अस्पतालों की जमीनी हकीकत सुधारने पर ध्यान दे, ताकि आम जनमानस को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।
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