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शिमला , 02 अप्रैल [ विशाल सूद ] ! डाॅ. सिकंदर कुमार, राज्यसभा सांसद एवं प्रदेश महामंत्री भाजपा ने सदन में दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और कौशल विकास का मामला उठाते हुए पूछा कि नव प्रारंभ की गई दिव्यांगजन कौशल योजना तथा दिव्यांग सहारा योजना के विशिष्ट उदेश्यों एवं राज्य-वार कार्यान्वयन योजना का ब्यौरा क्या है? क्या सरकार की प्रत्येक जिले में सहायक प्रौद्योगिकी मार्ट स्थापित किए जाने की योजना है ताकि एआइ-एकीकृत सहायक उपकरणों की खुदरा शैली में उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके ? यह सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए है कि भारतीय कृत्रिक अंग निर्माण निगम के लिए बढ़ाए गए वित्तपोषण से उच्च प्रौद्योगिकी दिव्यांग सहायता उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम हो और विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र के डाटाबेस को हिमाचल प्रदेश में राज्य स्तरीय कल्याणकारी योजनाओं के साथ एकीकृत करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं, ताकि दिव्यांग राहत भत्ता का निर्बाध वितरण सुनिश्चित किया जा सके ? सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने सदन को बताते हुए कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित दिव्यांग सहारा योजना का मुख्य उदेश्य पात्र दिव्यांगजनों को एक बुनियादी आवश्यकता के रूप में उच्च गुणवत्ता वाले सहायक यंत्रों/उपकरणों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित कराना है। यह योजना सहायक उपकरणों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम को सहायता प्रदान करती है। इसके साथ ही, यह कृत्रिम बुद्धिमतता एकीकरण सहित अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने, प्रधानमंत्री दिव्याशा वयोश्री केंद्रों को मजबूत करने और आधुनिक रिटेल स्टाइल केंद्रों के रूप में असिस्टिव टेक्नोलाॅजी माट्र्स की स्थापना का प्रावधान करती है जहां दिव्यांगजन और वरिष्ठ नागरिक सहायक उपकरणों को देख सकेंगे, उनका परीक्षण कर सकेंगे और उन्हें खरीद सकेंगे। जहां तक राज्य वार कार्यान्वयन योजना का प्रश्न है तो दोनों योजनाओं के फ्रेमवर्क में राज्य वार आबंटन की परिकल्पना नहीं की गई है और इन योजनाओं को उदेश्य देश भर के लाभार्थियों को कवर करना है। उन्होनें आगे कहा कि वर्तमान में प्रत्येक जिले में असिस्टिव टेक्नोलाॅजी माट्र्स स्थापित करने की कोई योजना नहीं है। उन्होनें कहा कि भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम उन्नत सहायक उपकरणों केे स्वदेश विकास, डिजाइन और निर्माण के उपाय कर रहा है। आयात पर निर्भरता कम करने के उदेश्य से हाई एंड असिस्टिव टेक्नोलाॅजी में टेक्नोलाॅजी ट्रांसफर के लिए मूल उपकरण निर्माताओं और स्टार्ट-अप्स के साथ सहयोग करने के प्र्रयास किए जा रहे हैं। यह निगम अपनी आंतरिक अनुसंधान और विकास क्षमताओं को भी मजबूत कर रहा है, प्रौद्योगिकी उन्नयन कर रहा है, और अनुसंधान संस्थानों एवं उद्योग भागीदारों के साथ सहयोग को बढ़ावा दे रहा है। केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र उप-योजना का उदेश्य दिव्यांगजनों को एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाना और एक केंद्रीकृत पोर्टल के माध्यम से दिव्यांगता प्रमाण पत्र और यूडीआईडी कार्ड जारी करने में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करना है। विभाग ने सुरक्षित डेटा साझाकरण और रीयल टाइम सत्यापन को सक्षम करने के लिए एक समझौता ज्ञापन के माध्यम से राज्य/संघ राज्य क्षेत्रों के कल्याणकारी योजना प्लेटफार्मों के साथ यूडीआईडी डेटाबेस के एकीकरण के लिए एक तंत्र निर्धारित किया है। उन्होनें कहा कि हिमाचल प्रदेश राज्य के संबंध में दिव्यांगता राहत भत्ते सहित उसके राज्य स्तरीय कल्याणकारी योजना पोर्टलों को यूडीआईडी डेटाबेस के साथ एकीकृत करने का कोई प्रस्ताव या अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ है।
शिमला , 02 अप्रैल [ विशाल सूद ] ! डाॅ. सिकंदर कुमार, राज्यसभा सांसद एवं प्रदेश महामंत्री भाजपा ने सदन में दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और कौशल विकास का मामला उठाते हुए पूछा कि नव प्रारंभ की गई दिव्यांगजन कौशल योजना तथा दिव्यांग सहारा योजना के विशिष्ट उदेश्यों एवं राज्य-वार कार्यान्वयन योजना का ब्यौरा क्या है? क्या सरकार की प्रत्येक जिले में सहायक प्रौद्योगिकी मार्ट स्थापित किए जाने की योजना है ताकि एआइ-एकीकृत सहायक उपकरणों की खुदरा शैली में उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके ?
