माफिया राज, बढ़ते अपराध और पुलिस के दुरुपयोग से प्रदेश असुरक्षित—सरकार पूरी तरह विफल : रणधीर शर्मा
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शिमला , 27 मार्च [ विशाल सूद ] ! माननीय सदस्य रणधीर शर्मा ने विधानसभा में पुलिस एवं संबंधित संगठनों की मांग संख्या 7 पर चर्चा के दौरान प्रदेश की कानून व्यवस्था पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिस प्रदेश में पुलिस महानिदेशक (DGP) का पद ही नियमित रूप से नहीं भरा जा रहा हो और कार्यवाहक नियुक्तियों के माध्यम से विभाग चलाया जा रहा हो, वहां कानून व्यवस्था की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि डीजीपी जैसे महत्वपूर्ण पद पर भी “प्रयोग” किए जा रहे हैं, जो प्रशासनिक व्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं। रणधीर शर्मा ने कहा कि पिछले तीन वर्षों के आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। उन्होंने बताया कि इस अवधि में हत्या के 270, बलात्कार के 1096, चोरी के 332, डकैती के 9 और अपहरण के 1540 मामले दर्ज हुए हैं, जो कुल मिलाकर 5947 गंभीर अपराधों को दर्शाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में “गन कल्चर” का विकास वर्तमान कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुआ है, जिसे खुद सरकार के वरिष्ठ नेता भी स्वीकार कर चुके हैं। बिलासपुर, ऊना, नालागढ़, मंडी और ज्वाली जैसे क्षेत्रों में गोलीकांड की घटनाएं इसका प्रमाण हैं। शर्मा ने कहा कि प्रदेश में माफिया राज पूरी तरह हावी हो चुका है—चाहे वह वन माफिया हो, खनन माफिया हो या शराब माफिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में माफिया तत्वों को सरकार के संरक्षण के कारण खुली छूट मिली हुई है, जिसके चलते अवैध गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस का दुरुपयोग राजनीतिक विरोधियों को प्रताड़ित करने के लिए किया जा रहा है, जबकि वास्तविक अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के दबाव में पुलिस की प्राथमिकताएं बदल गई हैं और कानून व्यवस्था बनाए रखने के बजाय अन्य कार्यों में उसे उलझाया जा रहा है। रणधीर शर्मा ने नशा मुक्ति अभियान को भी केवल “दिखावा” करार देते हुए कहा कि तीन वर्षों में सरकार एक भी प्रभावी नशा मुक्ति केंद्र स्थापित नहीं कर पाई। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ कार्रवाई करने वाले पुलिस कर्मियों को प्रोत्साहन देने के बजाय उनका तबादला कर दिया जाता है, जिससे सिस्टम में निराशा का माहौल है। उन्होंने साइबर अपराधों में बढ़ोतरी पर भी चिंता जताते हुए कहा कि 2023 में जहां 877 मामले सामने आए, वहीं 2025 तक यह संख्या बढ़कर 18,706 हो गई, जो गंभीर खतरे का संकेत है। रणधीर शर्मा ने सरकार से मांग की कि पुलिस विभाग में नियमित और सक्षम डीजीपी की नियुक्ति की जाए। माफिया राज पर सख्त कार्रवाई हो पुलिस के राजनीतिक दुरुपयोग को तुरंत रोका जाए नशा मुक्ति के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं।पुलिस कर्मचारियों के कार्य परिस्थितियों, वेतन और सुविधाओं में सुधार किया जाए। अंत में उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था किसी भी सरकार की सबसे बड़ी कसौटी होती है, और इस कसौटी पर वर्तमान कांग्रेस सरकार पूरी तरह असफल साबित हुई है।
शिमला , 27 मार्च [ विशाल सूद ] ! माननीय सदस्य रणधीर शर्मा ने विधानसभा में पुलिस एवं संबंधित संगठनों की मांग संख्या 7 पर चर्चा के दौरान प्रदेश की कानून व्यवस्था पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि जिस प्रदेश में पुलिस महानिदेशक (DGP) का पद ही नियमित रूप से नहीं भरा जा रहा हो और कार्यवाहक नियुक्तियों के माध्यम से विभाग चलाया जा रहा हो, वहां कानून व्यवस्था की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि डीजीपी जैसे महत्वपूर्ण पद पर भी “प्रयोग” किए जा रहे हैं, जो प्रशासनिक व्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं।
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रणधीर शर्मा ने कहा कि पिछले तीन वर्षों के आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। उन्होंने बताया कि इस अवधि में हत्या के 270, बलात्कार के 1096, चोरी के 332, डकैती के 9 और अपहरण के 1540 मामले दर्ज हुए हैं, जो कुल मिलाकर 5947 गंभीर अपराधों को दर्शाते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में “गन कल्चर” का विकास वर्तमान कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुआ है, जिसे खुद सरकार के वरिष्ठ नेता भी स्वीकार कर चुके हैं। बिलासपुर, ऊना, नालागढ़, मंडी और ज्वाली जैसे क्षेत्रों में गोलीकांड की घटनाएं इसका प्रमाण हैं।
शर्मा ने कहा कि प्रदेश में माफिया राज पूरी तरह हावी हो चुका है—चाहे वह वन माफिया हो, खनन माफिया हो या शराब माफिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में माफिया तत्वों को सरकार के संरक्षण के कारण खुली छूट मिली हुई है, जिसके चलते अवैध गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि पुलिस का दुरुपयोग राजनीतिक विरोधियों को प्रताड़ित करने के लिए किया जा रहा है, जबकि वास्तविक अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के दबाव में पुलिस की प्राथमिकताएं बदल गई हैं और कानून व्यवस्था बनाए रखने के बजाय अन्य कार्यों में उसे उलझाया जा रहा है।
रणधीर शर्मा ने नशा मुक्ति अभियान को भी केवल “दिखावा” करार देते हुए कहा कि तीन वर्षों में सरकार एक भी प्रभावी नशा मुक्ति केंद्र स्थापित नहीं कर पाई। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ कार्रवाई करने वाले पुलिस कर्मियों को प्रोत्साहन देने के बजाय उनका तबादला कर दिया जाता है, जिससे सिस्टम में निराशा का माहौल है।
उन्होंने साइबर अपराधों में बढ़ोतरी पर भी चिंता जताते हुए कहा कि 2023 में जहां 877 मामले सामने आए, वहीं 2025 तक यह संख्या बढ़कर 18,706 हो गई, जो गंभीर खतरे का संकेत है। रणधीर शर्मा ने सरकार से मांग की कि पुलिस विभाग में नियमित और सक्षम डीजीपी की नियुक्ति की जाए।
माफिया राज पर सख्त कार्रवाई हो पुलिस के राजनीतिक दुरुपयोग को तुरंत रोका जाए नशा मुक्ति के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं।पुलिस कर्मचारियों के कार्य परिस्थितियों, वेतन और सुविधाओं में सुधार किया जाए। अंत में उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था किसी भी सरकार की सबसे बड़ी कसौटी होती है, और इस कसौटी पर वर्तमान कांग्रेस सरकार पूरी तरह असफल साबित हुई है।
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