चिट्टा, माफिया और प्रशासनिक विफलता से प्रदेश संकट में—कांग्रेस सरकार पर लगाए गंभीर आरोप : त्रिलोक जमवाल
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शिमला , 27 मार्च [ विशाल सूद ] ! माननीय सदस्य त्रिलोक जमवाल ने विधानसभा में पुलिस एवं संबंधित संगठनों की मांग संख्या 7 पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सरकार की कानून व्यवस्था पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में सरकार की नीयत, नीति और इच्छाशक्ति तीनों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग जैसे महत्वपूर्ण संस्थान को कार्यवाहक नियुक्तियों के भरोसे चलाना सरकार की अस्थिर सोच को दर्शाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश में सक्षम और अनुभवी अधिकारी मौजूद हैं, तो स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही।त्रिलोक जमवाल ने कहा कि सरकार की कार्यप्रणाली का सबसे बड़ा उदाहरण वह प्रकरण है, जिसमें पुलिस विभाग के अंदर ही गंभीर आरोप सार्वजनिक रूप से सामने आए और उच्च न्यायालय तक अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से सफाई देनी पड़ी। उन्होंने इसे प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पुलिस एक्ट में संशोधन कर पारदर्शिता को कमजोर किया है और अधिकारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस से संबंधित जानकारी तक सीमित कर दी गई है, जिससे आम जनता का विश्वास कम हुआ है। जमवाल ने प्रदेश में बढ़ते नशे के कारोबार पर चिंता जताते हुए कहा कि पिछले एक वर्ष में लगभग 13 किलो चिट्टा बरामद हुआ है, जो इस बात का संकेत है कि वास्तविक खपत इससे कहीं अधिक है और नशा गांव-गांव तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खनन माफिया, वन माफिया, चिट्टा माफिया और अन्य संगठित गिरोह सक्रिय हैं और उन्हें सरकार का संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में अपराधियों को सजा देने के बजाय उन्हें सुविधाएं और सुरक्षा दी जा रही है। त्रिलोक जमवाल ने बिलासपुर में हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि गोलीकांड, सुपारी किलिंग और अपराधों की बढ़ती घटनाएं सरकार की विफलता को उजागर करती हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रदेश में एक एसपी को अपनी एफआईआर दर्ज कराने के लिए संघर्ष करना पड़े, वहां आम नागरिक की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने महिलाओं और सामाजिक संगठनों पर कार्रवाई को भी दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि जो लोग समाज को नशे से बचाने के लिए आगे आ रहे हैं, उन पर ही एफआईआर दर्ज की जा रही है। जमवाल ने सरकार से मांग की कि पुलिस विभाग में पारदर्शिता और स्थायी नेतृत्व सुनिश्चित किया जाए चिट्टा और माफिया नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई की जाए। ईमानदार पुलिस अधिकारियों को स्वतंत्र रूप से काम करने दिया जाए। समाज के साथ मिलकर नशा मुक्त अभियान को गंभीरता से लागू किया जाए। अंत में उन्होंने कहा कि यदि सरकार की इच्छाशक्ति मजबूत हो तो चिट्टा और माफिया राज को समाप्त करना संभव है, लेकिन वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि सरकार इस दिशा में गंभीर नहीं है।
शिमला , 27 मार्च [ विशाल सूद ] ! माननीय सदस्य त्रिलोक जमवाल ने विधानसभा में पुलिस एवं संबंधित संगठनों की मांग संख्या 7 पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सरकार की कानून व्यवस्था पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में सरकार की नीयत, नीति और इच्छाशक्ति तीनों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग जैसे महत्वपूर्ण संस्थान को कार्यवाहक नियुक्तियों के भरोसे चलाना सरकार की अस्थिर सोच को दर्शाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश में सक्षम और अनुभवी अधिकारी मौजूद हैं, तो स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही।
त्रिलोक जमवाल ने कहा कि सरकार की कार्यप्रणाली का सबसे बड़ा उदाहरण वह प्रकरण है, जिसमें पुलिस विभाग के अंदर ही गंभीर आरोप सार्वजनिक रूप से सामने आए और उच्च न्यायालय तक अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से सफाई देनी पड़ी। उन्होंने इसे प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
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उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पुलिस एक्ट में संशोधन कर पारदर्शिता को कमजोर किया है और अधिकारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस से संबंधित जानकारी तक सीमित कर दी गई है, जिससे आम जनता का विश्वास कम हुआ है।
जमवाल ने प्रदेश में बढ़ते नशे के कारोबार पर चिंता जताते हुए कहा कि पिछले एक वर्ष में लगभग 13 किलो चिट्टा बरामद हुआ है, जो इस बात का संकेत है कि वास्तविक खपत इससे कहीं अधिक है और नशा गांव-गांव तक पहुंच चुका है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में खनन माफिया, वन माफिया, चिट्टा माफिया और अन्य संगठित गिरोह सक्रिय हैं और उन्हें सरकार का संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में अपराधियों को सजा देने के बजाय उन्हें सुविधाएं और सुरक्षा दी जा रही है।
त्रिलोक जमवाल ने बिलासपुर में हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि गोलीकांड, सुपारी किलिंग और अपराधों की बढ़ती घटनाएं सरकार की विफलता को उजागर करती हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रदेश में एक एसपी को अपनी एफआईआर दर्ज कराने के लिए संघर्ष करना पड़े, वहां आम नागरिक की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
उन्होंने महिलाओं और सामाजिक संगठनों पर कार्रवाई को भी दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि जो लोग समाज को नशे से बचाने के लिए आगे आ रहे हैं, उन पर ही एफआईआर दर्ज की जा रही है।
जमवाल ने सरकार से मांग की कि पुलिस विभाग में पारदर्शिता और स्थायी नेतृत्व सुनिश्चित किया जाए चिट्टा और माफिया नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई की जाए। ईमानदार पुलिस अधिकारियों को स्वतंत्र रूप से काम करने दिया जाए। समाज के साथ मिलकर नशा मुक्त अभियान को गंभीरता से लागू किया जाए।
अंत में उन्होंने कहा कि यदि सरकार की इच्छाशक्ति मजबूत हो तो चिट्टा और माफिया राज को समाप्त करना संभव है, लेकिन वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि सरकार इस दिशा में गंभीर नहीं है।
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