यह सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए है कि भारतीय कृत्रिक अंग निर्माण निगम के लिए बढ़ाए गए वित्तपोषण से उच्च प्रौद्योगिकी दिव्यांग सहायता उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम हो और विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र के डाटाबेस को हिमाचल प्रदेश में राज्य स्तरीय कल्याणकारी योजनाओं के साथ एकीकृत करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं, ताकि दिव्यांग राहत भत्ता का निर्बाध वितरण सुनिश्चित किया जा सके ?
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सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने सदन को बताते हुए कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित दिव्यांग सहारा योजना का मुख्य उदेश्य पात्र दिव्यांगजनों को एक बुनियादी आवश्यकता के रूप में उच्च गुणवत्ता वाले सहायक यंत्रों/उपकरणों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित कराना है। यह योजना सहायक उपकरणों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम को सहायता प्रदान करती है।
इसके साथ ही, यह कृत्रिम बुद्धिमतता एकीकरण सहित अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने, प्रधानमंत्री दिव्याशा वयोश्री केंद्रों को मजबूत करने और आधुनिक रिटेल स्टाइल केंद्रों के रूप में असिस्टिव टेक्नोलाॅजी माट्र्स की स्थापना का प्रावधान करती है जहां दिव्यांगजन और वरिष्ठ नागरिक सहायक उपकरणों को देख सकेंगे, उनका परीक्षण कर सकेंगे और उन्हें खरीद सकेंगे। जहां तक राज्य वार कार्यान्वयन योजना का प्रश्न है तो दोनों योजनाओं के फ्रेमवर्क में राज्य वार आबंटन की परिकल्पना नहीं की गई है और इन योजनाओं को उदेश्य देश भर के लाभार्थियों को कवर करना है।
उन्होनें आगे कहा कि वर्तमान में प्रत्येक जिले में असिस्टिव टेक्नोलाॅजी माट्र्स स्थापित करने की कोई योजना नहीं है। उन्होनें कहा कि भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम उन्नत सहायक उपकरणों केे स्वदेश विकास, डिजाइन और निर्माण के उपाय कर रहा है। आयात पर निर्भरता कम करने के उदेश्य से हाई एंड असिस्टिव टेक्नोलाॅजी में टेक्नोलाॅजी ट्रांसफर के लिए मूल उपकरण निर्माताओं और स्टार्ट-अप्स के साथ सहयोग करने के प्र्रयास किए जा रहे हैं। यह निगम अपनी आंतरिक अनुसंधान और विकास क्षमताओं को भी मजबूत कर रहा है, प्रौद्योगिकी उन्नयन कर रहा है, और अनुसंधान संस्थानों एवं उद्योग भागीदारों के साथ सहयोग को बढ़ावा दे रहा है।
केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र उप-योजना का उदेश्य दिव्यांगजनों को एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाना और एक केंद्रीकृत पोर्टल के माध्यम से दिव्यांगता प्रमाण पत्र और यूडीआईडी कार्ड जारी करने में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करना है। विभाग ने सुरक्षित डेटा साझाकरण और रीयल टाइम सत्यापन को सक्षम करने के लिए एक समझौता ज्ञापन के माध्यम से राज्य/संघ राज्य क्षेत्रों के कल्याणकारी योजना प्लेटफार्मों के साथ यूडीआईडी डेटाबेस के एकीकरण के लिए एक तंत्र निर्धारित किया है।
उन्होनें कहा कि हिमाचल प्रदेश राज्य के संबंध में दिव्यांगता राहत भत्ते सहित उसके राज्य स्तरीय कल्याणकारी योजना पोर्टलों को यूडीआईडी डेटाबेस के साथ एकीकृत करने का कोई प्रस्ताव या अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ है।
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